डॉ चित्रा राजगोपाल
डॉ चित्रा राजगोपाल
डीएस और महानिदेशक - (आरएंडएम)

डॉ (सुश्री) चित्रा राजगोपाल, डीएस और महानिदेशक (एसएएम) महानिदेशक (आर एंड एम) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं।

डॉ. चित्रा राजगोपाल, डी एस और महानिदेशक (एसएएम) को 14 दिसंबर, 2016 से अनुसंधान एवं विकास (प्रणाली विश्लेषण और प्रतिरूपण) का मुख्य नियंत्रक नियुक्त किया गया था, बाद में उन्हें फिर से महानिदेशक (एसएएम) नियुक्त किया गया।

इससे पहले, वे उत्कृष्ट वैज्ञानिक और निदेशक सीएफईएस के पद पर नियुक्त थीं।

आरटीआई अधिनियम 2005 के अनुसार वह सा प्रथम अपीलीय प्राधिकरण (एफएए), डीआरडीओ का पद भी संभालती हैं।

महानिदेशक एसएएम क्लस्टर के रूप में, वह दो प्रयोगशालाओं सीएफईईएस और आईएसएसए तथा डीआरडीओ मुख्यालय, एसएएमसी के एक केंद्र का कामकाज देखती हैं। सैम क्लस्टर मुख्य रूप से चार व्यापक क्षेत्रों में काम करता है:

  • प्रणाली विश्लेषण
  • युद्ध अभ्यास और निर्णय सहायता उपकरण का विकास
  • सॉफ्टवेयर परिसंपत्ति प्रबंधन और
  • विस्फोटक, पर्यावरण और अग्नि सुरक्षा

डॉ. चित्रा राजगोपाल को 1989 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से ऊष्मा स्थानांतरण के क्षेत्र में पीएच.डी से सम्मानित किया गया। उन्होंने रासायनिक अभियांत्रिकी एवं तकनीक विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, से रासायनिक अभियांत्रिकी में बैचलर की डिग्री प्राप्त की, जिसके दौरान उत्कृष्ट अकादमिक प्रदर्शन के लिए उन्हें विश्वविद्यालय और अरुण मोदी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

उन्होंने डीआरडीओ में अपने कैरियर की शुरूआत नौसेना अनुप्रयोगों के लिए रमन शिफ्ट ब्लू ग्रीन लेजर के हीट पाइप ओवन हेतु गैस डायनामिक लेजर और कॉम्बस्टर के संघटकों की प्रतिरूपण और डिजाइन से की। उनके मौजूदा रूचिगत शोध प्रक्रिया सुरक्षा, पर्यावरण सुरक्षा, विस्फोटक सुरक्षा और ऊष्मा स्थांतरण, रक्षा प्रणालियों और युद्ध अभ्यास के प्रणाली विश्लेषण हैं तथा गैर-रैखिक गतिशील विश्लेषणों के माध्यम से विस्फोट प्रतिरोधी संरचनाओं की अंतःक्रिया के प्रतिरूपण में शामिल हैं; ऊंची इमारतों पर विमान हमले के प्रतिरूपण; विमानन ईंधन विस्फोट के प्रभाव और क्षति; धूल विस्फोटों के सीएफडी प्रतिरूपण; प्रतिक्रिया बलगति के प्रतिरूपण; कॉम्पैक्ट बायो-ईंधन सुधारक के विभिन्न विन्यास में ऊष्मा स्थांतरण और द्रव प्रवाह; जटिल शहरी परिदृश्यों में रासायनिक एजेंट फैलाव के प्रतिरूपण आदि।

उनके कई योगदानों में एमओडी अनुप्रयोगों के लिए ऊष्मा स्थानांतरण उपकरण एवं कबस्टर्स का डिजाइन एवं विकास; जोखिम और संकट विश्लेषण (आरएचए) तथा आपदा प्रबंधन के लिए एकीकृत सॉफ्टवेयर पैकेज; खतरनाक अपशिष्ट के लिए पारिस्थिति अनुकूल उपचार प्रौद्योगिकियों का विकास; डीआरडीओ प्रयोगशालाओं/आयुध कारखानों से दूषित अपशिष्ट के लिए उपचार प्रणालियों का डिजाइन और प्रतिरूपण; रक्षा प्रतिष्ठानों में खतरनाक सामग्री की संभाल के लिए जोखिम मूल्यांकन तकनीक का अनुप्रयोग; पैकेजिंग अनुप्रयोगों के लिए फोटोडिग्रेडेबल पॉलिमर का विकास और हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए जैव ईंधन सुधारक शामिल हैं।

