श्री प्रवीण कुमार मेहता,
श्री प्रवीण कुमार मेहता,
डीएस व महानिदेशक - आयुध व कॉम्बैट इंजीनियरिंग प्रणालियां (एसीई)

विशिष्ट वैज्ञानिक, श्री प्रवीण कुमार मेहता ने 7 अप्रैल 2016 से महानिदेशक (आयुध व कॉम्बैट इंजीनियरिंग प्रणालियां) का कार्यभार संभाला। आयुध व कॉम्बैट प्रणालियों के डिज़ाइन और विकास के लिए वे पुणे, अहमदनगर, नासिक, चेन्नई, बालासोर और चंडीगढ़/मनाली स्थित आयुध क्लस्टर ग्रुप ऑफ़ लैब्स के अंतर्गत वैज्ञानिकों की टीम का मार्गदर्शन कर रहे हैं।

स्वदेशीकरण के लिए बहु-अनुशासनिक विशाल जटिल प्रणालियों का संरचनात्मक डिज़ाइन, विकास, स्थापना, डिलीवरी और तैनाती उनकी विशेषज्ञता का क्षेत्र है। उन्होंने एनआईटी नागपुर से सिविल इंजीनियरिंग की है और वे आईआईटी दिल्ली से प्रशिक्षित स्ट्रक्चरल इंजिनियर हैं। उन्हें 51वें एनडीसी कोर्स के दौरान "निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से रक्षा अनुसंधान व उत्पादन में आत्मनिर्भरता" पर अपने शोध कार्य के लिए एम.फिल (रक्षा व सामरिक अध्ययन) से सम्मानित किया गया है। इस अनुसंधान कार्य में सार्वजनिक निजी क्षेत्र में देश के भीतर उपलब्ध संसाधनों, शामिल प्रौद्योगिकी के आधार पर उत्पादों के स्वदेशीकरण और वर्गीकरण को ध्यान में रखते हुए "रक्षा उपकरण के आयात पर रोक के आधार पर तकनीकी रूप से अंशशोधित निर्धारित समय सीमा आधारित व्यापक राष्ट्रीय मिशन" शामिल है। इस अध्ययन का समापन रक्षा अनुसंधान एवं विकास में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रमुख मील के पत्थर की पहचान करते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास में आत्मनिर्भरता के लिए भविष्य की योजना तैयार कर किया गया।

वे शुरुआत से ही प्रतिष्ठित अग्नि मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े रहे हैं, और उन सभी महत्वपूर्ण जमीनी-समर्थन प्रणालियों के डिज़ाइन और विकास के लिए जिम्मेदार थे जो रेल/सड़क मोबाइल लॉन्च मंचों सहित अग्नि की विभिन्न किस्मों की तैनाती के लिए आवश्यक थी।

1986 में आरएंडडीई (इंजीनियर्स), पुणे में डीआरडीओ प्रयोगशाला में शामिल हुए, और शुरू में आईजीएमडीपी में और उसके बाद प्रोग्राम एसएफएंडडी में अग्नि जमीनी-समर्थन प्रणाली विकास टीम के अग्रणी सदस्यों में से एक हैं। परियोजना निदेशक के रूप में जीसीएंडआईए2 कार्यक्रम के रूप में, उन्होंने अग्नि की किस्मों, यानी अग्नि I, II व III के लिए मिसाइल लॉन्च मंच के सफल विकास की दिशा में टीम का सफल नेतृत्व किया। ये लॉन्च प्रणालियां अग्नि की प्रत्येक किस्म के लिए तैनाती की विशिष्ट रणनीति के अनुसार रेल/सड़क मोबाइल मंचों पर कॉन्फ़िगर की गई हैं। इन बहुअनुशासनिक प्रणालियों की स्थापना के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर प्रवीणता सिमुलेशन, कठोर प्रमाण परीक्षण, व्यापक क्षेत्र परीक्षणों, साथ में गतिशीलता परीक्षणों के माध्यम से सत्यापन के साथ प्राप्त की जाती है। लंबी दूरी की सामरिक मिसाइल शस्त्र प्रणाली के संचालन और विकास के लिए आवश्यक विभिन्न महत्वपूर्ण जमीनी-समर्थन प्रणालियों के विकास के लिए, उन्होंने भारतीय रेलवे, इसरो, सीएसआईआर, उद्योग अग्रणी भागीदार, शिक्षाविद और उपयोगकर्ता जैसे विभिन्न संगठनों के साथ लगातार बातचीत के माध्यम से सभी हितधारकों के बीच निर्णायक अभिनव योजनाओं/समाधानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रौद्योगिकियों की तैनाती में महारथ हासिल करने, उपयोगकर्ता के साथ प्रणाली को अंतिम रूप देने, अग्नि जमीनी प्रणालियों के लिए संचालन प्रशिक्षण व ड्रिल हेतु एमएससी बेगेदेवाड़ी में मदर ऑपरेटिंग बेस की स्थापना की गई।

