संपर्क
मुख्य पृष्ठ > एन पी ओ ल > ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

प्रयोगशाला के बारे में

नौसेना भौतिक एवं समुद्र विज्ञान प्रयोगशाला (एनपीओएल) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की एक आईएसओ 9001:2008 प्रमाणित प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था है। इसकी स्थापना वर्ष 1952 में नौसेना बेस, कोच्ची में भारतीय नौसेना भौतिक प्रयोगशाला (आईएनपीएल) की एक नौसेना परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में की गई थी। डीआरडीओ का एक हिस्सा बनने के पश्चात, इसे वर्ष 1990 में थिरिक्कारा स्थित वर्तमान परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया था। प्रयोगशाला का मुख्य परिसर थिरिक्कारा में स्थित होने के साथ कुलामवु, इडुक्की में एक परीक्षण एवं मूल्यांकन सुविधा भी है। प्रयोगशाला का अपना एक शोध जहाज भी है जिसे आईएनएस सागरध्वनि के नाम से जाना जाता है। केरल राज्य में डीआरडीओ की केवल यही एक इकाई है।

npol

यह प्रयोगशाला डीआरडीओ की एक 'तंत्र प्रयोगशाला' है जो सोनार (एसओएनएआर) (ध्वनि पथ प्रदर्शन एवं सीमा) तथा सहयोगी प्रौद्योगिकियों के विकास कार्य में लगी हुई है। प्रयोगशाला के शोध एवं विकास के क्षेत्र जिन पर विशेष बल दिया जाता है वे हैं:- सिग्नल प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रानिक्स, अभियांत्रिकी तंत्र, ट्रांसडयूसर्स, पदार्थ एवं समुद्र विज्ञान। प्रयोगशाला ने जहाजों एवं पनडुब्बियों के लिए सोनार लगी पतवार, सरणी सोनार और हवाई सोनार विकसित की है। एनओपीएल के इस क्षेत्र में किए गए कार्य से इस महत्चपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की है।

 

 

npol

नौसेना भौतिक एवं समुद्र विज्ञान प्रयोगशाला का आरंभ काफी समय पूर्व वर्ष 1949 में हुआ जब भारत सरकार ने रायल नौसेना वैज्ञानिक सेवा, यू.के के डा.जे.ई.केस्टन को भारतीय नौसेना की सहायता के लिए एक वैज्ञानिक संगठन स्थापित किए जाने पर परामर्श लेने के लिए आमंत्रित किया था। तदुपरांत, वर्ष 1952 में भारतीय नौसेना भौतिक प्रयोगशाला (आईएनपीएल) की स्थापना भारतीय नौसेना को वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने के एक इन-हाउस प्रयोगशाला के रूप में की गई थी। यह प्रयोगशाला कोच्ची स्थित एक नौसेना अड्डे में एक बैरक मे अवस्थित थी। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का जब वर्ष 1958 में गठन किया गया, आईएनपीएल को नए संगठन में आमेलित कर लिया गया था। तत्पश्चात वर्ष 1969 में जब समुद्र विज्ञान ने प्रयोगशाला के अनुसंधान के विषयों में एक प्रमुख भूमिका ग्रहण कर ली तो, आईएनपीएल को एक नया नाम नौसेना  भौतिक एवं समुद्र विज्ञान प्रयोगशाला (एनपीओएल) दिया गया। इस प्रकार इस प्रयोगशाला को डीआरडीओ के अस्तित्व में आने से काफी समय पूर्व विद्यमान होने का गौरव प्राप्त है। गत छः दशकों के दौरान एनपीओएल भारतीय नौसेना बेड़े की एक सहायक प्रयोगशाला से एक सोनार तंत्र विकासक के रूप में विकसित हो गई है। आज एनपीओएल भारतीय नौसेना के लिए सोनार अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में अपनी उत्कृष्ट उपलब्धियों तथा योगदान के लिए गौरव का विषय बन गई है।

npolएनपीओएल ने इलेक्ट्रो-अकाउस्टिक ट्रांसडयूसर्स की मरम्मत आदि के लिए भारतीय नौसेना की एक क्षेत्रीय इकाई के रूप में कार्य करना आरंभ किया और फिर धीरे-धीरे इसका उन्नयन समुद्री आंकड़े एकत्र करने तथा उनके विवेचन, और इलेक्ट्रानिक उपकरणों की मरम्मत करने के रूप में हुआ। वर्ष 1980 से यह प्रयोगशाला विभिन्न क्षे़त्रों जैसे ट्रांसडयूसर्स, समुद्र विज्ञान, इलेक्ट्रानिक्स, अभियांत्रिकी, भौतिक विज्ञान इत्यादि को समेकित करते हुए एक तंत्र प्रयोगशाला के रूप में उभर कर सामने आई है। 1980 की पुरानी प्रणालियों को तार से लिपटे नमूनों द्वारा उत्पादन एजेंसी द्वारा जहाज पर परीक्षणों के लिए विकास एवं अभियांत्रिकी के प्रयोग द्वारा सुधारा गया। उसके बाद प्रयोगशाला का स्तरोन्नयन एक ऐसे प्रारूप में किया गया जहां एनपीओएल के डिजाइन तथा मूल रूप के आधार पर उत्पादन एजेंसी को सीधे आज्ञापत्र दिए जाते थे। वर्ष 2000 में औद्योगिक अवसंरचना के आगमन के साथ एनपीओएल ने उद्योगों के साथ-साथ भी चलने वाले एक अन्य नमूना तंत्र विकास को लागू किया।

npol

एनपीओएल कोच्ची के एक उपनगर थिरिक्कारा में अवस्थित है जो एरनाकुलम जंक्शन रेलवे स्टेशन से लगभग 16 किमी तथा कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से 24 किमी की दूरी पर है। थिरिक्कारा सडक मार्ग से रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे से पूर्णतः जुडा हुआ है तथा जिला मुख्यालय से एक किमी की दूरी पर है।

.
.
.
.
Top