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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि


रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएमआरएल) का आधुनिक प्रगतिशील युद्ध हथियार प्रणाली के लिए आवश्यक जटिल धातु और सामग्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए 1963 में हैदराबाद में स्थापन हुआ था। इन वर्षों में प्रयोगशाला ने धातु में अनुसंधान एवं विकास, एलोय, सिरेमिक और कंपोजिट के लिए प्रमुख केंद्र के रुप में एक विशेष स्थान प्राप्त किया है। अपने आरंभ से ही प्रयोगशाला ने धातु और मेटल विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी तकनीकों के विकास और स्थापना के बहुत से कार्य किए है।

डीएमआरएल में विकास देश में नई तकनीक और उत्पादन केंद्रो के विकास को बढ़ावा देता है। इनमें मिश्रा धातु निगम (मिडहानी), अलौह तकनीकी विकास केंद्र (एनएफटीडीसी) और पाउडर धातु और नई सामग्री के लिए अंतर्राष्ट्रीय उन्नत अनुसंधान केंद्र, यह सभी हैदराबाद में स्थित हैं और भारी मिश्र धातु संयंत्र प्रवेशक (एचएपीपी), तिरुचिरापल्ली में स्थित एक युद्ध सामग्री बनाने वाली फैक्ट्री शामिल है। वर्तमान में यह अपने स्वयं के अधिकारों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर बहुत महत्वपूर्ण संस्थान हैं।

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