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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

एन.एम.आर.एल. अम्बरनाथ, महाराष्ट्र स्थित रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संस्थान की सबसे पुरानी प्रयोगशालाओं में से एक है। वैज्ञानिक उपलब्धियों में उत्कृष्टता के लिए उसका कीर्तिमान प्रमाणित है। यह प्रयोगशाला विशेष रूप से भारतीय नौसेना की प्रौद्योगिकीय आवश्यकताओं पर ध्यान देती है, विशेषकर नौपरिवहन सामग्रियों और संक्षारण से रक्षण को लेकर।

पहले इसका नाम राष्ट्रीय रासायनिक व धातु प्रयोगशाला (एन.सी.एम.एल.) हुआ करता था। इस प्रयोगशाला की स्थापना 5 जनवरी 1953 को बम्बई के नौसैनिक डॉकयार्ड में 6000 वर्ग फीट के एक छोटे से कार्यशाला में की गई। इसकी स्थापना भारतीय नौसेना को उसकी दैनन्दिनी रखरखाव की समस्याओं में वैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से की गई। इसके पश्चात जलगत संक्षारण-विरोधी तथा  जलपोत-दूषण-विरोधी पेण्ट और ऋणाग्रीय (कैथोडिक) संरक्षण के क्षेत्र में अनुसन्धान एवं विकास के माध्यम से अनेक प्रोद्योगिकियां विकसित की गईं, जो गुणवत्ता में पाश्चात्य देशों के तुल्य हैं और जिन्हें भारतीय नौसेना ने अपनाया। भारतीय नौसेना के साथ निरन्तर कार्यगत आदान-प्रदान के चलते सन् सत्तर के दशक में इस प्रयोगशाला के कार्यक्षेत्र का विस्तार हुआ। प्रयोगशाला ने अनुसन्धान और विकास से बढ़कर आयात स्थानापन्नता में भूमिका निभाना भी आरम्भ किया। इस परिवर्तन के दौरान प्रयोगशाला में उच्च-शक्ति इस्पात, ट्रान्सड्यूसर सेरैमिक्स और विशिष्ट पॉलिमरिक सामग्रियों का प्रवेश हुआ। इन सामग्रियों के अनुसन्धान एवं विकास की गतिविधियों में प्राप्त विशिष्टता और अपने उपयोगकर्ताओं को अच्छी-ख़ासी संख्या व मात्रा में उत्पादों को पहुंचाने में प्रयोगशाला की सफलता को ध्यान में रख रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संस्थान ने 1995 में उसे यथोचित श्रेय देते हुए उसका नाम नौसैनिक सामग्री अनुसन्धान प्रयोगशाला रखा और 1997 में उसका अम्बरनाथ में स्थानान्तरण किया गया। अपनी वर्तमान कार्यसंहिता में एन.एम.आर.एल. धातु-विज्ञान, पॉलिमर, पुताई, संक्षारण, इलेक्ट्रोमेकैनिकल संरक्षण, नौपरिवहन जैवप्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय विज्ञान आदि अग्रगामी क्षेत्रों में मौलिक अनुसन्धान तथा अनुप्रयोग-आधारित प्रौद्योगिकी में संलग्न है। एन.एम.आर.एल. को नौसैनिक अनुप्रयोगों के लिए सामग्रियों में एकल खिड़की की सुविधा प्राप्त है।

इसी प्रकार, उच्च क्षमता ईंधन सेल, विशिष्ट पॉलिमर, धातुओं व सेरैमिकों, उन्नत संरक्षण प्रौद्योगिकियों, पर्यावरणीय नियन्त्रण के रासायनिक व जैविक उपायों आदि क्षेत्रों में अनुसन्धान एवं विकास की गतिविधियों में नब्बे के दशक के उत्तरार्ध में गोचर वृद्धि दर्ज हुई। इन कार्यक्षेत्रों में अच्छे कार्यप्रदर्शन के कारण रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संस्थान ने इस प्रयोगशाला के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए स्वीकृति प्रदान की, जिससे अम्बरनाथ में 60 एकड़ के पूर्ण सुविधा-सम्पन्न तकनीकी-आवासीय संकुल का निर्माण हुआ। यहां भारतीय नौसेना की उच्च कोटि की सामग्रियों और प्रौद्योगिकीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु उच्च शक्तियुक्त नौसैनिक धातुओं के लिए उन्नत छिपाव (स्टेल्थ) सामग्रियों, उच्च क्षमता ईंधन सेल और वैल्डिंग प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अनुसन्धान एवं विकास का कार्य हो रहा है।

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