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प्रमुख उपलब्धियां:

  1. सर्वप्रथम पंजाब, भारत (2015) में कॉटन लीफ कर्ल रोग (CLCuD) से संबंधित कॉटन लीफ कर्ल मल्टन वायरस, के प्रतिक्षेप की सूचना दी।
  2. उत्तर-पूर्वी भारत के परिधीय अस्पताल में उपस्थित महिलाओं के बीच ह्यूमेन पेपिलोमावाइरस (एचपीवी) के उच्च जोखिम विकृतियों के उच्च प्रसार की रिपोर्ट की गई।
  3. क्युलेक्स मच्छरों से एक कीट विशिष्ट फ्लैविवायरस (आईएसएफ) के आणविक लक्षणों की सबसे पहले भारत द्वारा रिपोर्ट किया जाना।
  4. मानव के त्वचीय संक्रमण में शामिल ट्राइकोफाइटोन रूबर्म और टी. मेनटाग्रोफाइट्स, डर्माटोफेटिक फंगी हेतु तीव्र, संवेदनशील और प्रजाति विशिष्ट पीसीआर/मल्टीप्लेक्स पीसीआर जांच विधि विकसित की गई।
  5. त्वचा और नाखून के सतही संक्रमण के कारण त्वचाविज्ञान, मोल्ड और यीस्ट सहित कवक की एक श्रृंखला के सापेक्ष लाभकारी हर्बल एंटीफंगल फार्मूलेशन (स्थानीय) को विकसित किया।
  6. एग्रोटेररिज़म परिप्रेक्ष्य से - असम के कैमेलिया सीनेन्सिस (चाय) के शक्तिशाली फाइटोपैथोजेनिक कवक के बेस लाइन डेटा को प्रमाणित किया।
  7. उच्च उन्नतांश, तवांग क्षेत्रों में ऑयस्टर मशरूम की खेती और कृमिनाशक मिश्रित खाद (उच्च उन्नतांश वाले देशी केंचुओं की प्रजातियों के उपयोग द्वारा) हेतु मानकीकृत एसओपी।
  8. आणविक और प्रोटीमिक लक्षण के माध्यम से अद्भुत जीन और प्रोटीन की पहचान के आधार पर नई अद्भुत प्रजातियों के रूप में दुनिया की सबसे तीख़ी मिर्च 'बूट जोलोकिआ' की पहचान और प्रमाणन किया गया।
  9. जलीय सूक्ष्मजीव की व्यापक खेती हेतु लागत प्रभावी खुली और संलग्न संर्वधन प्रणाली विकसित की गई।
  10. स्वदेशी ऑर्किड के माइक्रोप्रोपैगेशन और उत्तरी पूर्वी भारत के मूल्यवान औषधीय पादपों हेतु मानकीकृत प्रोटोकॉल।
  11. न्यूट्रास्यूटिकल्स हेतु पीयूएफए में समृद्ध स्वदेशी ताजे पानी के सूक्ष्मजीव को पहचाना गया।
  12. विभिन्न जलवायु और स्थिति हेतु पारिस्थितिकीय लागत प्रभावी और उचित स्वच्छता प्रौद्योगिकी।
  13. अपशिष्ट जल के परिशोधन हेतु रीड बेड प्रौद्योगिकी।
  14. तवांग (अरुणाचल प्रदेश) और दूरस्थ सेना इकाइयों तथा गांवों के उच्च उन्नतांश भूभागों में संरक्षित खेती का सफल प्रदर्शन।
  15. व्यापक जल शोधन प्रणाली हेतु ट्रॉली।
  16. हिमाच्छादित स्थलाकृति हेतु पानी की फ़िल्टर-बोतल का अंतिम प्रोटोटाइप।
  17. कम तापमान, कठिनाई सुलभ क्षेत्रों हेतु विशेष रूप से डिजाइन की गई स्वच्छता प्रणाली
  18. संशोधित रीड बेड प्रणाली के उपयोग द्वारा प्रदूषित जल प्रशोधन और पुन: उपयोग की सुविधा का विकास
  19. जैविक अपशिष्ट जैव-वर्गीकरण और प्रबंधन हेतु हाइड्रोलाइटिक बैक्टीरिया के संकाय का विकास

वर्तमान गतिविधियां:

  1. फील्ड तैनाती योग्य वेक्टर-जनित रोगजनक की पहचान हेतु न्यूक्लिक एसिड का विस्तारण और प्रोटीन आधारित निदानों का विकास करना।
  2. आणविक उपकरणों के उपयोग द्वारा चिचड़ी तथा मच्छर से पैदा होने वाले रोगजनकों का सर्वेक्षण और विशेषता
  3. 'अरुणोदय' कार्यक्रम के अंतर्गत तवांग (अरुणाचल प्रदेश) तथा इससे बाहर के उच्च उन्नतांश क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर संरक्षित खेती करना।
  4. 'अरुणोदय' कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी करने हेतु अरुणाचल प्रदेश के तवांग और पश्चिम कामेंग जिलों के कृषि योग्य क्षेत्रों का सर्वेक्षण, संग्रह और विश्लेषण।
  5. 'अरुणोदय' कार्यक्रम के अंतर्गत तवांग और अरुणाचल प्रदेश के आस-पास के इलाकों में स्थित स्थानीय किसानों और सैनिक इकाइयों को ऑयस्टर मशरूम की खेती और वर्मीकंपोस्टिंग पर प्रशिक्षण देना।
  6. कैप्सिकम एसामिकम हेतु सूक्ष्म उत्पथि प्रौद्योगिकी का विकास।
  7. कैप्सिकम एसामिकम के संभ्रांत वर्गीय जर्मप्लाज़्म का चयन।
  8. तवांग के उच्च उन्नतांश क्षेत्रों से जैव-उर्वरक तत्वों का विलगन और उनके लक्षण।
  9. तवांग और पश्चिमी कामेंग जिले का जल गुणवत्ता सर्वेक्षण, जल शोधन प्रणालियों का प्रशिक्षण, परिनियोजन और निगरानी।
  10. हिमाच्छादित स्थलाकृति हेतु जल की फ़िल्टर-बोतल और घरेलू जल फ़िल्टर का विकास
  11. घरेलू जैविक अपशिष्ट हेतु समेकित अपशिष्ट प्रबंधन प्रौद्योगिकी पर आर एंड डी।
  12. विभिन्न जलवायु और परिस्थितियों में अपशिष्ट जल के प्रशोधन हेतु रीड बेड के अनुप्रयोग पर अध्ययन
  13. रोगजनक में कमी और अपशिष्ट जल परिशोधन हेतु फेज कंसोर्टियम का विकास।
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