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उपलब्धियाँ


सम्पूर्ण राम राकेट आईआरआरप्रणोदन प्रणाली
ईंधन-कुशल (ईंधन की कम खपत वाली) वायु से चलने वाली प्रणोदन प्रणाली विशेष रूप से प्रोजेक्ट आकाश के लिए विकसित की गई है।  आईआरआर प्रणोदन प्रणाली उच्च यौद्धिक प्रबंधन और ठोस राकेट के विपरीत पीछे से पीछा करने की क्षमता से युक्त कर लक्ष्य को रोकने के लिए शक्तिशाली रेंज उपलब्ध कराता है।
निम्न उप-प्रणालियां प्रारंभ में आईआरआर प्रणोदन प्रणाली को साकार करने के लिए विकसित की गई थीः

  • कम वजन, स्वदेशी माराजिंग इस्पात का प्रयोग करते हुए उच्च दबाव राकेट मोटर, एक स्वदेशी उच्च मजबूती वाली मिश्रधातु इस्पात
  • कार्बन फनोलिक फाइबर के प्रयोग से द्वितीयक चैंबर लाइनर / तापीय संरक्षण प्रणाली .
  • स्वतंत्र विन्यास में संयोजित प्रोपलैंट वर्धक ग्रंथि
  • परिवर्तनशील दहन दर वाली एक विशेष ग्रंथि ओएफ, इटारसी में विकसित और उत्पादित की गई जो आकाश एवं प्रयुक्ति के लिए भी विशेष है।
  • रामजेट गवाक्ष के लिए वायु आगत एवं छत्रक भी अभिकल्पित किए गए।

आईआरआर प्रणोदन प्रणाली देश में पहली है और इसमें हवा से हवा में और हवा से सतह पर भूमिका के लिए लंबी दूरी की हवा में छोड़े जाने वाले प्रक्षेपास्त्रों के लिए कार्यक्षम प्रयुक्तियां है। बहुत ज्यादा देशों ने रामजेट प्रणोदन के जटिल क्षेत्र में कार्य नहीं किया है।

हवाई रक्षा प्रयुक्ति के लिए C4 I प्रणाली हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर

आकाश समूह रीति कृत्यकारी को नियोजित कर मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली करने वाली क्षेत्र रक्षा हथियार प्रणाली है। समूह मुख्यालय  C4 I  है, एक केंद्र जो हवाई खतरों के खिलाफ एक क्षेत्र में हवाई रक्षा गतिविधियों का समन्वय एवं नियंत्रण करता है।

 

दोहरा नियंत्रण डिजीटल आटोपायलट एवं पीएन निर्देशन
आकाश प्रक्षेपास्त्र स्थिरता एवं यौद्धिक प्रबंधन के लिए पिछले हिस्से एवं पंखों के नियंत्रण का एकसाथ प्रयोग करता है। डिजीटल आटोपायलट प्रक्षेपास्त्र नियंत्रण लिए बंद परिपथ में छह क्रियाशील चैनलों को नियंत्रित करता है। आटोपायलट विभिन्न लक्ष्य संघर्ष परिस्थितियों के लिए प्रक्षेपास्त्र के संपूर्ण प्रक्षेप पथ के लिए प्रभावशीलता को अधिकतम एवं नियंत्रण के लिए कुशल आगम अनुसूचन प्रौद्योगिकी का प्रयोग करता है। आटोपायलट आनबोर्ड कंप्यूटर में उच्च स्तरीय भाषा में क्रियान्वित होता है।
लैटेक्स नियंत्रण गिरे एवं पथविचलित, दोनों विमानों में दो विंग चैनलों के जरिये होता है। कोटि स्थिरीकरण टीसीपी चैनलों के दो जोड़ों के जरिये होता है। बेलन नियंत्रण चार टीसीपी के अंतरीय पथविचलन के जरिये होता है। उन्हीं टीसीपी का प्रयोग करते हुए बेलन एवं कोटि, दोनों के स्थिरीकरण के लिए नियंत्रण रणनीति उपलब्ध अधिकतम टीसीपी विचलन के प्रभावी उपयोग हेतु डायनेमिक शेयरिंग लाजिक को विनियोजित करती है।
प्रक्षेपास्त्र के वृद्धि चरण के दौरान रखी गई संस्थिति अंतरिक्ष में निर्धारित स्थिति पर राडार द्वारा सुनिश्चित प्राप्ति के लिए नामित प्रक्षेप संस्थिति के लगभग प्रक्षेपास्त्र आकीर्णन को न्यूनतम के लिए लागू किया जाता है।


