संपर्क

उपलब्धियाँ



स्थिर पुल श्रेणी 3

पूर्वी सेक्टर के पहाड़ी क्षेत्रों में आरसीएल गन लगी जीपों द्वारा तंगघाटी तथा खाइयों के पार करने हेतु सेनाओं में लागू तथा विकसित 31 एम विस्तार तथा 2.15 एम के मार्गयुक्त स्थिर पुल श्रेणी 3

हिम दरार पार करने हेतु हल्के वजन के पुल (सीसीबी) 

पुल की लम्बाई 10मी. तथा 1.75मी. मार्ग चौड़ाई है, जो सेनाओं के लिए विकसित और लागू किया गया है। यह पुल बर्फीले क्षेत्र में हिम दरार पार करने हेतु है।.

मानवीय रूप से बनाया जाने वाला आक्रमण पुल श्रेणी -70 (एमएलएबी):

एमएलएबी जिसका विस्तार 31मी. तथा मार्ग चौड़ाई 4मी. है सभी प्रकार के टैंकों द्वारा बाधाओं को पार करने हेतु मैदानों में लगाये जाने हेतु विकसित किया गया है।

सर्वत्र

यह उपस्कर 75मी. विस्तार तक के सूखे तथा जलयुक्त स्थानों पर पुल बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह पुल बहुत थोड़े समय में तैयार किया जा सकता है, सबसे भारी युद्व टैंकों सहित समस्त सैन्य वाहनों के परिवहन की क्षमता रखता है।

लघु विस्तार पुल प्रणाली

आरएवंडीई (ई) 5मी. तथा 10मी. के लघु विस्तार के पुल विकसित कर रहा है, जो कि मौजूदा सर्वत्रा पुलों के साथ जोड़े जा सकते हैं अथवा छोटी दरारों को पार करने हेतु अलग से बनाया जा सकता है।

एसएकेएबी मॉड्युलर पुल

यह परियोजना 6.5मी. के टुकड़ों में 14मी. से 46मी. तक के परिवर्तनीय विस्तार के पुलों हेतु मॉड्युलर पुल प्रणाली यांत्रिक रूप से तैयार करने के विकास पर लक्ष्यकृत है। यह पुल भारी से भारी युद्वक टैंकों सहित सभी वाहनों का भार सहन कर सकता है। इस पुल का उपयोग बाढ़ और भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपात पुल के रूप में किया जा सकता है।

ब्रिज-लेयर टैंक - टी -72 (बीएलटी टी- 72)

टी-72 टैंक चेसिस पर विकसित किया गया ब्रिज लेयर टैंक 3 से 5 मिनट के भीतर 20मी. विस्तार तथा 4मी. चौड़ाई का पुल तैयार करता है।..

अर्जुन आधारित स्लाइड लांच पुल-बिछाने की प्रणाली (बीएलटी- अर्जुन)

 टैंक आधारित स्लाइड लांच पुल-बिछाने की प्रणाली 24मी. तक विस्तार की दरार हेतु विकसित की गई है।

जलस्थल प्लवमान पुल तथा नाव प्रणाली (एएफएफएस)

एक तैरते पुल तथा नाव के रूप में उपयोग हेतु यह प्रणाली एक दो धुरी वाले वाहन पर विकसित की गई है।

बहु प्रयोजन लदानों हेतु स्वचलित सचल प्लेटफार्म (एएमपीएमपी) 

दक्ष एएमपीएमपी रिमोट चालित वाहन है जो भारतीय थल सेना के इंजीनियर्स कोर के लिए बहु-भूमिका सामर्थ्य निभाने हेतु अनुरूप लदानों से सज्जित है। दक्ष द्वारा किए जाने वाले प्रमुख कार्य हैं:-

  • सुधारीकृत विस्फोटक उपकरण व्यवस्था
  • क्षेत्र टोह
  • एनबीसी टोह

स्व प्रणोदित सुरंग स्थापक

यह एक स्व प्रणोदित सुरंग स्थापक है जो स्वदेशी विकसित सुरंगों को लगाने हेतु विकसित किया गया है। यह उपस्कर उच्च क्रास-केंद्री सचलता वाहन पर आधारित है। वाहन के भीतर स्थापित आधानों में लगभग 480 सुरंगें रखी जा सकती हैं। वाहन के पिछले भाग में एक उपयुक्त स्थापक प्रणाली स्थापित की गई है। एक उपयुक्त उपकरण आधान से निकालकर इन्हें जमीन में भीतर स्थापित करता है। यह उपस्कर एक घंटे में 240 सुरंग स्थापित कर सकता है। 

यांत्रिक सुरंगक्षेत्र चिन्हीकरण उपस्कर (एमएफएमई)

