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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारतीय रक्षा पर्यावरण में संक्रिया विज्ञान और पद्धति विश्लेषण तकनीक प्रयोग करने का विचार वर्ष 1959 के आरंभ में आया। एक छोटा समूह – ‘शस्त्र प्रणाली विश्लेषण समूह (WEG)’ का गठन तीनों सेवाओं, अंतर सेवा संस्थानों और रक्षा मंत्रालय के लिए शस्त्र और उपकरण के संक्रिया अनुसंधान और कम लागत के अध्ययन के लिए किया गया।
क्रियाकलापों के विविधीकरण के साथ सन 1963 में ‘शस्त्र प्रणाली विश्लेषण समूह (WEG)’ का नाम बदलकर ‘वैज्ञानिक मूल्यांकन समूह (SEG)’ कर दिया गया और आगे सन 1968 में ‘वैज्ञानिक मूल्यांकन समूह (SEG)’ एक पूर्णतः संपन्न निदेशालय बना जिसका नाम ‘वैज्ञानिक मूल्यांकन निदेशालय (DSE)’ रखा गया। निदेशालय ने निर्णायक रक्षा योजना और विश्लेषण, शस्त्र मूल्यांकन, क्षति मूल्यांकन, निष्पादन मूल्यांकन और संक्रिया अनुसंधान अनुप्रयोगों आदि क्षेत्रों में सेवा मुख्यालयों, रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार, डीआरडीओ मुख्यालयों और रक्षा मंत्रालयों को अपनी परामर्शी सेवाएं जारी रखीं। इस दौरान बड़ी संख्या में पद्धति विश्लेषण अध्ययन किए गए। इन अध्ययनों के परिणाम और संस्तुतियों ने सर्वोच्च निर्णय निर्धारण प्रक्रिया में योगदान दिया।
डीआरडीओ में पद्धति विश्लेषण के क्रियाकलापों के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप, डीएससई (DSE) के प्रकार्य नए सिरे से परिभाषित किए गए तथा वर्ष 1980 में वर्तमान नाम अर्थात् पद्धति अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान (ईसा) रखा गया। वर्ष 1972 में एक छोटा से समूह जिसका नाम था “वैमानिक पद्धति विश्लेषण समूह (ASAG)” का सृजन वैमानिक पद्धति अध्ययन एवं  विश्लेषण का पालन करने के उद्देश्य से किया गया। यह समूह राष्ट्रीय वैमानिकी प्रयोगशाला, बैंगलोर से वैमानिकी निदेशालय की टुकड़ी के रुप में कार्य कर रही थी। वर्ष 1974 में “वैमानिक पद्धति विश्लेषण समूह (ASAG)” को स्वतः लेखा पूर्ण इकाई अर्थात् वैमानिक पद्धति अध्ययन एवं विश्लेषण केन्द्र (कासा) में परिवर्तित किया गया और इसका परिसर “वैमानिक विकास स्थापना (ADE), बैंगलोर” में स्थानन्तरित कर दिया गया। सन् 1974 से 2003 तक कासा ने डीआरडीओ मुख्यालय और भारतीय वायु सेना के लिए पद्धति विश्लेषण अध्ययन की ऋंखला में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने विषयपरक विश्लेषण के साथ कई डिजाइन और विकास क्रियाकलापों और नीति स्तर के मामलों में योगदान दिया।
एकीकृत युद्ध परिस्थिति (integrated combat environment) के अंतर्गत पद्धति विश्लेषण क्रियाकलापों और वारगेम विकास प्रक्रिया में तालमेल के उद्देश्य से वर्ष 2003 में कासा का ईसा के साथ विलय किया गया। इसके साथ ही प्रशिक्षण और योजना वारगेम, एकीकृत वायु रक्षा एवं इलेक्ट्रानिक वारफेयर, कॉम्बेट मॉडलिंग, सिमुलेशन सिस्टम एनालेसिस और कंप्यूटरीकृत वारगेम के क्षेत्र में ‘ईसा’, नोडल पद्धति विश्लेषण प्रयोगशाला के रुप में उभर कर आई।

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