निदेशक रक्षा सामग्री एंव भण्डार अनुसंधान तथा विकास स्थापना (DMSRDE)
डॉ. एन. ईश्वर प्रसाद
निदेशक, रक्षा सामग्री एंव भण्डार अनुसंधान तथा विकास स्थापना (DMSRDE)

डॉ. एन. ईश्वर प्रसाद ने एफआईई, एफएपीएएस, एफआईआईएम, एफएईएसआई, एफएपीएएम, एफआईएनएसआईएस, बी.टेक. (1985) और पीएच.डी. (1993) प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू), वाराणसी, भारत से धातु विज्ञान इंजीनियरिंग में की है, वे डीआरडीओ के नए और रचनात्मक एवं प्रौद्योगिकीविद् हैं और वर्तमान एवं उत्कृष्ठ वैज्ञानिक / वैज्ञानिक 'एससी एच' और निदेशक, रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान और विकास स्थापना (डीएमएसआरडीई), डीआरडीओ, कानपुर, भारत में सेवा दे रहे हैं। अपने कैरियर में डॉ. प्रसाद ने कई एयरोस्पेस और अन्य उन्नत सामग्री के डिज़ाइन और विकास, व्यापक वर्णन और वायुरोधी प्रमाणित उत्पादन में महत्वपूर्ण और उत्कृष्ठ योगदान दिया है, जैसे, (i) एलसीए, एलसीएच और भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के लिए एएल और एएल-एलआई मिश्रण, (ii) एयरो स्टील्स, जिसमें भारतीय मिसाइल प्रोग्राम्स के लिए मारिंग और पीएच स्टील्स शामिल हैं, (iii) उच्च शक्ति और उच्च तापमान वाले टीआई मिश्रण, जिसमें एलसीए स्लैट ट्रैक्स और लैंडिंग गियर के लिए बीटा-टीआई मिश्रण शामिल हैं, (iv) उन्नत अल्ट्राहाई तापमान वाली सामग्री - एमओ और टीआई इंटरमैटेलिक्स, मोनोलिथिक सेरामिक्स (स्ट्रक्चरल एल्यूमिना, ग्रेफाइट और SiC), कार्बन, सिलिका और एसआईसी-आधारित सतत फाइबर-युक्त, सिरेमिक-मैट्रिक्स कंपोजिट (सीएफसीसी), (v) बुलेट प्रूफ जैकेट्स के लिए मॉड्यूलर कंपोजिट और एलसीएच आर्मर, और (vi) रडार अब्जॉर्बिंग स्टेल्थ सामग्री, इंडियन एयरबोर्न प्लेटफॉर्म्स और सिस्टम्स के लिए स्ट्रक्चर्स और कोटिंग्स। डीएमएसआरडीई, कानपुर के निदेशक पद पर नियुक्ति से पहले इन्होंने 2009-2015 में आरसीएमए (मटेरियल्स) सीईएमआईएलएसी के क्षेत्रीय निदेशक के पद पर सेवा दी। डॉ. प्रसाद ने 180 अनंतिम मंजूरी, 11 टाइप के अनुमोदन और 10 से अधिक टीओटीएस सहित, 14 बिलियन से अधिक के रक्षा हार्डवेयर का लाभ दिया है।