आटोपायलट के विभिन्न पद्यति के प्रक्षेपास्त्र मार क्षेत्र के लिए व्यापक उड़ान परीक्षण किए जा चुके हैं और यह बहुत प्रभावी और मजबूत साबित हुआ है।

 सुपरप्लास्टिक से बनी एचपी वायुबोतल
उच्च दबाव वाली वायुबोतल का प्रयोग आकाश प्रक्षेपास्त्र की नियंत्रण प्रणाली के इलेक्ट्रो वातिकी प्रेरक के लिए वायु की नियमित आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए 400 केएससी पर आर्द्रता तथा स्नेहक मुक्त संपीडित वायु के भंडारण में होता है। वायु बोतल अल्ट्रा उच्च मजबूती वाली टाइटेनियम मिश्रधातु से बनी होती हैं। गोलाई बनाने के लिए परंपरागत निर्माण प्रौद्योगिकियां उपयुक्त नहीं हैं। कच्ची सामग्री को प्लास्टिक के स्तर तक गरम किया जाता है और गोलाई बनाने के लिए विशेष रूप से अभिकल्पित उपकरण का उपयोग होता है जिनमें बहुत कम d/t अनुपात होता है। यह पूरी प्रक्रिया बढ़े हुए तापमान पर आक्सीकरण से बचाने के लिए नियंत्रित वातारण में की जाती है। अब तक के सभी जांच-परखे उड़ान वाहनों में वायु बोतलों का प्रयोग किया गया है और इसके कुशलता प्रदर्शन की विश्वसनीयता स्थापित की गई है।

द्विदिक्मुखी आयुध प्रणाली
�नाग� टैंक भंजक भूमिका के लिए दोनों सिरों से आवेशित स्वदेश विकसित आयुध है। इसमें दो प्रकार से हमले की पद्यति है जिनमें एक का नाम है सरकनपूर्ण हमला दूसरा है मुख्य हमला सरकनपूर्ण हमले का अभिकल्पन विस्फोटक प्रतिकर्मात्मक शस्त्रवाहन (ईएमआर) को विफल करने तथा मुख्य हमले का अभिकल्पन टैंक के मुख्य शस्त्रागार को निष्क्रिय करने के लिए तैयार किया गया है। इस आयुध में एक आघात संवेदी यांत्रिकता (आईएसएम) और एक सुरक्षा आयुध यांत्रिकता (एसएएम) उपलब्ध कराई गई है। लक्ष्य पर मिसाइल के आघात होने पर आघात संवेदी यांत्रिकता एक कमांड पैदा करती है जो सुरक्षा आयुध यांत्रिकता के माध्यम से गोलाबारी शुरू कर देती है। सुरक्षा आयुध यांत्रिकता भंडारण, संचालन एवं मिसाइल दागने के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह एक सुरक्षित दूरी पर आयुध को सज्जित करने और लक्ष्य पर मिसाइल के आघात पर आयुध विस्फोट करती है।
नियोजित हमले में आयुध की उच्च वेग की गोलाबारी लक्ष्य (शत्रु टैंक) को इच्छित क्षति पहुंचाकर धवस्त कर देती है। यह धात्विक जेट ऊर्जा के वाहक के रूप में कार्य करता है और विस्फोटक ऊर्जा के भाग को लक्ष्य तक ले जाता है।
 

