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प्रयोगशाला के बारे में

रक्षा प्रयोगशाला जोधपुर (डीएलजे)को मरुस्थल में पर्यावरणीय स्थिति से संबंधित समस्याओं और रेगिस्तानी युद्धों पर उनके प्रभाव से संबंधित समस्याओं से निपटने के लिए मई 1959 में स्थापित किया गया था। प्रयोगशाला के लिए आवंटित प्रारंभिक चार्टर था :

"शुष्क क्षेत्र में लागू अनुसार बुनियादी अनुसंधान आयोजित करने, भौतिकी अध्ययन, रेडियो तरंग प्रसार अध्ययन और सौर ऊर्जा के अलावा उन हथियारों और उपकरणों पर क्षेत्र परीक्षण करना जो नए डिजाइन के हों या देश में विकसित किए गए हों या आयातित जानकारी के साथ स्वदेश में उत्पादित किए जा रहे हों"

बाद में, प्रयोगशाला के विस्तार के साथ, कर्तव्यों के चार्टर को परिचालनात्मक अनुसंधान, मरुस्थल में छलावरण, मरुस्थल में इलेक्ट्रानिक्स और संचार, मरुस्थल में पानी की समस्या, मरुस्थल में परिवहन और नेविगेशन प्रणालियाँ और हथियारों, गोलाबारूद, और गोदाम क्षेत्रों की गतिविधियों को जोड़ कर इसे समृद्ध किया गया।

प्रयोगशाला छलावरण, धोखा, जांच, टोही, मरुस्थलीय परिस्थितियों में हथियार एवं गोला बारूद, कपड़े, उपकरणों और भंडारण के प्रदर्शन, एकीकृत जल प्रबंधन, मिट्टी स्थिरीकरण और बचाव में रेडियोआइसोटोपों के अनुप्रयोग के रणनीतिक क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास में लगी हुई है। प्रयोगशाला के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं: -

  • छलावरण और कम दर्शिता युक्त प्रौद्योगिकियाँ
  • परमाणु विकिरण प्रबंधन और अनुप्रयोग
  • मरुस्थल पर्यावरण विज्ञान और प्रौद्योगिकी

प्रयोगशाला की एक अनूठी विशेषता रही है जो सभी तीनों प्रमुख क्षेत्रों में बुनियादी अनुसंधान करती है, इसे प्रौद्योगिकी में रूपान्तरित करती है और अंत में इसे उन प्रणालियों में लागू किया जाता है जिन्हें सेवाओं में शामिल किया गया है।

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