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आयोजित सम्मेलन/संगोष्ठियां

टेकमा-2013

आईटीएम 17 एवं 18 अप्रैल 2013 के दौरान प्रौद्योगिकी प्रबंधन पर राष्ट्रीय सम्मेलन (टेकमा -13) का आयोजन किया। संस्थान द्वारा आयोजित अपनी तरह का पहला सम्मेलन, बिल्कुल सही समय पर आया था, जब आईटीएम ने देश के लिए अपनी समर्पित सेवा के  गौरवशाली 50 वर्ष पूरे किए थे। डॉ जी मालकोन्डइया , विशिष्ट वैज्ञानिक (डी एस) एवं मुख्य नियंत्रक, अनुसंधान एवं विकास (एचआर एंड एम) सम्मेलन के मुख्य अतिथि थे। डॉ डब्ल्यू. सेल्वामूर्ति , प्रसिद्ध पूर्व वैज्ञानिक (डीएस) और डीआरडीओ के अनुसंधान एवं विकास के सीसी ने अपने संबोधन भाषण में " भारतीय परिप्रेक्ष्य में प्रौद्योगिकी प्रबंधन में चुनौतियां एवं अवसर" पर बात की। प्रस्तुत किए गए शोधपत्रों में से कुछ में उच्च प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के लिए उन्नत मानव संसाधन व्यवहार , प्रौद्योगिकी नेतृत्व और नवाचार , प्रौद्योगिकी आंकलन और मूल्यांकन , एलसीए में परियोजना प्रबंधन आदि विषयों को शामिल किया गया था। टेकमा -13 ने अच्छी प्रतिक्रिया हासिल की और डीआरडीओ के व्यवसायी, अन्य अनुसंधान एवं विकास संगठनों और उद्योग भागीदारों को अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और प्रौद्योगिकी प्रबंधन के क्षेत्र में उभरते विषयों से अपने ज्ञान का तालमेल कायम करने के लिए , उन्हें साथ लाने के अपने उद्देश्य को पूरा किया।

टेकमाके लिए दीपक प्रज्ज्वलन:
  
टेकमा का शुभारंभ:

डॉ मालकोन्डइया ने टेकमाके प्रतिनिधियों के साथ अपने विचार साझा किए

डीआरडीओ भवन (एक बाह्यस्थान पाठ्यक्रम) में परियोजना प्रबंधन पर कार्यशालाः तारीख19 नवंबर 2013

आईटीएम ने 19 नवंबर 2013 को "डीआरडीओ भवन में परियोजना प्रबंधन(बाह्यस्थान पाठ्यक्रम)" पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। पाठ्यक्रम का उद्देश्य निर्णय निर्माताओं के लिए वैज्ञानिकों को परियोजना प्रबंधन पेशेवरों के रूप में बदलने के लिए नीति का मसौदा तैयार करने के लिए दुनियाभर में उपलब्ध सबसे अच्छे परियोजना प्रबंधन प्रशिक्षण/पाठ्यक्रम की पहचान और चयन करने के बारे में जागरूकता लाना था।

इसमें शामिल किए जाने वाले प्रमुख विषय थेः (1) परियोजना/कार्यक्रम प्रबंधन में दुनियाभर में प्रचलित समकालीन प्रवृत्तियां (2) वैश्विक परियोजना प्रबंधन योग्यता का तुलनात्मक विश्लेषण, (3) परियोजना प्रबंधन एवं परिपक्वता मॉडल में नई अवधारणाएं, (4) कॉर्पोरेट क्षेत्र में परियोजना प्रबंधन, (5) पीएम व्यावसायी: गुणात्मक आवश्यकताएं।

बौद्धिक संपदा अधिकारों पर कार्यशाला (ईआर एवं आईपीआर, डीआरडीओ, मुख्यालय निदेशालयों के सहयोग से आयोजित) :18-20 जून 2013

आईटीएम ने 18-20 जून 2013 के दौरान "बौद्धिक संपदा अधिकार पर कार्यशाला (ईआर एवं बौद्धिक संपदा अधिकार, डीआरडीओ, मुख्यालय निदेशालय के सहयोग से आयोजित)" पर एक पाठ्यक्रम का आयोजन किया। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यावहारिक पहलुओं (आईपीआर) के बारे में प्रतिभागियों के बीच जागरूकता पैदा करना; रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए एक सामरिक उपकरण के रूप में बौद्धिक संपदा अधिकार का उपयोग करना और उत्पाद पेटेंट व्यवस्था के उद्भव के मद्देनज़र चुनौतियों के लिए वैज्ञानिकों को तैयार करना था।