तापीय स्थिर तरल ईंधन आवेशन प्रौद्योगिकी

ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल तरल एवं ठोस ईंधन से प्रणोदित द्विस्तरीय प्रणोदन प्रणाली है। तरल रामजेट इंजन के लिए ईंधन टैंक में बिल्कुल ठीक मात्रा में एक उच्चतः शोधित गैस मुक्त तरल ईंधन भरने की अनिवार्य आवश्यकता है। ईंधन में गैस सांद्रीकरण के लिए लागू शर्तें बहुत कठोर हैं। गैस मुक्ति की प्रक्रिया नाइट्रोजन गैस शोधन एवं गैस उच्छालन पद्यति द्वारा की जाती है। इसे सुनिश्चित करने के लिए डीआरडीएल में एक स्वदेशी प्रणाली विकसित की गई है जिसका अभिकल्पन तथा उत्पादन प्रौद्योगिकी पूरी तरह स्वदेशी है। निर्दिष्ट समय के भीतर तरल ईंधन के गैस मुक्तिकरण के लिए इस प्रणाली में दोहरी भित्ति वाले टैंक का प्रयोग होता है। यह ईंधन हाइड्रोलिक प्रवर्तन प्रणाली में भी उपयोग किया जा रहा है। कुल ईंधन प्रसंस्करण एवं आवेशन प्रक्रिया निर्वात स्थितियों में परी की जाती है, ताकि प्रक्रिया के दौरान दूषण से बचा जा सके।

अग्नि नियंत्रण प्रणाली
ब्रह्मोस अग्नि नियंत्रण प्रणाली को Bएफसीएस के नाम से जाना जाता है जिसे ब्रह्मोस सुपरसोनिक पोतीय प्रक्षेपास्त्र के लिए स्वदेश में अभिकल्पित एवं विकसित किया गया है। यह मिसाइलों के प्रक्षेप-पथ, प्रहार पूर्व तैयारी और प्रहार की योजना बनाने में उपयोगकर्ता की सहायता करता है। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल के बेहतर उपयोग के लिए प्रक्षेप-पथ में राहबिंदुओं  लाने का विकल्प है। एफसीएस को मिसाइल दागने के लिए एक अंतराल पर एकल अथवा बहुल तरीके से प्रहार के विकल्प से विन्यस्त किया जा सकता है।
एफसीएस के दो संस्करण अभिकल्पित एवं विकसित किए जा चुके हैः भारतीय नौसेना के लिए पोतीय एफसीएस  एवं नौसेना के लए तटीय आधारित एफसीएस।

हाइपरसोनिक वायु श्वस्न वाहन के विमान गतिकी विन्यास का विकास
हाइपरसोनिक वाहन के लिए समुद्री परिभ्रमण में स्थिरता और सकारात्मक प्रघात अन्तर  की निर्णायक आवश्यकता है। शक्ति चालू अथवा बंद होने की स्थितियों में इसका कुशलता प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। विमान गतिकी विन्यास अवृत्तरूपी (अष्टकोणीय) और अपरम्परागत भी है। अग्रभाग और पिछले भाग पर बाढ़ संयोजित द्वारा कार्य प्रदर्शन में संवर्धन हासिल कर लिया गया है। नासाग्र पर ढक्कनी विस्तार से सागर परिभ्रणण में वाहन की स्थिरता में सुधार हुआ है।
हाइपरसोनिक वायु गवाक्ष का अभिकल्पन
हाइपरसोनिक उड़ान प्राप्त करने के लिए अग्रभाग में बाहरी संपीडन और वायु गवाक्ष में आतंरिक संपीडन को हासिल कर लिया गया है। वायु गवाक्ष के लिए दबाव प्रतिप्राप्ति बढ़ाने वाली और न्यूनतम क्षति वाली विश्लेषिक एवं संगणनात्मक पद्यति विकसित कर ली गई है। शुरुआती प्रदर्शन का आकलन सीएफडी के माध्यम से किया जाता है।
उपयुक्त प्रयोग अभिकल्पित एवं संचालित किए गए हैं। वायु गवाक्ष का उपयोग करते हुए विछिन्न गवाक्ष एवं एकीकृत गवाक्ष शुरू करने की नांद खोलने वाली यांत्रिकता अभिकल्पित एवं सिद्ध की जा चुकी है। सीमा पर बिछने वाले स्राव के साथ कुशलता बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा चुके हैं।

