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डॉ. सुधीर मिश्रा

डॉ. सुधीर मिश्रा

डॉ. सुधीर मिश्रा

डीएस और महानिदेशक और सीईओ और एमडी, ब्रह्मोस एयरोस्पेस

डॉ. सुधीर मिश्रा, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और (ब्रह्मोस), डीआरडीओ, रक्षा मंत्रालय तथा सीईओ और एमडी, ब्रह्मोस एयरोस्पेस के महानिदेशक हैं, जो विभिन्न कार्य केंद्रों में कार्यरत अत्यधिक प्रेरित और तकनीकी रूप से सक्षम इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीशियनों की टीम का नेतृत्व कर रहे हैं, जो विश्व की सर्वश्रेष्ठ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को भारतीय सशस्त्र बलों के तीनों अंगों की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए सफलतापूर्वक विकसित और वितरित कर रहे हैं।

डॉ. मिश्रा गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, जबलपुर से स्नातक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, वारंगल से पीएचडी हैं। उनके पास मिसाइल प्रौद्योगिकी, उत्पादन प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी प्रबंधन और रक्षा कूटनीति के क्षेत्र में 36 साल का आरएंडडी अनुभव है। उन्‍होंने कई सफल प्रौद्योगिकियों को विकसित करके मिसाइल प्रौद्योगिकियों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए भारतीय अनुसंधान में बहुत योगदान दिया है। उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और योगदान के परिणामस्वरूप कई डीआरडीओ मिसाइल योजनाएं पूरी हुई हैं।

सीईओ और एमडी, ब्रह्मोस एयरोस्पेस के रूप में उनके "माइंड टू मार्केट" दृष्टिकोण ने डिजाइन, विकास, निर्माण और उत्पाद समर्थन का नेतृत्व किया है, जिसमें ब्रह्मोस वेपन सिस्टम का संपूर्ण प्रोडक्ट लाइफ साइकिल शामिल है। उनके नेतृत्व में "ब्रह्मोस टीम" ने जमीन से जमीन, समुद्र से जमीन और हवा से समुद्र / जमीन के प्रयोग के लिए नई क्षमताएं और संस्करण प्राप्त किए। उन्होंने ब्रह्मोस-एयर संस्करण कार्यक्रम की अगुवाई की, जिसमें सागर और भूमि लक्ष्य के विरुद्ध सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस की सफल उड़ान का परीक्षण किया गया। ब्रह्मोस-ए की प्राप्ति भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है जो इस तरह की अनूठी क्षमता रखने वाला दुनिया का पहला देश है। उनके सफल मार्गदर्शन में पहली बार इस क्षमता के हथियार को तीनों सेवाओं में शामिल किया गया है। डॉ. मिश्रा के जोश और दृष्टिकोण ने भारतीय रक्षा हथियारों और उपकरणों के लिए निर्यात की मांग को पूरा करन में उत्कृष्ट सफलताएं प्राप्त की हैं। उनके रक्षा कूटनीतिक कौशल के परिणामस्वरूप मैत्रीपूर्ण देशों के साथ विदेश नीति और रक्षा सहयोग तंत्र के अंतर्गत कई रक्षा अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं सफल हुईं। उन्होंने रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए कई देशों का दौरा किया है।

बीएटीएल तिरुवनंतपुरम के अध्यक्ष के रूप में इन्हें इनकी नवीन प्रबंधन तकनीक द्वारा हर साल होने वाली हानि से लाभ कमाने वाली कंपनी के रूप में तब्दील करने का श्रेय दिया जाता है।

वह कॉस्मोनॉटिक्स की रूसी अकादमी से शिक्षाविद हैं। वह रॉयल एरोनॉटिकल सोसाइटी (यूके), एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स (आईईटीई), इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ प्रोडक्शन इंजीनियर्स एंड सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, नई दिल्ली के शोध छात्र हैं। वह कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रोफेशनल सोसाइटीज के सदस्य हैं।

उन्हें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, शोभित विश्वविद्यालय, सहारनपुर, उत्तर प्रदेश, एसआरएम विश्वविद्यालय, लखनऊ और पीपुल्स विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि से सम्मानित किया गया है।

उन्हें भारत के प्रधानमंत्री द्वारा "डीआरडीओ साइंटिस्ट ऑफ द ईयर अवार्ड", आईआईटी मद्रास द्वारा "विशिष्ट छात्र पुरस्कार 2018", इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (भारत) द्वारा "प्रतिष्ठित इंजीनियर पुरस्कार", इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स, कोलकाता द्वारा "आईआईएम-टाटा गोल्ड मेडल अवार्ड", मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश द्वारा "मध्य प्रदेश गौरव सम्मान", गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, जबलपुर द्वारा "विशिष्ट छात्र पुरस्कार", द मशीनिस्ट, टाइम्स ऑफ़ इंडिया ग्रुप द्वारा "सुपर सीईओ अवार्ड", “विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा "विज्ञान प्रतिभा सम्मान", श्रीराम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, जबलपुर द्वारा “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड" से सम्मानित किया गया है।

वह गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा राजस्थान के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य हैं, जो राजस्थान के माननीय राज्यपाल और कुलाधिपति द्वारा नामित किये गए हैं और कई शैक्षणिक संस्थानों और सोसायटी के सलाहकार बोर्ड में सदस्य हैं। उन्होंने अनेक वैज्ञानिक पत्र प्रकाशित किए हैं और राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों व सम्मेलनों में कई व्याख्यान दिए हैं।

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