यांत्रिक सुरंगक्षेत्र चिन्हीकरण उपस्कर 15मी. के पिकेटिंग अंतराल के साथ 1.8 कि.मी. प्र. घं. की दर पर सुरंगक्षेत्र के चिन्हीकरण हेतु विकसित किया गया है।

काउन्टर माइन फ्लेलl

आरएवंडीई (ई) मे टी-72 टैंक पर काउन्टर माइन फ्लेल तैयार की है जो 3 कि.मी. प्र.घं. की गति से सभी एंटी टैंक तथा एंटी पर्सनल माइन्स साफ करके 4 एम चौड़ी एकल पास की सुरक्षित लेन तैयार कर सकता है

ट्रैकवे लाइट

रेतीले/दलदल वाले क्षेत्र में 12 पहियों वाली श्रेणी के वाहन ट्रैफिक की सहायतार्थ ट्रैकवे उपकरण मानवीय रूप से अथवा मशीन की सहायता से बिछाया जाता है।

ट्रैकवे हैवी

रेतीले/दलदल वाले क्षेत्र में श्रेणी 30 ट्रैफिक की सहायतार्थ यांत्रिक रूप से बिछाया गया ट्रैकवे उपकरण।

मैट ग्राउण्ड सर्फेसिंग सीएल-70

टैट्रा वाहन पर स्थापित मैट ग्राउंड सर्फेसिंग सीएल-70 जो स्वचालित बिछाने तथा रिकवरी क्षमता से युक्त है रेतीले तथा दलदल वाले क्षेत्रों में सचलता प्रदान करने हेतु विकसित किया गया है।

बख्तरबंद इंजीनियरी टोह वाहन (एईआरवी):

एईआरवी का विकास युद्वक इंजीनियरों के टोही प्रचालन संचालन की क्षमता प्रदान करने हेतु वीआरडीई तथा एक अनुबंगी डीआरडीओ प्रतिष्ठान द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।

बख्तरबंद उभयचर डोजर (एईआरवी):

पुलों के लिए स्थल तैयार करने हेतु भिन्न प्रकार के भूभागों में मिट्टी हटाने के कार्य हेतु वीआरडीई द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एएडी जल स्थल पर क्षमता से युक्त है।

मिश्रक-सह-वितरक:

यह उपकरण बम द्वारा क्षतिग्रस्त रनवे तीन घंटे के भीतर मरम्मत करने हेतु विकसित किया गया है।

सचल हाइड्रॉ-न्यूमैटिक लांचर (फाल्कन)

रिमोट चालित वाहन (पीआरवी) की लांचिंग हेतु विकसित सचल हाइड्रॉ-न्यूमैटिक लांचर।

सचल हाइड्रॉ-न्यूमैटिक लांचर, 'निशांत' यूएवीहेतु

यह निशांत यूएवी को 40 से 45 एम/सेक. की सीमान्त गति पर प्रक्षेपित करता है।

भू-प्रणाली इंजीनियरी

इस प्रतिष्ठान ने अनेक प्रकार की स्थैतिक और सचल भू प्रणालियां का डिजाइन एवं विकास कार्य सफलतापूर्वक किया है। सचल भू-प्रणालियां विभिन्न प्रकार के वाहक प्लेटफार्मों पर आधारित है जैसे पहिएदार, मार्ग तथा पटरी युक्त। भू-प्रणालियों में हाइड्रॉलिक/इलेक्ट्रिक सर्वों ड्राइव टेक्नोलॉजी तथा माइक्रोप्रोसेसर आधारित बंद लूप कंट्रोल्स शामिल हैं। भू-प्रणालियां रिमोट प्रचालन क्षमता के साथ स्वचालित हैं तथा बोर्ड पर ही समर्पित विधुत स्रोत युक्त है। भू प्रणालियों के अलावा अन्य सहायक उपकरण भी विकसित किए गए हैं। इनमें सचल विधुत शक्ति, संपीड़ित वायु आपूर्ति, ईंधन वाहन, उठाई-धराई तथा अंतरण प्रणाली और संचार हेतु मास्ट तथा टावर होते हैं।

मास्ट

संयुक्त परियोजना हेतु विकसित स्व्- अवलम्बकारी विधुतयांत्रिक तथा अत्यंत सुसंहत टेलीस्कोपिक मास्ट।

इन्द्र II रेडार का एण्टीना 18.6 एम की ऊंचाई पर स्थापित करने तथा लमाने हेतु टाट्रा वाहन पर स्थापित एक हाइड्रॉलिक रूप से चालित मास्ट विकसित और सेना में उपयोगरत लाया गया। मास्ट को 9 तथा 18.6 एम के बीच किसी भी ऊंचाई पर रोका जा सकता है तथा एक इलेक्ट्रानिक नियंत्रण इस प्रचालन तीन विधियों नामत: स्वचालित, अर्द्वस्वचालित और मानवीय रूप से करता है।

 

