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निदेशक की प्रोफाइल

डा. नम्बूरी ईश्वरा प्रसाद, वैज्ञानिक 'जी' ने 1 अगस्त, 2015 से रक्षा सामग्री और भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई), कानपुर के निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला है।

डा. प्रसाद ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय), वाराणसी, भारत से 1985 में धातुशास्त्र इंजीनियरी में बी.टेक. डिग्री प्राप्त की और 1993 में इसी विषय में पीएच.डी. डिग्री प्राप्त की। डा. प्रसाद ने 1985 में डीआरडीओ वैज्ञानिक 'बी'  के रूप में कार्यभार संभाला डीएमआरएल, हैदराबाद में 2009 तक कार्य किया। वह सितंबर 2009 में क्षेत्रीय निदेशक, आरसीएमए (सामग्री), सीईएमआईएलएसी, हैदराबाद और 2010 में वैज्ञानिक 'जी' बने। वह वर्तमान में निदेशक, डीएमएसआरडीई, कानपुर, भारत है।

डा. प्रसाद 1985 से भारतीय रक्षा बलों के लिए संरचनात्मक और विशेष सामग्री (प्राथमिक और द्वितीयक दोनों उत्पाद) और अवयवों के डिज़ाइन, विकास, जीवन अनुमान और उत्पादन पर कार्य कर रहे हैं। उनका शोध योगदान मुख्यतया Al & Al-Li मिश्रधातुओं,  एडवांस्ड एयरोस्टील और Ti  मिश्रधातु, Mo और Ti  इंटरमेटैलिक्स, मोनोलिथिक सेरेमिक्स जैसे स्ट्रक्चरल एल्युमीना, ग्रैफाइट और Sic, कार्बन और Sic आधारित सतत फाइबर प्रबलित, सेरेमिक-मैट्रिक्स कम्पोज़िट (सीएफसीसी) के विकास में रहा है। डा. प्रसाद को अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 100 पत्र और 350 से अधिक गोपनीय प्रतिवेदनों और एयरवर्दीनेस प्रमाणन दस्तावेजों समेत 190 से अधिक समकक्ष-समीक्षित प्रकाशनों को प्रकाशित करने का श्रेय प्राप्त है। उन्होंने एल्सवायर पब्लिकेशन्स, यूके/यूएसए द्वारा प्रकाशित एल्युमीनियम- लीथियम मिश्रधातुओं संबंधी एकमात्र अंतरराष्ट्रीय मोनोग्राफ समेत 26 किताबें और किताबों के अध्याय भी लिखे/संपादित किए हैं। डा. प्रसाद को मिले कुछ महत्वपूर्ण पुरस्कारों और सरहानाओं में आईएससीए के युवा वैज्ञानिक (1991), आईआईएम के युवा धातुविद् (1994), मैक्स-प्लांक-इंस्टीट्यूट के विजिटिंग वैज्ञानिक और जर्मनी की एलेक्जेन्डर-वॉन-हमबोल्ड्ट फाउंडेशन की रिसर्च फेलोशिप (1998-1999), आईआईएम का बिनानी गोल्ड मेडल (2006), इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा  आईआईएम के वर्ष 2010 के धातुविद और एरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया का डा. वीएम घटके अवार्ड (2014) शामिल हैं। इसके अलावा, डा. प्रसाद को इंस्टीट्युशन ऑफ इंजीनियर्स के फेलो (2009), आंध्र प्रदेस एकेडमी ऑफ साइंसेज़ के फेलो (2011), इंडियन इंस्टीट्युट ऑफ मेटल्स के फेलो (2011), उपाध्यक्ष, आईआईएम का हैदराबाद चैप्टर (2012), और 2013 में, एआईसीटीई-आईएनएई आंध्र विश्वविद्यालय एवं एमजीआईटी के विशिष्ट विजिटिंग वैज्ञानिक और साथ ही आईआईटी-बीएचयू (एमईटी) के विशिष्ट एल्युम्नस अवार्ड के लिए भी चुना गया है।

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