उन्होंने कई राष्ट्रीय पुरस्कार और डीआरडीडी के पुरस्कार प्राप्त किए है जैसे डीआरडीओ वर्ष के वैज्ञानिक पुरस्कार 2010; समूह प्रौद्योगिकी पुरस्कार 2007, 2009 और 2010; प्रदर्शन उत्कृष्टता के लिए परियोजना टीम पुरस्कार 2016; भारतीय उच्च ऊर्जा सामग्री सोसायटी (एचईएमएसआई) पुरस्कार वर्ष 2016; 2009 में डॉ एस एस मिश्रा मेमोरियल अवार्ड; 2014 में डा. राधाकृष्णन स्वर्ण पदक पुरस्कार; 2015 में भारत सेवा रतन स्वर्ण पदक और 2015 में वैश्विक आर्थिक प्रगति अनुसंधान संघ (जीईपीआरए) द्वारा भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक स्वर्ण पदक। उन्हें विज्ञान और इंजीनियरिंग में मार्क्विस हु इज हु में समावेश हेतु और मानवता के लाभ के लिए पर्यावरण के क्षेत्र में लगातार पांच वर्षों से अधिक प्रौद्योगिकी के उपयोग हेतु टैक म्यूजियम अवार्ड के लिए नामित किया गया है।

उनके अपने क्रेडिट में 53 अंतर्राष्ट्रीय और 51 राष्ट्रीय प्रकाशनों सहित 91 पत्रों, एच-इंडेक्स 26 और आई-10-इंडेक्स 51 के लिए 3088 लेख हैं। वे दो पुस्तक के अध्यायों, तीन पुस्तक समीक्षाओं की लेखक हैं और उनकी 125 तकनीकी रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं। उन्होंने 51 अंतर्राष्ट्रीय और 51 राष्ट्रीय सम्मेलनों में दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। वह आईआईटी और अन्य विभिन्न विश्वविद्यालयों के लिए पीएचडी और एम.टेक परीक्षक हैं और उन्होंने अब तक 5 पीएचडी शोध निर्देशित किए हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर 60 आमंत्रित व्याख्यान दिए हैं और उन्होंने 22 अंतर्राष्ट्रीय / राष्ट्रीय सम्मेलनों / कार्यशालाओं का आयोजन किया है।

वह संयुक्त राष्ट्र के रासायनिक हथियार निषेध संगठन के साथ जुड़ी हैं और निम्नलिखित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और आठ राष्ट्रीय व्यावसायिक निकायों की फेलो / सदस्य हैं:

  • लीडरशिप फॉर इनवायरमेंट एंड डेवलोपमेंट प्रोग्राम (लीड), यूके;
  • हैलोन टैक्निकल ऑपशन कमेटी, यूएनईपी;
  • सॉफ्ट कंप्यूटिंग के पर्यावरण अनुप्रयोगों पर अंतर्राष्ट्रीय पहल, बर्कले विश्वविद्यालय, यूएसए

वह डीआरडीओ के अलावा निम्नलिखित बोर्ड / समितियों की भी सदस्य हैं और टीआईएफएसी (डीएसटी) के 16 अन्य निकायों, विश्वविद्यालयों में भी शामिल हैं:

  • लीडरशिप फॉर इनवायरमेंट एंड डेवलोपमेंट प्रोग्राम (लीड), यूके का संचालन;
  • हॉलन टैक्निकल ऑपशन कमेटी, यूएनईपी;
  • सॉफ्ट कंप्यूटिंग के पर्यावरण अनुप्रयोगों पर अंतर्राष्ट्रीय पहल, बर्कले विश्वविद्यालय, यूएसए

वह विस्फोटक भंडारण और परिवहन समिति (एसटीईसी) की उपाध्यक्ष, डीआरडीओ एसएवंटी प्रबंधन परिषद (डीएसटीएमसी) की सदस्य सचिव और प्रस्तावित डीआरडीओ प्रणाली सुरक्षा विनियामक बोर्ड (डीएसएसआरबी) की सदस्य सचिव हैं।

उनके अपने क्रेडिट में बारह पेटेंट हैं (दो स्वीकृत, 10 दर्ज हैं)। उनके द्वारा विकसित की गई दो तकनीकों को उद्योग में स्थानांतरित कर दिया गया है तथा दो अन्य को नागरिक क्षेत्रों में स्थानांतरण के लिए चुना गया है।

वह अमेरिकन केमिकल साइंस जर्नल और जर्नल ऑफ हैजर्डस मैटिरियल सहित पांच अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशनों की समीक्षा करती हैं।

एसटीईसी के उपाध्यक्ष के रूप में, वे विस्फोटक प्रसंस्करण और भंडारण सुविधाओं के स्थल-चयन से संबंधित विनियमों को प्रतिपादित, संशोधित और अनुमोदित करने, सर्विस विस्फोटक / गोला बारूद के परिवहन, उनके सुरक्षित निपटान और प्रणाली सुरक्षा विश्लेषण के लिए मानकों के विकास तथा स्थल-चयन, सुरक्षा जांच, जोखिम वर्गीकरण परीक्षणों और दुर्घटना जांच के माध्यम से इसके अनुपालन की निगरानी करने में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।

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