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उपलब्धियां


डीआईपीएएस द्वारा संचालित विविध पोषणिक अध्ययन

पोषणिक जरूरतों/राशन स्तर अध्ययन वर्ष

उच्त तुंगता

1963, 1967, 1968, 1996,2002-06

समुद्र स्तर एवं मैदान

1968, 1986,2002-06

तीव्र तुंगता के लिए राशन स्तर

1984, 1997, 2002-06

सैन्य प्रशिक्षण (मूल सैन्य प्रशिक्षण, कमांडो, एचए युद्ध)

2004-07

एकीकृत स्तर

1986

पनडुब्बी राशन स्तर

1972

सैन्य एवं सैनिक स्कूल बालक

1979 & 1999

मरीज स्तर (उपचारात्मक खुराक सहित 10 प्रकार)

1981

बोर्डर रोड़ संगठन

 

तट रक्षक

1992

थल, जल एवं वायु सेना का पोषणिक जरूरत समीक्षा और मौजूदा राशन स्तर की पर्याप्तता  2002-2006

 

पटाखों हेतु सुरक्षा मानदंड

डीआईपीएएस द्वारा पटाखों के शोर से संबंधित सुरक्षा मानदंड तैयार किए गए हैं जो भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा 1999 में दिल्ली में स्वीकार किए जा चुके हैं।

सशस्त्र बलों में योग की शुरुआत

विभिन्न जलवायु उग्रताओं तथा प्रशिक्षण के अधीन सैनिकों की कार्यक्षमता सुधारने (मानसिक तथा शारीरिक दोनों) के लिए योग (आसन और प्राणायाम) के लाभकारी प्रभाव, डीआईपीएएस द्वारा व्यापक वैज्ञानिक अध्ययनों में स्थापित किए गए हैं। योग पैकेज तैयार किए गए तथा पश्चिमी एवं पूर्वी नौसेना कमान के 100 कार्मिकों को योग प्रांरभ किया गया है। धीरे-धीरे योग सशस्त्र बलों के तीनों स्कंधों में बुनियादी प्रशिक्षण के रुप में शामिल किया जाएगा।

संयुक्त भारतीय हर्बल नुस्खा (सीआईएचपी) एडैप्टोजेन

डीआईपीएएस द्वारा ऊंचे पर्वतों पर (>4000मी.) सैनिकों पर दुष्प्रभावों तथा कैजुअल्टी कम करने के लिए जलवायु अनुकूलन में व्यापक अनुसंधान किया गया है। इसके अतिरिक्त आयुर्वेद औषधियों में मौजूद एडैप्टोजेनिक पदार्थों के तनावमुक्त करने तथा क्षमतावृद्वि गुणों की खोज की जा रही है। इन अध्ययनों के फलस्वरुप एडैप्टोजेन उत्पाद (सीएचआईपी-I तथा सीआईएचपी-II) तैयार किए गए हैं। भारतीय सेना के वालंटीयरों में 2 साल लम्बे अति उच्चता तैनाती के दौरान 2 गोली (प्रत्येक गोली 480 एमजी) प्रतिदिन की खुराक पर सीआईएचपी-II में एडैप्टोजेनिक क्षमता सिद्व हुई है।

हर्बल नुस्खों के मूल्यांकन हेतु सी एच आर (कोल्ड-हाइपोक्सिया-रेस्ट्रैन) माडल

एडैप्टोजेनिक गतिविधि के पदार्थों के मूल्यांकन हेतु एक परीक्षण माडल कोल्ड-हाइपोक्सिकरेस्ट्रैंट तैयार किया गया है तथा यह माडल वैज्ञानिक समुदाय और फार्मास्युरिकल उद्योग द्वारा एंटी-स्ट्रेस तथा क्षमता वर्धन उत्पादों के मूल्यांकन हेतु स्वीकार कर लिया गया है। इस माडल में एक रात भर का भूखा चूहा एक चैम्बर में 50 डिग्री से तापमान (शीत) तथा हाइपोक्सिया (428 मिमी एचजी) में रखा जाता है। मूल शरीर तापमान का अनुरक्षण एक अति प्रतिकूल पर्यावरण में किया जाता है।

 
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