 

 

 

 

टीटीसी बैंगलोर में डीआरडीओ के परियोजना प्रबंधन में महत्वपूर्ण मुद्दे (बाह्यस्थान पाठ्यक्रम): 02–03 अगस्त 2013

आईटीएम ने 02-03 अगस्त 2013 के दौरान "टीटीसी बंगलौर में डीआरडीओ के परियोजना प्रबंधन (एक बाहरी कोर्स) में महत्वपूर्ण मुद्दों" पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य बैंगलोर और आसपास के क्षेत्र में स्थित डीआरडीओ प्रयोगशालाओं में परियोजनाओं पर काम कर रहे वैज्ञानिकों की दक्षता को बढ़ाना था।

 

 

 

 

आंतरिक इंजीनियरिंग: स्वयं का प्रबंधन: 27 – 29 सितंबर 2013

आईटीएम ने 27 से 29 सितंबर 2013 के दौरान "आंतरिक इंजीनियरिंग: स्वयं का प्रबंधन" पर एक पाठ्यक्रम का आयोजन किया। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य एक स्वस्थ एवं आध्यात्मिक अग्रणी के विकास में योग विज्ञान एवं ध्यान की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देना था।

 

 

 

 

 

कार्यशाला: 23 अप्रैल 2014 को परियोजना के क्रियान्वयन के लिए टीम का उन्मुखीकरण

आईटीएम ने 23 अप्रैल 2014 को देहरादून में यंत्र अनुसंधान एवं विकास संस्थान (आईआरडीई) के वैज्ञानिकों के लिए टीम अभिविन्यास पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य डीआरडीओ खेल बोर्ड, मसूरी के वैज्ञानिकों को 29 एवं 30 मई 2014 के दौरान डीआरडीओ खेल बोर्ड के तत्वावधान में वर्ष 2014-15 के लिए आम परिषद की वार्षिक बैठक (एजीसीएम) का आयोजन करने के लिए तैयार करना था। परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए परियोजनाओं में लगी हुई टीमों के टीम भावना से काम करने के लिए कार्यशाला के महत्वपूर्ण क्षेत्र थे: परियोजना प्रबंधन का अवलोकन, परियोजना निष्पादन में मानव संसाधन गतिशीलता (मनोवैज्ञानिक पहलू), परियोजना प्रबंधन में गुणवत्ता का महत्व, और एकजुट टीमों का निर्माण। आईआरडीई, देहरादून के 50 'एफ' एवं 'जी' वैज्ञानिकों द्वारा कार्यशाला का स्वागत किया गया था।

परिषद की सामान्य वार्षिक बैठकः 29-30 मई 2014

आईटीएम ने 29 एवं 30 मई 2014 के दौरान डीआरडीओ खेल बोर्ड के तत्वावधान में वर्ष 2014-15 के लिए डीआरडीओ खेल बोर्ड की वार्षिक आम परिषद की बैठक (एजीसीएम) का आयोजन किया। श्री विपुल गुप्ता (महासचिव, डीआरडीओ खेल बोर्ड) द्वारा डीआरडीओ खेल बोर्ड की गतिविधियों को प्रस्तुत किया गया। क्षेत्रीय परिषदों एवं एवडवेंचर क्लब के प्रतिनिधियों द्वारा भी प्रस्तुतियां की गई थीं। श्री पीएम सुंदर राजन ने टीम भावना को बढ़ावा देने और एकजुट टीमों का निर्माण करने के एक प्रभावी माध्यम के रूप में खेल के महत्व पर बल दिया। इस अवसर पर, एजीसीएम में भाग लेने के गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिनिधियों के लिए एक सुबह की सैर भी आयोजित की गई थी।

 

 

 

 

टीबीआरएल चंडीगढ़ में डीआरडीओ की परियोजनाओं के तकनीकी-प्रबंधकीय मुद्दों पर कार्यशाला : 12-14 अगस्त, 2014