एकीकृत विधुत आपूर्ति वाहन (आईपीएसवी)

एकीकृत विधुत आपूर्ति वाहन का विकास विभिन्न युद्वक टुकड़ियों की विधुत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मानकीकृत, विश्वसनीय, विधुत शक्ति के स्रोत के रूप में कार्य करने हेतु किया गया है तथा प्रणाली के कार्य-प्रदर्शन का मूल्यांकन विभिन्न पर्यावरण- स्थितियों के अंतर्गत किया गया है।

परिवर्तनीय गति स्थिर आवृत्ति प्रणाली (वीएससीएफ)

वीएससीएफ प्रणाली का विकास प्राइम मूवर के पी टी ओ के उपयोग द्वारा चलने के दौरान विधुत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मानकीकृत, विश्वसनीय, विधुत शक्ति के स्रोत के रूप में कार्य करने हेतु किया गया है। प्रणाली की प्रचालन गति 1000 आर पी एम से 2400 आर पी एम तक है। प्रणाली व्हील्ड तथा ट्रैक्ड वाहनों के पी टी ओ के साथ एकीकृत किया गया है और कार्य-प्रदर्शन का मूल्यांकन विभिन्न पर्यावरण-स्थितियों के अंतर्गत किया गया है।

हाइपरबैरिक जैम्बर

हाइपरबैरिक चैम्बर्स मूलत: अनुकूलन कक्ष हैं जहां दाब, ताप और आर्द्रता को आवश्यकता के अनुसार नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे एक चैम्बर का प्रचालन आईएनएचएस, अस्विनी, मुंबई में आरंभ किया जा चुका है जो 50 एम समुद्र जल गहराई तक अनुकूलन कर सकता है। इस चैम्बर का उपयोग नौसेना के गोताखोरों के प्रशिक्षण, विसम्पीड़न रो़ड़ के उपचार तथा हाइपरबैरिक आक्सीजन थेरैपी हेतु किया जाता है।

दंगा नियंत्रण जल कैनन प्रणाली

प्रणाली का विकास दंगों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने हेतु किया गया है। इस प्रणाली में एक वाहन के शीर्ष पर दो जल कैनन लगी होती है तथा ऑपरेटर द्वारा नियंत्रित वाटर जेट लगे होते है।

परियोजना संवाहक हेतु

सीएआईआर, बेंगलुरू ने रण अवस्थितिओं में विभिन्न स्तरों पर सीआईडीएसएस के स्थापन हेतु अपक्षित उपस्कर एवं सुविधाओं के आश्र्यीकरण हेतु आर एवं डीई (ई) को एक उप-परियोजना निर्धारित की है। तीन प्रकार के आश्र्य विकसित और थोक उत्पादन किए जा चुके हैं।

  •  प्रणाली व्यवस्था आश्र्य (एसएएस)
  • एकीकृत कमान चौकी आश्र्य (आईसीपीएस)
  • जेनरेटर आश्र्य (जीएस)

एकीकृत रणक्षेत्र आश्र्य

 एकीकृत रणक्षेत्र आश्र्य 96 घंटे की सुरक्षा अवधि के लिए नाभिकीय, जैविक तथा रासायनिक खतरों के विरूद्ध सामूहिक सुरक्षा हेतु एक भूमिगत आश्र्य है। आश्र्य का डिजाइन सैनिकों के लगभग एक प्लाटून जो कि 30 सैनिक है के लिए न्यूनतम चार दिन के लिए पर्यावरण-सुरक्षा प्रदान करने हेतु तैयार किया गया है। इस आश्र्य में जीवन आपूर्ति, अपशिष्ट निपटान, संचार प्रणाली आदि की व्यवस्था है। यह आश्र्य उपयोग में लाया जा रहा है तथा थोक उत्पादन किया जा रहा है।

पर्वतारोहण उपकरण

थलसेना की हिमालयी तराई की जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के पर्वतारोहण उपकरणों का डिजाइन और विकास किया गया है। पिटन हैमर, आइस पिटन, क्रैम्पोन, अरोही/अवरोही, दीवार पर चढ़ने की सीढ़ी तथा स्थान खाली करने हेतु उनमें से कुछ हैं।

एयूवी हेतु प्रक्षेप तथा पुनप्राप्ति प्रणाली

यह परियोजना स्वायत जलगत के लिए योत विहीन प्रक्षेप एवं पुनप्राप्ति प्रणाली के विकास पर लक्ष्य की गई है, जो समूह के भीतर अपेक्षित गहराई पर एयूवी के प्रक्षेपण हेतु सक्षम होगी।

लक्ष्य एमके-1 हेतु सचल भू प्रणाली

आरएवंडीई(ई) लक्ष्य, जोकि चालकरहित लक्ष्य विमान है, हेतु सचल भू प्रणाली विकसित कर रहा है।

 

.
.
.
.
Top