स्क्रैमजेट इंजन की परीक्षण सुविधा का विकास
स्क्रैमजेट इंजन का विकास एचएसटीडीवी को साकार करने के लिए निर्णायक उपाय है। इंजन का अभिकल्पन डाइड्रोकार्बन (कैरोसिन) ईंधन दहन के लिए किया गया है, जो हाइड्रोकार्बन वाहनों को सेवा प्रयोग के लिए कम खर्चीला बनाता है। सुसंपादित साधन विनियोग और आंकड़ा लेखन क्षमताओं से युक्त संयोजन पाइप परीक्षण सुविधा की स्थापना की गई है। इस सुविधा का परिचालन पीएलसी'ज़ तथा अन्य नियंत्रण युक्तियों के माध्यम से पूरी तरह स्वचलित है। स्क्रैमजेट दहकों के दो संस्करणों, उद्धतत गति आधारित ईंधन अंतःक्षेपण और रैम्प छिद्र आधारित ईंधन अंतःक्षेपण, का विकास किया जा रहा है। अब तक आधा चौड़ाई का प्रारूप दहक स्थैतिक परीक्षण (10 नग) किए जा चुके हैं। आधी चौड़ाई और पूर्ण आकार के दहकों के लिए विस्तृत सीएफडी आकलन किया गया है। संयोजन पाइप सुविधाओं में स्थैतिक परीक्षण करने के लिए पूर्ण आकार के इंजन को साकार किया जा रहा है।
स्क्रैमजेट इंजन के लिए निर्माण प्रक्रिया
स्क्रैमजेट इंजन का निर्माण एक दोहरा भित्ति निर्माण है, जिसमें दहन क्षेत्र की ओर अभिमुख आंतरिक भित्ति के लिए उपयोग होने वाले विशेष मिश्रधातु का उपयोग होता है और संरचनात्मक मजबूती के लए एक अन्य विशेष मिश्रधातु की बाहरी सहायता होती है।
इन दो मिश्रधातुओं को उनके संपर्क की सतह के साथ लगातार जोड़ना होता है। विस्फोटक झलाई हमें इन पदार्थों के प्रभावी जुड़ाव का त्वरित रास्ता देती हैं। विस्फोटक झलाई का परीक्षण किया गया। यह निर्माण प्रक्रिया की स्थापना बाद के परीक्षणों के लिए इंजन हार्डवेयर को सिद्ध करने के लिए की गई है। 
हाइपरसोनिक वाहन के लिए एयरोस्पेस यांत्रिकता का अभिकल्पन 
एचएसटीडीवी अभियान यांत्रिकता प्रधान है। ये हैं वायु गवाक्ष आवरण यांत्रिकता, पृथक्करण यांत्रिकता, क्रूज वाहन के पंख और पुच्छ के लिए मुडॉवारहित यांत्रिकता और छद्रक आवरण यांत्रिकता। इन यांत्रिकताओं का अभिकल्पन हाइपरसोनिक उड़ान के उच्च तापमान पर्यावरण को सिद्ध करता है।

सीएलओएस  निर्देशन के लए नियंत्रण निर्देशन विधि विशेष
किसी हथियार प्रणाली की न्यूनतम संभावित सीमा हासिल करने के लिए सीएलओएस  नियंत्रण व्यवस्था का विकास जरूरी है जिसमें मिसाइल शीघ्रतम संभावित समय में एलओएस की ओर निर्देशित होती है। यह प्रौद्योगिकी पहली बार आईडीएमडीपी में विकसित की गई थी। त्रिशूल प्रणाली इसी प्रौद्योगिकी के उपयोग से विकसित हुई है और विभिन्न प्रकार के प्लेटफार्मों का प्रयोग करते हुए 80 उड़ान परीक्षण के माध्यम से इसका कुशलता प्रदर्शन किया गया। लक्ष्य पर बारंबार जीवंत गोलाबारी के माध्यम इसके वांछित (� 10 मी.) का प्रदर्शन किया गया।

शिखर पाश माप निर्देशन विधि-विशेष:
त्रिशूल पहला स्वदेश निर्मित सुपरसोनिक प्रक्षेपास्त्र है जो समुद्री सतह से पांच मीटर ऊपर उड़ने की क्षमता रखता है। ऐसा एक ऊंचाई संवेदी यंत्र के रूप में एक परिशुद्ध रेडियो तुंगता (ऊंचाई) मापी का उपयोग करते उत्कृष्ट उच्च शिखर माप  निर्देशन विधि-विशेष  के अभिकल्पन से संभव हुआ है। त्रिशूल मिसाइल की समुद्र मंथन क्षमता नौसेना के त्रिशूल तटवर्ती प्रतिष्ठापन आईएनएस द्रोणाचार्य से बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष फायरिंग के माध्यम से प्रदर्शित की गई है।

