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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि


अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर्स) पुणे अपनी उत्पत्ति का सिलसिला द्वितीय विश्व युद्व के दौरान सेनाओं द्वारा प्रयोग किए जा रहे स्वदेशी मूल की सामग्री पर गुणवत्ता नियंत्रण के लिए तथा इन आइटम्स के उत्पादक विनिर्माताओं को मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए कोलकाता में स्थापित अभियंता सामग्री निरीक्षणालय से सम्बद्व करता है। इसका विलय 1946 में पाकिस्तान में चकला स्थित मुख्य यंत्रीकरण निरीक्षणालय के साथ कर दिया गया था। विभाजन के पश्चात् यह निरीक्षणालय अहमदनगर स्थानांतरित कर दिया गया तथा इसका नाम वाहन तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (टीडीईवी) रख दिया गया। डीआरडीओ की गतिविधियों के विस्तार के साथ, इंजीनियर कोर के लिए उपस्कर डिजाइन एवं विकास हेतु एक पृथक प्रतिष्ठान की आवश्यकता अनुभव की गई और 9 फरवरी, 1962 को पुणे में दीघी में आरएवंडीई (इंजी.)प्रतिष्ठापित की गई। इस प्रतिष्ठान की प्राथमिक भूमिका इंजीनियर कोर के लिए सचलता और प्रतिसचलता उपस्कर का विकास था। इस प्रयोगशाला ने युद्वक इंजीनियरी उपस्कर के स्वदेशी विकास में आत्म-निर्भरता उपलब्ध करायी हैं। इस अवधि में, प्रतिष्ठान ने अपनी प्राथमिक भूमिका निभाते हुए सभी प्रमुख हथियार कार्यक्रमों हेतु भू प्रणाली इंजीनियरी में महारथ हासिल कर ली है।

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