मार्च 2012 से अप्रैल 2016 तक महाप्रबंधक के रूप में एसीईएम नासिक में, उन्होंने डिलिवरेबल्स, स्टेटिक और उड़ान परीक्षणों के लिए एएनएस कार्यक्रम हेतु केस बॉन्डेड राकेट मोटर्स के सफल संचालन के लिए टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने वर्ष 2013 में कम्पोजिट प्रोपेलेंट के 85टी की प्रोसेसिंग द्वारा मूल्यांकित संयंत्र क्षमता हासिल करने के लिए टीम को सफलतापूर्वक सक्षम किया है। आंतरिक रूप से इन्सुलेशन बिछाने की सुविधा की स्थापना, बड़े आकार के बैच प्रोसेस करने के लिए उत्पादन अनुकूल तकनीकों, और प्रोसेस मानदंडों के अनुकूलन द्वारा समय-सीमा को पूरा करने के लिए रिकॉर्ड समय में बी-05 व के-4 परियोजना के लिए बड़ी संख्या में मोटरों को रिकॉर्ड समय में संसधित किया गया, जिसके परिणामस्वरुप प्रोसेस लीड टाइम में भारी कमी आई। प्रोसेस की गई सभी मोटरों ने बी-05 के विभिन्न उड़ान परीक्षणों और के4 की पहली उड़ान में दोष रहित प्रदर्शन किया। स्वदेशी रूप से निर्मित प्रत्येक मिसाइल की पहुँच को और अधिक बढ़ाने के लिए, सुरक्षा पर उचित विचार के साथ उच्च स्पेसिफिक इम्पल्स वाले प्रोपेलेंट की प्रोसेसिंग एक महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है। अगली पीढ़ी के प्रोपेलेंट के बेहतरीन प्रदर्शन की प्रोसेसिंग के काम को पूरा करने के लिए सभी सुविधाओं की स्थापना के लिए भविष्य की विस्तृत योजना को तैयार किया गया है।

श्री मेहता को पनडुब्बी लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल, के4 के महत्वपूर्ण डिज़ाइन और विकास की दिशा में सामरिक योगदान के लिए वर्ष 2014 में डीआरडीओ विशेष पुरस्कार, वर्ष 2007 में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा डीआरडीओ साइंटिस्ट ऑफ़ द ईयर और डीआरडीओ अग्रणी अनुसंधान / उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी विकास पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने 2006 में टेक्नोलॉजी ग्रुप पुरस्कार, 2002 में लैब लेवल साइंटिस्ट ऑफ़ द ईयर पुरस्कार, 1999 में आत्मनिर्भरता में डीआरडीओ अग्नि उत्कृष्टता पुरस्कार और 2008 में डीईएमए प्रशंसा पुरस्कार प्राप्त हुए है।

वे अनेक पेशेवर सोसाइटीज़ के फेलो और सदस्य हैं।

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