संपर्क

दूरदर्शिता:

उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों हेतु मानव स्वास्थ्य, वातावरण और उच्च उन्नतांश कृषि के लिए विकासशील प्रौद्योगिकियों में अग्रणी बनना।

मिशन:

स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में स्थानीय पर्यावरण के लिए अद्वितीय प्रौद्योगिकियों का विकास और सशस्त्र बलों को लाभान्वित करने के लिए स्थानीय संसाधनों का वैधानिक रूप से उपयोग करना।

रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला (डीआरएल), तेजपुर ने, अक्तूबर 1962 में भारी चीनी आक्रमण के तुरंत बाद, 21 नवंबर को तत्कालीन डीआरएल(एम), कानपुर के एक लघु अनुसंधान प्रकोष्ठ से "फ़ील्ड लेबोरेट्री" के रूप में अपनी विनम्र शुरुआत की थी। प्रयोगशाला का प्रारंभिक चार्टर उत्तरी-पूर्वी भारत के प्रचलित गर्म और आर्द्र जलवायु के अंतर्गत विकसित उत्पादों हेतु स्टोरेज / आउटडोर एक्सपोज़र परीक्षण प्रदान करना था। आगामी विकास पर, प्रयोगशाला ने इस सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में तैनात सैनिकों के हितों के लिए स्वतंत्र अनुसंधान एवं विकास निर्दिष्टीकरण के साथ गति प्राप्त की। अक्तूबर 1980 में, यह एक पूर्ण-विकसित आर एंड डी प्रयोगशाला बन गयी तथा इसका नाम बदलकर रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला रखा गया।

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