डॉ. विजयन पिल्लई एस.
डॉ. विजयन पिल्लई एस.
निदेशक, नौसेना भौतिक एवं समुद्र विज्ञान प्रयोगशाला (एनपीओएल)

उत्कृष्ट वैज्ञानिक डॉ. विजयन पिल्लई एस. ने 01 अप्रैल, 2019 की प्रभावी तिथि से नौसेना भौतिक एवं समुद्र विज्ञान प्रयोगशाला (एनपीओएल), कोच्चि के निदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया है। डॉ. विजयन पिल्लई एस. ने भारतीय वायु सेना में अपना करियर शुरू किया। वे 1989 में, वैज्ञानिक 'बी' के तौर पर डीआरडीओ में शामिल हुए थे। इन्होंने कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से पीएचडी और आईआईटी खड़गपुर से इंटीग्रेटेड सर्किट एंड सिस्टम इंजीनियरिंग में एम.टेक किया हुआ है।

भारतीय वायु सेना में उनके छोटे कार्यकाल ने उन्हें हवाई और जमीनी उपकरणों में प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान किया, जिसने उन्हें रक्षा अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में उनके संपूर्ण करियर में एक अच्छा स्थान दिलाया है। डीआरडीओ वैज्ञानिक के रूप में, उपयोगकर्ता दृष्टिकोण और अंत-उपयोग स्थितियां, हमेशा ही उनके सिस्टम डिजाइन दृष्टिकोण में शक्तिशाली प्रबल प्रेरणा रही हैं।

इन्होंने सिस्टम उपयोगकर्ता के रूप में शुरूआत करने के बाद, अनुरक्षक, सर्किट डिजाइनर, सिस्टम डिजाइनर, परियोजना समन्वयक, परियोजना प्रबंधक, सहयोगी परियोजना निदेशक, तथा मिशन मोड सोनार परियोजनाओं हेतु परियोजना निदेशक के तौर पर विभिन्न क्षमताओं में काम किया था। निदेशक के रूप में कार्यभार संभालने से पूर्व, उन्होंने यूएसएचयूएस सोनार प्रणालियों हेतु सहयोगी निदेशक के रूप में भी कार्य किया। रूसी डॉकयार्ड में ईकेएम क्लास की पनडुब्बियों में चार यूएसएचयूएस सिस्टम की स्थापना की गई थी। उन्होंने यूएसएचयूएस सोनार सिस्टम को चालू करने के लिए संस्थापना हेतु रूस में डीआरडीओ दल का नेतृत्व किया। इस अवधि के दौरान उनका अपने रूसी समकक्षों के साथ घनिष्ठ संपर्क था। पनडुब्बियों और नौसेना के जहाजों पर पनडुब्बी सोनार प्रणालियों की संस्थापना एवं कमीशनिंग के संदर्भ में, उनके पास 30 वर्षों का समृद्ध कार्य अनुभव है। उनके पास पनडुब्बियों पर 600 से अधिक दिनों की समुद्र-यात्रा करने का अनुभव था।

उन्हें 1998 में परियोजना पंचेन्द्रिय तथा 2008 में परियोजना यूएसएचयूएस के लिए दो बार 'आत्मनिर्भरता में उत्कृष्टता हेतु डीआरडीओ अग्नि पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। वे इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियर्स के फैलो रहे है तथा इंडियन सोसाइटी ऑफ सिस्टम्स फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग और ओसियन सोसाइटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य हैं। उन्होंने दो पेटेंट रखे है और पत्रिकाओं एवं सम्मेलनों और तीन तकनीकी रिपोर्टों में दस पत्रों को प्रकाशित किया है।


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