लिथियम तापीय बैटरी  
लिथियम तापीय तोपें उच्चशक्ति सघनता रखती हैं और उनका शेल्फ जीवन बहुत लंबा (20 वर्ष से अधिक का) होता है। त्रिशूल मिसाइल पर लगने वाली लिथियम तापीय बैटरी स्वदेश विकसित, संशोधित और बड़ी संख्या में निर्मित है।

द्वि-प्रघाती राकेट मोटर

द्वि-प्रघाती राकेट मोटर त्रिशूल के लिए स्वदेश में ही अभिकल्पित और विकसित की गई है। धूम्ररहित संयोजित प्रेरक भी इस राकेट मोटर के लिए स्वदेश में विकसित किया गया है। राकेट टर का कई बार उड़ान परीक्षण बिना किसी खामी के हो चुका है।

प्रक्षेपण आधान पात्र 
त्रिशूल एक एफआरपी कनिस्तर में शस्त्रागार (गोला-बारूद) के रूप में मोचित किया जाता है। यह प्रक्षेपण आधान पात्र स्वदेश मे ही विकसित किया गया है जिसमें इसकी विद्युतीय अंतरापृष्ठ के साथ स्वचलित नाभीय खिंचाव, परिवहन परिबंध यांत्रिकता जैसे विभिन्न पात्रिकताएं हैं।

मुड़वां मीन पंख तकनीकी

त्रिशूल मिसाइल के लिए प्रक्षेपक पर और अधिक संख्या में मिसाइल खपा सकने के लिए प्रक्षेपण पात्र के न्यूनतम आयाम रखने के लिए मुड़वां मीन पंख तकनीकी का विकास किया गया है। जब मिसाइल प्रक्षेपण आधान पात्र के भीतर होती है तब उसके चारों मीन पंख मुड़े रहते हैं। जैसे ही मिसाइल प्रक्षेपण आधान पात्र से बाहर निकल आती है, मीन पंख अपने आप ही खुल जाते हैं। मीन पंख मुड़ने की यांत्रिकता का अभिकल्पन और और कार्यान्वयन एक वास्तविक चुनौती रही है। मुड़वा पंख यांत्रिकता बड़ी संख्या हुए अचूक उड़ान परीक्षणकों से होकर निकली।

प्रवाह नियामक प्रौद्योगिकी 
प्रवाह नियामक (flow forming-रचने वाली) कही जाने वाली अभिनव उत्पादन प्रौद्योगिकी त्रिशूल का उड़ान ढांचे की संरचना बनाने के लिए स्थापित की गई है। त्रिशूल के उपांतीय इस्पाती राकेट मोटर नलिकाएं तथा अन्य एयरफ्रेम संरचनाओं के लिए इस प्रौद्योगिकी का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है। त्रिशूल मिसाइल के हार्डवेयर का भार घटाने में इस प्रौद्योगिकी की निर्णायक भूमिका है।

हाइपरसोनिक वाहन के लिए सामग्री
बढ़े हुए तापमान पर वांछित शक्ति को बनाए रखने के लिए सामग्रियां चुननी पड़ती हैं। लघु अवधि वाली अभियान सामग्रियां इंजन की भित्तियों के लिए उच्च ताप का मुकाबला करने के लिए वांछित होती हैं। विमान ढांचे की पहली मिश्र धातु टाइटेनियम है। उसका संरचनात्मक सहायता के लए एक और मिश्रधातु तथा उच्च तापमान वाले क्षेत्रों के लिए कार्बन यौगिक की जरूरत होतीहै। ये सामग्रियां उपयुक्त लेपन के साथ लघु अभियानों के लिए अनुकूल होती हैं।
तापीय अवरोधक लेपन सतह के तापमान स्तरों को सामग्री की क्षमता के भीतर नीचे नीचे लाती है। टीबीएसी'ज़ के कई तापीय परीक्षण एवं क्षरण परीक्षण किए गए और यह पाया गया कि सिरेमिक आधारित लेपकों का उपयोग प्रयुक्तियों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। प्रौद्योगिकी का विकास कई कार्य केंद्रों में किया गया है। परीक्षणों और डिजाइनरों के सुझावों के आधार पर प्रौद्योगिकी में सुधार किया जाएगा।

 

 

 

 

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