डीएमएसआरडीई में निदेशक के रूप में कार्यभार संभालने के बाद, डॉ. प्रसाद ने कुछ अधिक महत्वपूर्ण और नए बदलाव किए और इस प्रकार गैर-धातु और कार्यात्मक सामग्री के व्यापक क्षेत्रों में अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और उत्पाद विकास के लिए कई नए तरीके खोजें, जैसे: (i) पॉलिमर विज्ञान और प्रौद्योगिकी, (ii) तकनीकी वस्त्र, (iii) फाइबर विज्ञान और उत्पादन प्रौद्योगिकी, (iv) कैमोफ्लेज और स्टेल्थ मटेरियल्स और प्रौद्योगिकी, (v) नैनोसंरचित सामग्री और सम्मिश्रण (vi) उच्च तापमान, उच्च चिपचिपापन ईधन और स्नेहक एवं (vii) व्यक्तिगत सुरक्षा प्रणाली। इन्हंग मॉड्यूलर संरचनाओं के डिजाइन, विकास और निर्माण एवं इनका भारतीय सेना के जीएसक्यूआर-1438 के लिए बीपीजे नाम के सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण व्यक्तिगत सुरक्षा प्रणाली में सफल रूप से उपयोग के लिए जाना जाता है। इनके निर्देशन में डीएमएसआरडीई ने 30 महीनों में मात्र 4 करोड़ के परियोजना के खर्च पर 120 करोड़ रूपए तक का कार्य किया है और इसमें 8 स्वीकृत परियोजनाओं के साथ, प्राप्ति के लिए 95 उत्पादों की पहचान की गई है, 14 नए अनुसंधान क्षेत्रों को आगे बढ़ाना है और नई परियोजनाओं की शुरूआत के रूप में 20 से अधिक कार्य गतिविधियां और कार्ड परियोजना उपलब्ध हैंहैं। डीआरडीओ ने इन उत्कृष्ट योगदानों के आधार पर डीएमएसआरडीई को वर्ष 2016 के लिए डीआरडीओ की सर्वश्रेष्ठ विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला मानकर प्रतिष्ठित टाइटेनियम ट्रॉफी से सम्मानित किया है।

डॉ. प्रसाद के उपयोगी अनुसंधान की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं और सम्मेलन प्रक्रियाओं (715 लिखित/संपादित पुस्तकें और पुस्तक के 40 अध्याय सहित) 300 से अधिक लेखों के साथ-साथ 40 वर्गीकृत और गैर-वर्गीकृत और साथ ही कई तकनीकी रिपोर्टों की समीक्षा हो चुकी है; और 2014 में अल-ली अलॉयज पर एल्सविएर, यूएसए द्वारा पहले अंतर्राष्ट्रीय मोनोग्राफ और 2017 में आईआईएम / स्प्रिंगर पब्लिकेशंस, सिंगापुर के द्वारा एयरोस्पेस मैटेरियल्स एवं मटेरियल टेक्नोलॉजीज पर एक 2-बुक वेड मैकुम की स्पिंगर में अत्यधिक प्रशंसा की जा चुकी है। इन्होंने 110 गोपनीय रिपोर्ट्स भी लिखी हैं और डीआरडीओ के लिए 260 से अधिक प्रमाणन दस्तावेज़ तैयार किए हैं। इन योगदानों के महत्व से डॉ. प्रसाद को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार दिए गए जिनमें: युवा वैज्ञानिक पुरस्कार (आईएससीए, 1991), युवा धातुकर्मी (इस्पात मंत्रालय,1994), एवीएच की हम्बोल्ट रिसर्च फेलोशिप (1998-99), मैक्स-प्लैंक-इंस्टीट्यूट (स्टटगार्ट) के आंगुतक वैज्ञानिक (1998-99), बिनानी गोल्ड मेडल (आईआईएम, 2006), वर्ष के धातुकर्मी (इस्पात मंत्रालय, 2010), आंध्र विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएई, 2012-2016) का एआईसीटीई-आईएनएई प्रतिष्ठित विजिटिंग प्रोफेसरशिप, आईआईटी-बीएचयू (एमईटी) का प्रतिष्ठित विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार (2013), एईईएसआई का डॉ. वीएम घटके पुरस्कार (2014 में), एईएसआई का राष्ट्रीय वैमानिकी पुरस्कार - 2017 और आईआईएम का जीडी बिड़ला गोल्ड मेडल-2018 शामिल है। डॉ. प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियर्स (भारत) [एफआईई, 2009 में], इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स [एफआईआईएम, 2011 में], एपी एकेडेमी ऑफ़ साइंसेज [एफएपीएएस, 2011 में] के फैलो हैं, वे भारतीय विमानिकी सोसाइटी के फैलो (एफएईएसआई, 2016 में) और एशिया पैसेफिक एकेडेमी ऑफ़ मेटेरियल्स [एफएपीएम, 2017 में] के फैलो और इंडियन स्ट्रक्चरल इंटीग्रिटी सोसाइटी के फाउंडर फैलो [एफआईएनएसआईएस, 2018 में] रहे हैं।

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