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प्रयोगशाला के बारे में

साक्ष्य एवं प्रयोगात्मक प्रतिष्ठान बालासोर शहर से 15 किमी. की दूरी पर उड़ीसा में चांदीपुर के बंगाल की खाड़ी तट पर स्थित है। यह डीआरडीओ का सबसे पुराना प्रतिष्ठान है। इसकी स्थापना सरकार के 30 मई, 1895 के आदेश द्वारा की गई। पहला दौर पूर्ण विकसित दुर्भेद्य रेंज स्थापित करने के लिए इस क्षेत्र की उपयुक्तता का मूल्यांकन करने के प्रयोजनार्थ 02 मई 1894 को 12 पीडीआर का श्रेपनेल शेल दागा गया। तब से अब तक, विशेष रूप से वर्ष 1958 में इसे डीआरडीओ के संरक्षण में लाए जाने के बाद से इसने विहंगम प्रगति की है। आज, यह अंतर्राष्ट्रीय आयुध कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने तथा मित्र पड़ोसी देशों को विभिन्न प्रकार की रेंज सुविधाएं पेश करने तक भी समर्थ होने की स्थिति में पहुंच गया है। पीएक्सई आईएसओ 9001:2008 प्रमाणित संगठन है।

उपार्जित रेंज की लंबाई 19.5 किमी. और चौड़ाई लगभग 3 किमी. है। तथापि, अधिसूचना द्वारा रेंज को चांदीपुर से बंगाल की खाड़ी तक दक्षिणी छोर पर लगभग 50 कि.मी. तथा समुद्र में 50 कि.मी. और लंबा किया जा सकता है। इस रेंज की कुछ विशिष्ट/विशेष विशेषताएं, जो विश्व में कहीं ओर ऐसी रेंजों में उपलब्ध नहीं हैं, वे हैं:

  • अर्ध चन्द्र की आकृति वाला समुद्र तट, तटीय बसावटस, पड़ोसी जीवन और सम्पत्ति को खतरे मंं डाले बिना समुद्र में विभिन्न धारकों पर गोलाबारी को सुविधाजनक बनाता है।
  • गोलाबारी के सभी केन्द्रों से एक साथ लगातार गोलाबारी जारी रखी जा सकती है क्योंकि मारक लाइनें और प्रक्षेप-पथ आपस में नहीं टकराते हैं तथा किसी बड़े राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय वायु या समुद्र यातायात में बाधा भी नहीं ड़ालते हैं।
  • ज्वारीय जल समुद्र में लगभग 3 किमी. की दूरी तक पीछे हटता है, जो गोलाबारी के पहले और बाद में विभिन्न रेंज परिचालनों को सुविधाजनक बनाता है।
  • मौसमी दशाएं समस्त वर्ष के दौरान गतिशील परीक्षण एवं मूल्यांकन परिचालनों को सुविधाजनक बनाती हैं।
  • प्रत्येक ज्वार समुद्र के तल में बने (प्रक्षेपात्रों के गिरने के कारण बने) सभी गर्तो को भरता है तथा अगली गोलाबारी से पहले समुद्र तल को समतल बनाता है।
  • समुद्र तल और जल, छोड़े गए प्रक्षेपास्त्रों के गिरने के लिए नरम गद्देदार प्रभाव प्रदान करता है तथा अक्षत समुत्थान को सहज बनाता है जो डिजायन के शक्ति परीक्षण के लिए अत्यावश्यक है।
  • पूर्ण भाटे के दौरान समुद्र तल पर्याप्त रूप से कठोर हो जाता है, जो विभिन्न रेंज परिचालनों के लिए वाहनों तथा टैंकों के आवागमन को भी अनुमेय बनाता है।

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