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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

संस्थान को 1962 में मसूरी के पास, 7500 फीट की ऊंचाई पर स्थित लंडौर की, एक छोटी- छावनी में स्थापित किया गया था।

संस्थान का प्राथमिक उद्देश्य सैन्य सेवा और अन्य संगठनों के कर्मियों को कार्य अध्ययन और संबद्ध विषयों में प्रशिक्षित करना तथा कार्य अध्ययन के व्यावहारिक अनुप्रयोग के क्षेत्र में रक्षा मंत्रालय के किसी भी संगठन के लिए सहायता की पेशकश करना है।

70 के दशक के मध्य में, 'परियोजना प्रबंधन' के क्षेत्र में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण के लिए समर्पित नए पाठ्यक्रम शुरू किए गए थे। हालांकि, प्रशिक्षण का मुख्य जोर सेवारत अधिकारियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करने पर बना रहा। 80 के दशक की शुरुआत में, डीआरडीओ वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करने के लिए सेवाओं हेतु प्रमुख प्रणाली-विकास परियोजनाओं/कार्यक्रमों को शुरू करने के लिए प्रशिक्षण के विषय-क्षेत्र को बढ़ाया गया।

 

 

 

80 के दशक के उत्तरार्द्ध तक, आयुध कारखाना महानिदेशालय (डीजीओएफ) और गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय (डीजीक्यूए) आदि अन्य रक्षा संगठनों ने भी डीआईडब्ल्यूएस में विशेष प्रशिक्षण में भाग लेना आरंभ कर दिया। अनुसंधान एवं विकास प्रबंधन, परियोजना प्रबंधन, प्रौद्योगिकी अंतरण, परियोजनाओं में वित्तीय प्रबंधन, संगठनात्मक प्रबंधन और सिक्स सिग्मा जैसे विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए गए, जिनकी डीआरडीओ प्रयोगशालाओं द्वारा अत्यधिक सराहना की गई है।

1994 में, प्रौद्योगिकी प्रबंधन और संबंधित विषयों में विशेष पाठ्यक्रमों का संचालन करने के अधिदेशित करने के साथ डीआईडब्ल्यूएस का पुनःनामकरण करके इसे प्रौद्योगिकी प्रबंधन संस्थान (आईटीएम) का नाम दिया गया।

संस्थान का मुख्य अधिदेश संगठन में तकनीकी-प्रबंधकीय पहलुओं से संबंधित क्षेत्रों में कार्यक्रमों और परियोजनाओं को संगठित करने और संभालने के लिए अत्याधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। संस्थान द्वारा प्रस्तुत पाठ्यक्रमों का डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और अन्य सरकारी विभागों द्वारा पूरी तरह से उपयोग किया जा रहा है।

 

आईटीएम की संगठनात्मक संरचना

प्रबंधन परिषद

प्रबंधन परिषद, अवसंरचना, छवि निर्माण के समग्र विकास का अवलोकन करने और अनुशासन और प्रक्रियात्मक बाधाओं से संबंधित मुद्दों का समाधान करने के लिए आईटीएम का शीर्ष निकाय है। परिषद में निदेशक (अध्यक्ष) और सभी समूहों के प्रमुख शामिल हैं। परिषद की बैठक सप्ताह में एक बार होती है।

शैक्षणिक परिषद

शैक्षणिक परिषद समग्र पाठ्यक्रम के डिजाइन, सहयोग, संकाय विकास, संसाधन उत्पादन से संबंधित नीति विकसित करने और पाठ्यक्रम की सामग्री तथा मानकों में सुधार लाने के लिए समाधान प्रदान करने वाला शीर्ष निकाय है। परिषद में निदेशक (अध्यक्ष), रजिस्ट्रार और सभी संकायों के सदस्य शामिल हैं। इस परिषद की बैठक हर तिमाही पर होती है। शैक्षिक संस्थान से बाहर के एक सदस्य को आमंत्रित किया जाता है।

 
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