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डॉ जी. सतीश रेड्डी

डॉ जी. सतीश रेड्डी

डॉ जी. सतीश रेड्डी

सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग, एवं चेयरमैन डीआरडीओ

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ जी सतीश रेड्डी ने रक्षा प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास का नेतृत्व किया हैं। देश में शीर्ष रक्षा वैज्ञानिक के रूप में, डॉ रेड्डी मिसाइलों और रणनीतिक प्रणालियों, लड़ाकू हवाई जहाजों और मानव रहित हवाई रक्षा प्रणालियों, जलगत प्रणालियों, रडार सिस्टम, रणनीतिक सामग्री, आयुध, और भविष्यवादी प्रौद्योगिकियों पर प्रमुख कार्यक्रमों के विकास का मार्गदर्शन कर रहे हैं। एक दूरदर्शी और संस्था-निर्माता के रूप में उनके प्रौद्योगिकी नेतृत्व ने भारतीय सशस्त्र बलों के लिए 'सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों' के विकास पर अत्यन्त प्रभाव डाला हैं।

देश के अग्रणी एयरोस्पेस वैज्ञानिकों में से एक, डॉ रेड्डी एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के महानिदेशक भी हैं, जिसने चौथी पीढ़ी के हल्के लडाकू जहाज तेजस विकसित किया है, और जिसे सक्रिय सेवा में शामिल किया गया है।

डॉ सतीश रेड्डी द्वारा रक्षा परिसंपत्तियों के केन्द्रबिन्दु नेविगेशन तकनीक और प्रणालियाँ को कई प्लेटफार्मों के लिए और अत्यन्त महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करते हुए डिजाइन और विकसित किया गया हैं। युवावस्था से ही इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन और सिस्टम इंजीनियरिंग पर काम करते हुए, डॉ रेड्डी ने कम समय में विभिन्न प्रमुख रक्षा प्रणालियों को तैयार किया।

नेविगेशन और एविओनिक्स डिज़ाइन में अपने विशाल अनुभव के साथ इन्होने अग्नि, पृथ्वी, आकाश और एयरोस्पेस अनुप्रयोगों जैसे ए एल एच के लिए जी 3 आई एन एस, जहाजों और पनडुब्बी अनुप्रयोगों के लिए आई एन एस , तथा उन्नत प्रौद्योगिकी प्रौद्योगिकियों के लिए कई विकास परियोजनाओं का निर्देशन किया।

आरसीआई के निदेशक के रूप में, इन्होंने आई आई आर अन्वेषक, आरएफ अन्वेषक, एकीकृत एवियोनिक्स मॉड्यूल और कई अन्य प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों के विकास का नेतृत्व किया। मिसाइलों और सामरिक प्रणालियों के महानिदेशक के रूप में इन्होंने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल,जमीन से हवा में मारक, हवा से जमीन पर मारक, हवा से हवा में मारक और लम्बी दूरी की गाइडेड बॉम्ब के लिए विभिन्न प्रकार की मिसाइलों का विकास किया।

इनके नेतृत्व में भारत की पहली एंटी-सैटेलाइट (ए-सैट)मिसाइल मिशन शक्ति का सफल परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया। इनके कुशल नेतृत्व ने वायु रक्षा प्रणालियों बी वी आर ए एम अस्त्र, आकाश, एम आर एस ए एम, एल आर एस ए एम , क्यू आर एस ए एम को विकसित किया है। दुनिया की सबसे लंबी दूरी की बंदूक ए टी ए जी एस, एंटी-रेडिएशन मिसाइल, स्मार्ट वायु क्षेत्र हथियार, स्मार्ट बम और मिसाइल असिस्टेड टारपीडो रिलीज प्रणाली की सफलता डॉ रेड्डी की दूरदृष्टि का परिणाम हैं। डॉ रेड्डी ने नवाचार और अत्याधुनिक शोध के कई क्षेत्रों में जैसे हाइपरसोनिक और क्वांटम तकनीकों का विकास किया।