आईटीएम ने 12 से 14 अगस्त 2014 के दौरान टीबीआरएल चंडीगढ़ में डीआरडीओ की परियोजनाओं के तकनीकी-प्रबंधकीय मुद्दों पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का उद्देश्य डीआरडीओ में एक परियोजना के निष्पादन को प्रभावित करने वाले तकनीकी-प्रबंधकीय मुद्दों पर चर्चा करना और वैज्ञानिकों के तकनीकी-प्रबंधकीय कौशल को बढ़ाना था। कार्यशाला का विषय परियोजना प्रबंधन (अवलोकन), वित्तीय प्रबंधन, परियोजना प्रस्ताव, परियोजनाओं में मानव संसाधन मुद्दों, टीम अभिविन्यास एवं आवश्यक सॉफ्ट स्किल्स, परियोजनाओं में ईआई एवं ईक्यू के महत्व, सफल परियोजनाओं के लिए सुविधा प्रदान करने वाले कारकों, परियोजनाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करने, परियोजनाओं में निर्णय लेने, परियोजना को बंद करने के लिए तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने और परियोजना सफाई तथा परियोजनाओं में समय प्रबंधन के आसपास केंद्रित था। उत्तरी जोन की प्रयोगशालाओं के 26 'डी', 'ई' एवं 'एफ' वैज्ञानिकों द्वारा कार्यशाला का अच्छी तरह से स्वागत किया गया था।

  • कार्यशाला का उद्घाटन लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जे.पी. सिंह, पीवीएसएम, एवीएसएम, सलाहकार डीआरडीओ द्वारा किया गया
  • डीआरडीओ एवं उद्योगों से वरिष्ठ परियोजना प्रबंधन पेशेवरों द्वारा व्याख्यान दिये गये।

दिल्ली में 'प्रतिबन्ध के सिद्धांत' पर आधारित परियोजना प्रबंधनः 08 – 10 अक्टूबर 2014

आईटीएम ने 08 -10 अक्टूबर 2014 के दौरान दिल्ली में 'प्रतिबन्ध के सिद्धांत' पर आधारित परियोजना प्रबंधन पर एक क्षेत्रीय पाठ्यक्रम का आयोजन किया। पाठ्यक्रम का उद्देश्य डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों को 'परियोजना नियोजन जटिल श्रृंखला पथ विधि' जैसी उन्नत परियोजना प्रबंधन तकनीकों के साथ उन्मुख करना था ताकि जटिल परियोजनाओं को कुशलता और प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। एलएएसटीईसी, एसएसपीएल एवं सीएफईईएस के 22 'एफ' एवं 'जी' वैज्ञानिकों द्वारा पाठ्यक्रम का स्वागत किया गया।

 

 

 

 

डॉ. जी. मालकोन्डिया, डीएस एवं सीसी, अनुसंधान एवं विकास (मानव संसाधन), निदेशक एलएएसटीईसी एवं निदेशक आईटीएम के साथ पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों की तस्वीर।

उन्नत कार्य-अध्ययन पाठ्यक्रम(सेवारत अधिकारियों के लिए): 10 नवंबर, 2014 - 30 जनवरी, 2015

आईटीएम ने 10 नवंबर 14 से 30 जनवरी 15 के दौरान उन्नत कार्य-अध्ययन पाठ्यक्रम (सेवारत अधिकारियों के लिए) आयोजित किया। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य मध्यम से वरिष्ठ स्तर के सेवारत अधिकारियों को कार्य अध्ययन आधारित प्रबंधन तकनीकों में प्रशिक्षित करना और संगठनात्मक समस्याओं का विश्लेषण और उपयुक्त समाधान विकसित करने की उनकी क्षमताओं को विकसित करना था।

इसमें (1) संगठनात्मक प्रभावशीलता (2) संचालन अनुसंधान (3) प्रबंधकीय सांख्यिकी (4) गुणवत्ता प्रबंधन (5) प्रबंधन में "सूचना प्रौद्योगिकी" (6) परियोजना प्रबंधन, (10) उत्पादकता में सुधार। जैसे मुख्य विषयों को शामिल किया गया।

निदेशकों के लिए अभिविन्यास कार्यक्रम: 21 नवंबर 2014 – 23 नवंबर 2014

21 नवंबर - 23 नवंबर 2014 के दौरान निदेशकों के लिए अभिविन्यास पाठ्यक्रम आयोजित किया गया। पाठ्यक्रम का उद्देश्य डीआरडीओ के निदेशकों का बेहतर और प्रभावी तकनीकी नेताओं में रूपांतरण और एक निर्देशक के रूप में प्रभावी भूमिका का निर्वहन करने की दिशा में समग्र नेतृत्व के लिए ईक्यू के बारे में जागरूकता लाना था। डॉ अविनाश चंदर, वैज्ञानिक रक्षा मंत्री के सलाहकार (आरएम के एसए) एवं सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास द्वारा पाठ्यक्रम का उद्घाटन किया गया।

 
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