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दृष्टि


टीबीआरएल, पारम्परिक और गैर-पारम्परिक अस्त्रों से संबंधित तकनीकों के विकास में आत्म-निर्भरता की परिकल्पना करता है और आयुध भंडारों के अंतिम प्रभाव के मूल्यांकन के लिए स्टेट-ऑफ-आर्ट निदान सुविधाएं प्रदान करता है।

ध्येय


पारम्परिक और गैर-पारम्परिक हथियारों से संबंधित गंभीर तकनीकों और उत्पादों का विकास करना। आयुध भंडारों के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए स्टेट-ऑफ-आर्ट डायग्नोस्टिक सुविधाएं प्रदान करना। अपेक्षित अवसंरचना और समर्पित गुणवत्ता श्रम-शक्ति प्रदान कर हथियारों के क्षेत्र में देश में मजबूत तकनीक आधार निर्मित करना।
चरम प्राक्षेपिकी अनुसंधान प्रयोगशाला (च.प्रा.अ.प्र.) की स्थापना रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन के अंतर्गत एक आधुनिक आयुध अनुसंधान प्रयोगशाला के रूप में सन 1961 में हुई। प्रयोगशाला ने सन् 1967 में पूरी तरह से काम करना शुरु किया और तत्कालीन रक्षा मंत्री ने जनवरी 1968 में इसका औपचारिक उदघाटन किया। मुख्य प्रयोगशाला चण्डीगढ़ में स्थित है जबकि फायरिंग रेंज चण्डीगढ़ से 22 कि.मी दूर हरियाणा में रामगढ़ में स्थित है जो 5000 एकड़ क्षेत्रफल में फैली हुई है।
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