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पिछले 35 वर्षों के दौरान, एनएसटीएल ने अपने घोषणा-पत्र के अंतर्गत ढेरों संख्या में शोध एवं प्रयोगकर्ता आधारित परियोजनाओं की जिम्मेदारी ली है और अधिकांश कार्य भार को पूरा किया है।

हथियार व्यवस्था

कार्यभार का मुख्य केंद्र बिंदु अंतर्जलीय हथियारों में नौसेना को आत्म-निर्भर बनाना है। कार्य के अधिकार क्षेत्र में तारपीडों, खानें, मुठभेड़ उपाय, लक्ष्य, फंदा एवं अधिक नियंत्रण व्यवस्था शामिल है। अंतर्जलीय व्यवस्था के डिजाइनिंग के कठिन कार्य भार को पूरा करने के क्रम में निश्चित अद्वितीय आधारभूत सुविधाएं आवश्यक हैं। अतः ध्वनि जांच सुविधा, ध्वनि तोप सुविधा, उच्च दाब जांच, चैंबर, टारपीडो अभियंत्रण केंद्र (टीईसी), विद्युत प्रणोदन जांच केंद्र(ईपीटीसी) जैसी कुछ अद्वितीय सुविधाएं अंतर्जलीय हथियारों के विकास को करने के लिए निर्मित की गई हैं।

टारपीडो

एनएसटीएल ने हल्के भार वाली पनडुबी रोधी तारपीडों और भारी तंतु निर्देशित टारपीडो वरूणास्त्र तक्षक, ताप तारपीडी जो एक जहाज या पनडुबी के विरुद्ध दागी जा सकती है, के विकास के लिए दो कांटेदार दृष्टिकोण अपनाए हैं। यह दृष्टिकोण हल्के टारपीडो एवं भारी टारपीडो दोनो ही के लिए समान तकनीको के अनूकूल परिणाम देने वाला है। एनएसटीएल नौसेना द्वारा उत्पादन के अंतर्गत हल्के भार वाले टारपीडो एवं भारी वाले टारपीडो तकनीक प्रदर्शन के दहलीज पर है।

हल्के भार वाले टारपीडो (उन्नत प्रायोगिक टारपीडो)

हल्के भार वाले तारपीडों (उन्नत प्रायोगिक टारपीडो) एक पनडुबी रोधी हथियार है जिसके पास एक उड़ रहे/मंडरा रहे हेलीकॉप्टर से अत्यधिक निकट पूर्व से ज्ञात शत्रु पनडुबी पर निश्चित मारक संभावना हो सकती है। यह टारपीडो सतह के जहाज का प्रयोग कर रहे तीव्र प्रतिबंध (टीटीएल) में भी दागा जा सकता है।

देश को आत्म निर्भर बनाने के लिए यहां पहली बार विभिन्न शीर्ष तकनीकों को विकसित किया गया है। शक्ति की आवश्यकताओं को त्यागे बिना तारपीडों के कुल भार को कम करने के लिए मिश्रित, टाइटेनियम मिश्रधातु जैसे पदार्थों का उपयोग करते हुए विभिन्न अन्य उत्पाद शामिल किए गए हैं। लघु आकार के 324 मिमी डीआए गोतो में समाने वाले उच्च शक्ति के समुद्री जल सक्रिय बैटरी, प्रतिकूल घूर्णन डीसी प्राणोदक मोटर, इस परियोजना के योगदान हैं। संवेदक उपकरणीय पैकेज, संकर नियंत्रण निर्देशन मोटर देश के अंतर्गत निर्मित होते हैं जो तकनीकी नियंत्रण काल में वर्जित थे। हल्के भार वाले तारपीडों का विकास विभिन्न देसी उत्पादों के रुप में परिणामी रहा है जो अब तक आयातित होते थे। पूर्ण एकीकृत टारपीडो 95% देशी अवयवों एवं उप-व्यवस्था को सम्मिलित करते हैं।

टारपीडो कुछ सौ मीटर की गहराई से संचालन करने में सक्षम हैं और अपने शिकार को सकारात्मक/सक्रिय घर वापसी पर हमला करता है और लक्षित पनडुबी पर विध्वंस/क्षति के विस्फोट का प्रभाव डालता है। टारपीडो, पानी में प्रवेश कर, पूर्व-कार्यक्रम की खोजी पद्धति का प्रदर्शन करता है, लक्ष्य की खोज और लक्ष्य पर हमला करता है। कई उपयोगकर्ता मूल्यांकन संचालिए किए गए। टारपीडो इसके आवश्यक विनिर्देशो और इसके उपयोगकर्ता के स्वीकार्यता के मानक, प्रयोगकर्ता द्वारा अनुबंधित, को पूरा करता है और इसके उत्पादन को आदेशों को मैसर्स बीडीएल, हैदराबाल की भारतीय नैसेना द्वारा दिया जाता है।

भारतीय नौसेना युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहती है, की स्थिति में, नौसेना को शीघ्र विजय के लिए दुहराई गई तारपीडों फायरिंग को क्रियान्वित करना पड़ता है। वास्तविक टारपीडो प्रयोग अत्यधिक कीमती है और इसलिए उन्हें एक अभ्यासित टारपीडो की आवश्यकता होती है जो एक वास्तविक सेवा तारपीडों की बिल्कुल-नकल करता है। इस उद्देश्य के लिए एनएसटीएल ने एक इटली की ए-244एस टारपीडो के समतुल्य अभ्यास की जा चुकी एवं ड्रिल टारपीडो का डिजाइन विकसित और उत्पादित किया है जो भारतीय नौसेना के आयुद्यशाला में है।
 
  • ड्रिल एवं अभ्यास की जा चुकी टारपीडो 95% देशी अवयवों का समावेश करती है जो 90% की सीमा तक प्रत्येक व्यवस्था में एफई बचत का परिणाम देती है। इसका मूल्य आयातित डीएंडपी की मात्रा का 1/6 है। नौसेना इस डीएंडपी टारपीडो का गहनता से प्रयोग कर रही है।
  • जल अपघट्य परु वास्तविकता व्यवस्था विकसित की जा चुकी है।
  • सभी गोलों के डिजाइन, संरचनात्मक विश्लेषण, निर्मित एवं दाब जांच हो चुकी है।
  • गति परिवर्तन के डिजाइन, विकास एवं क्रियात्मकता की जांच हो चुकी है। पीजेपी का डिजाइन एवं निर्माण हो चुका है।
  • 100 बार के लिए सीलों की डिजाइन एचडब्ल्यूटी के लिए हो चुकी है। अग्रणी सील के लिए दबाव चेंबर 100 बार दबावों के लिए विकसित और जांच की जा चुकी है।
  • वरीभ गुफा प्रणोदक के लिए सॉफ्टवेयर विकसित हो चुका है।
  • अंतर्जलीय परिक्षेत्र (एमसीएमवी, एसएस एवं ध्वनिक) गोवा में प्रारंभ हो चुकी है।
  • मोटर चालित कंम्प्रेसर के लिए एक दो स्तरीय आरोहण व्यवस्था विकसित हो चुकी है और शोरगुल तथा कंपन की कमी के लिए आईएन जहाज के बोर्ड पर स्थापित हैं। नौसेनिक जहाज के आरसीएस परिक्षेत्रीय उपकरणीय रडार देश में पहली बार स्थापित हुआ है।
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