इनके नेतृत्व में, कई उन्नत प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों को अवधारित एवं साकार किया गया। इन कार्यक्रमों से देश के भीतर महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों का विकास और निर्माण हुआ है। इन्होंने उद्योगो को सक्रिय करके रक्षा अनुसंधान, विकास और उत्पादन के सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया है।

डॉ. रेड्डी ने एक ऐसे ईको-प्रणाली को बढ़ावा देने की कोशिश की हैं जो मुक्त सोच और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है। नवीन तकनीकों पर काम करने के लिए युवा वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं का गठन, विश्वविद्यालयों में नए अनुसंधान केंद्रों की स्थापना से शिक्षा के साथ निकट संपर्क को सक्रिय करने और उद्योग के लिए प्रौद्योगिकियों का तेजी से हस्तांतरण इनके कुछ साहसिक पहल हैं जिन्होंने उन्नत रक्षा प्रणालियों के अनुसंधान और विकास की नींव रखी है। इसके अलावा, वैज्ञानिक मिशन के लिए होने वाली प्रक्रियाओं के बोझ में कटौती करने का उनका मिशन, वैज्ञानिक समुदाय के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहा है और वैज्ञानिकों को तकनीकें प्राप्त करने में सक्षम कर रहा है। इनके द्वारा उठाए गए कदमों में उद्योग की सुविधा हेतु तकनीक स्थानान्तरण की नीतियों को आसान बनाना, भारतीय उद्योग के साथ आईपीआर साझा करना, डीआरडीओ की नयी खरीद नियामवली और नवोन्मेष प्रतियोगिताएं शामिल हैं।

डॉ रेड्डी ने डीआरडीओ की विविध प्रतिभाओ का उपयोग करके कोविड -19 महामारी के खिलाफ चल रही लड़ाई में आवश्यक प्रौद्योगिकियों का विकास किया हैं। इनके मार्गदर्शन में, कोविड से मुकाबला करने के लिए लगभग 50 प्रौद्योगिकियों का विकास किया गया है और लगभग 75 उत्पादों को 100 उद्योगों में स्थानांतरित किया गया है। इन्होंने महामारी के दौरान अनुकरणीय साहस और नेतृत्व का प्रदर्शन किया और इनके बिना रूके काम करने के प्रवृति ने कभी भी ‘आत्मसमर्पण नहीं’ भावना की गवाही दी, और एक वैज्ञानिक के उत्कृष्ट मानवीय पहलू को प्रभावी ढंग से चित्रित किया।

डॉ. रेड्डी के प्रौद्योगिकी विकास और वैज्ञानिक खोज को बढ़ावा देने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के फलस्वरूप इन्हें देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस की मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया है। इनके विशाल वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान को अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों ने सम्मान और पुरस्कार के रूप में स्वीकार किया है। ये 100 से अधिक वर्षों में रॉयल एरोनॉटिकल सोसायटी, लंदन द्वारा प्रतिष्ठित मानद फैलोशिप और सिल्वर मेडल से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय हैं। रॉयल एयरोनॉटिकल सोसाइटी ने भारत में स्वदेशी डिजाइन, विकास और विविध मिसाइल प्रणालियों, एयरोस्पेस वाहनों, निर्देशित हथियारों और एविओनिक्स प्रौद्योगिकियों की तैनाती के लिए डॉ रेड्डी के योगदान को मान्यता दी।

उन्हें अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (ए आई ए ए) मिसाइल प्रणाली पुरस्कार सहित कई अन्य पुरस्कार मिले हैं। ये लगभग चार दशकों में पुरस्कृत होने वाले यूएसए के बाहर पहले वैज्ञानिक हैं। डॉ सतीश रेड्डी को नेशनल सिस्टम गोल्ड मेडल, नेशनल डिज़ाइन अवार्ड, आई ई आई-आई ट्रीपल ई(यू एस ए) अवार्ड फॉर इंजीनियरिंग एक्सीलेंस और होमी जे भाभा गोल्ड मेडल मिले हैं।

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