डॉ. समीर वी. कामत
डॉ. समीर वी. कामत
महानिदेशक (नेवल सिस्टम्स व मटेरियल्स)

विशिष्ट वैज्ञानिक, डॉ. समीर वी. कामत ने 1 जुलाई 2017 से डीआरडीओ में महानिदेशक (नौसेना प्रणाली और सामग्री) के रूप में कार्यभार संभाला। डॉ. कामत ने 1985 में आईआईटी खड़गपुर से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की और सामग्रियों के यांत्रिक व्यवहार के क्षेत्र में विशेषज्ञता के साथ द ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी, यूएसए से 1988 में सामग्री विज्ञान और इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।

डॉ. कामत ने 1989 में हैदराबाद स्थित डीएमआरएल प्रयोगशाला में वैज्ञानिक 'सी' के रूप में डीआरडीओ में काम शुरू किया और अक्तूबर 2013 में उत्कृष्ट वैज्ञानिक/वैज्ञानिक 'एच" के रूप में पदोन्नति प्राप्त की। बाद में, उन्होंने 17 अगस्त, 2015 को प्रयोगशाला निदेशक के रूप में पदभार संभाला। पिछले 25 वर्षों के दौरान, डॉ. कामत ने उन्नत सामग्रियों जैसे कि पार्टिकुलेट प्रबलित धातु मैट्रिक्स कम्पोजिट्स, सिरेमिक मैट्रिक्स कम्पोजिट्स, एल्युमिनियम-लिथियम मिश्र धातुओं, उच्च शक्ति वाली एल्युमिनियम मिश्र धातुओं और टाइटेनियम मिश्र धातुओं में सूक्ष्म संरचना-यांत्रिक गुणधर्म सहसंबंधों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं जिसके कारण विभिन्न रक्षा अनुप्रयोगों के लिए विकास किया गया है। अतिउच्च शक्ति वाले 250 ग्रेड माराजिंग और डीएमआर 1700 स्टील के स्ट्रेस कोरोज़न क्रैकिंग (एससीसी) व्यवहार पर उनके कार्य के परिणामस्वरुप समुद्री वातावरण में एससीसी विफलता के विरुद्ध इन प्रकार के स्टील की रक्षा के लिए तीन परत वाली कोटिंग प्रणाली का विकास किया गया है। इस कोटिंग प्रणाली का क्रियांवयन डीआरडीओ में तैयार की जा रही विभिन्न मिसाइलों में प्रयुक्त 250 ग्रेड मार्जरिंग से निर्मित सभी राकेट मोटर केसिंग के संरक्षण हेतु किया जा रहा है।

डॉ. कामत ने अत्याधुनिक प्रयोगात्मक सुविधाओं की स्थापना और छोटी मात्रा में सामग्रियों के यांत्रिक व्यवहार के निरूपण के लिए, विशेष रूप से एमईएमएस में प्रयुक्त सामग्रियों के लिए विशेषज्ञता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हाल ही के दिनों में, डॉ. कामत ने डीएमआरएल में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुम्बक (आरईपीएम) के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। उनके नेतृत्व में, उनकी टीम ने उच्च ऊर्जा उत्पाद Sm2Co17 चुम्बकों, अतिउच्च तापमान Sm2Co17 चुम्बकों और अवशेष के कम तापमान गुणांक वाली Gd प्रतिस्थापित Sm2Co17 चुम्बकों को तैयार किया है। इन चुम्बकों की आपूर्ति डीआरडीओ की विभिन्न सहयोगी प्रयोगशालाओं को की जा रही है। प्रति वर्ष 3000 किग्रा चुम्बकों के उत्पादन के लिए संयंत्र की स्थापना हेतु इंडियन रेयर अर्थ्स (आईआरईएल) को आरईपीएम प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण हेतु आईआरईएल के साथ हाल ही में टीओटी के लिए लाइसेंसिंग समझौते पर हस्ताक्षर किया गया है। इस महत्वपूर्ण आरईपीएम प्रौद्योगिकी में देश को पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिनरल-टू-मैग्नेट कार्यक्रम की शुरुआत करने हेतु डीएमआरएल, बीएआरसी, आईआरईएल और एआरसीआई के बीच समझौता ज्ञापन कराने में डॉ. कामत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अगली पीढ़ी के सेंसर और एक्चुएटर अनुप्रयोगों के लिए उनके नेतृत्व में थोक में और पतली फिल्म के रूप में कई अन्य उन्नत चुम्बकीय, फेरोइलेक्ट्रिक और मल्टीफेरोइक सामग्रियों का भी विकास किया गया है।

डीएमआरएल में, डॉ. कामत ने एडवांस्ड मैग्नेटिक्स ग्रुप, द फंक्शनल मटेरियल्स डिविज़न, द मटेरियल्स साइंस-II डिविज़न, रिसर्च काउंसिल और पेटेंट परीक्षा समिति का नेतृत्व किया है। वे लेबोरेटरीज़ मैनेजमेंट काउंसिल, प्रॉडक्ट काउंसिल व स्क्रूटनी कमिटी के साथ-साथ रक्षा प्रणालियों की महत्वपूर्ण विफलताओं के लिए विफलता विश्लेषण समितियों के सदस्य रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, वे डिफेन्स टेक्नोलॉजी विज़न-2050 सामग्री समिति के अध्यक्ष और एआरएंडडीबी स्ट्रक्चर्स पैनेल; डीएसटी (एसईआरबी) सामग्री व खनन पैनेल; नेशनल स्ट्रेटेजी फॉर रेयर अर्थ्स, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद् और नेशनल टास्क फोर्स ऑन विंड एनर्जी, योजना आयोग पर समितियों के सदस्य रहे हैं। वर्तमान में, वे डिफेन्स साइंस जर्नल के संपादकीय बोर्ड के सदस्य हैं।

अपने विभिन्न तकनीकी योगदानों के लिए, डॉ. कामत को 1986 में माइनिंग, जियोलॉजिकल एंड मेटलर्जिकल इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया द्वारा इंद्रनील पदक; 1998 में डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट पुरस्कार; 2006 में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेटल्स का बिनानी स्वर्ण पदक (संयुक्त रूप से); २००८ में इस्पात मंत्रालय द्वारा नेशनल मेटलर्जिस्ट्स डे मेटलर्जिस्ट ऑफ़ द ईयर पुरस्कार; 2009 में नेशनल साइंस डे ओरेशन सिलिकॉन पदक; 2012 में डीआरडीओ साइंटिस्ट ऑफ़ द ईयर पुरस्कार, और आईआईटी खड़गपुर डिस्टिंगुइश्ड एलुम्नी पुरस्कार 2018 प्राप्त हुआ है।

डॉ. कामत इंडियन नेशनल अकैडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग (आईएनएई) और इंस्टिट्यूशन ऑफ़ इंजीनियर्स इंडिया (आईईआई) के फेलो हैं, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेटल्स, मटेरियल्स रिसर्च सोसाइटी ऑफ़ इंडिया, मैग्नेटिक्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया, सोसाइटी फॉर फेल्यर एनालिसिस (और हैदराबाद खंड के अध्यक्ष) और इंडियन सोसाइटी फॉर स्ट्रक्चरल इंटिग्रिटी के आजीवन सदस्य हैं। उन्होंने चार पीएचडी थीसिस के लिए मार्गदर्शन किया है और उनके नाम 180 से अधिक सहकर्मी समीक्षित पत्रिका प्रकाशन और साथ में 35 तकनीकी रिपोर्ट्स हैं।

Back to Top