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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पूसा, नई दिल्ली में स्थित एनपीएल (NPL) के परिसर में रक्षा विज्ञान प्रयोगशाला (डीएसएल) के दायरे के अंदर शरीर-क्रिया विज्ञान के एक छोटे विभाग के गठन के साथ 1952 में सैन्य शरीर-क्रिया विज्ञान में अनुसंधान आरंभ किया गया था। इसके बाद पर्यावरण के शरीर-क्रिया विज्ञान और मानव-मशीन अंतराफलक (इंटरफेस) की प्रमुख संवेगी क्षेत्र के रूप में पहचान के साथ, 20 सितंबर 1962 को डीएसएल परिसर में, जिसे तब तक एनपीएल (NPL) से मेटकाफ हाउस, दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया था, आधिकारिक तौर पर शरीर-क्रिया विज्ञान और संबद्ध विज्ञान (डीआईपीएएस) का रक्षा संस्थान की स्थापना की गई। दिसम्बर 1962 और 1968 के बीच एक छोटी अवधि के लिए डीआईपीएएस (DIPAS), मद्रास मेडिकल कॉलेज, मद्रास के शरीर-क्रिया विज्ञान विभाग में स्थित रहा था। बाद में, 1968 में, इसे सेना के बेस अस्पताल, दिल्ली छावनी में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्ष 1993 में, संस्थान को लखनऊ रोड, तिमारपुर, दिल्ली में इसके वर्तमान स्थायी परिसर में स्थानांतरित किया गया। सैनिकों के समग्र स्वास्थ्य और प्रदर्शन में सुधार के संबंध में शरीर-क्रिया विज्ञान, जैवरसायन, जैवचिकित्सा और आण्विक अनुसंधान (प्रोटिओमिक्स जीनोमिक्स) के लिए सभी प्रकार की नई बुनियादी सुविधाओं के साथ संस्थान लगातार समृद्ध हुआ है।

प्रारंभिक वर्षों के दौरान, डीआईपीएएस (DIPAS) ने सैन्य संचालन के तत्काल अनुप्रयोग के सभी प्रमुख क्षेत्रों, अर्थात् राशन की माप और सैनिकों का पोषण, कपड़ों के आकार, पैदल सेना के सैनिकों में भार वहन और वितरण, थर्मल सुविधा क्षेत्र की पहचान, गर्मी के शिकार की प्रकृति, गर्मियों में नमक और पानी की आवश्यकता, नौसेना के जहाजों की आवासीय स्थिति के सर्वेक्षण, शारीरिक प्रशिक्षण और अनुकूलनीयता के कार्यक्रम आदि के लिए बड़े पैमाने पर योगदान दिया है। उपयोगकर्ताओं द्वारा सामना की जाने वाली तत्काल परिचालन की इन जरूरतों से संबंधित मुद्दों के साथ-साथ, समय और उभरती हुई प्रौद्योगिकी से उत्पन्न अनुसंधान अध्ययन भी जारी रहे। चरम वातावरण में प्रदर्शन संवर्द्धक के रूप में योग और एडाप्टोजेन (adaptogen) पर गहन अनुसंधान कार्य किया गया है। भर्ती मानकों के निर्धारण, पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए उपकरण और सुरक्षात्मक कपड़ों की डिजाइन के लिए शारीरिक गठन, मानवमिति पर आंकड़ा कोष (डेटाबेस) तैयार किए गए हैं। प्रदर्शन में सुधार के लिए रेगिस्तान में अभियान के तहत शारीरिक और संज्ञानात्मक कार्यों पर गर्मी प्रेरित हाइपो-जलयोजन का अध्ययन किया गया है। निवारक/उपचारात्मक उपायों के विकास के लिए अत्यधिक ऊंचाई पर एनोरेक्सिया, एचएपीई (HAPE), शीत की चोट, स्मृति हानि, नींद के नमूनों के तंत्रिका-शारीरिक तंत्र व्याख्यायित किया गया। शोर प्रेरित सुनवाई हानि के खिलाफ सुरक्षा उपकरण के रूप में कार्बोजेन श्वसन का सफलतापूर्वक विकास किया गया। शीत, गर्मी और एनबीसी सुरक्षात्मक कपड़ों का शरीर-क्रियावैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया। हाल ही में अलग-अलग परिचालन वातावरण के तहत और अत्यधिक ऊंचाई जैसे विशेष प्रशिक्षण के दौरान सशस्त्र बलों की पोषण आवश्यकताओं की समीक्षा की गई।

किसी भी रणनीति के मूल्यांकन की आधुनिक अवधारणाओं और अनुसंधान के अंतिम परिणाम की दिशा में मशीन के पीछे के आदमी के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए कुछ उपयोगी उत्पाद और प्रक्रियाएं विकसित की गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में किए गए अनुसंधान जांच और सिफारिशों को सशस्त्र बलों द्वारा सफल संचालन के लिए बल वर्द्धक का नाम दिया गया है। तीन चरण की एक पर्यनुकूलन अनुसूची ने सशस्त्र बलों को तीव्र पर्वतीय बीमारियों और अत्यधिक ऊंचाई के फुफ्फुसीय शोफ (पल्मनेरी एडिमा) की समस्याओं का सामना करने के लिए तैयार किया और अत्यधिक ऊंचाई के फुफ्फुसीय शोफ को काफी हद तक कम किया, अत्यधिक ऊंचाई के फुफ्फुसीय शोफ के उपचार के लिए योग और भारतीय मूल के जड़ी-बूटी (हर्बल) एडाप्टोजेन्स के साधन, शीतदंश की रोकथाम के लिए घृतकुमारी (एलो बेरा) आधारित क्रीम, शोर प्रेरित श्रवण शक्ति नुकसान की रोकथाम के लिए कार्बोजेन आदि कुछ ऐसी उपलब्धियां है जिन्हें स्वीकार कर लिया गया है और सशस्त्र बलों द्वारा इनका उपयोग किया जा रहा है। कठोर अनुसंधान के बाद निम्नतम शारीरिक मानकों पर पहुंचा गया और डीआईपीएएस (DIPAS) ने सशस्त्र बलों के लिए सैनिकों और अधिकारियों के चयन में, शरीर वसा और शरीर द्रव्यमान सूचकांक पर आधारित निम्नलिखित मानक निर्धारित किए हैं। भारतीय वायु सेना द्वारा पायलटों की भर्ती के लिए भी इन्हीं मानकों को लागू किया गया है। डीआईपीएएस ने सशस्त्र सेवाओं के लिए राशन की माप के निर्धारण, एलसीए के कॉकपिट या मुख्य युद्ध टैंक अर्जुन के चालकों के कक्ष की डिजाइन, पैराट्रूपर्स के लिए जीवन समर्थन प्रणाली के शारीरिक-क्रिया वैज्ञानिक मूल्यांकन और एनबीसी (NBC) सूट. की दिशा में भी काफी योगदान किया है।

डीआईपीएएस यहीं नहीं रुका, हमने बैटरी संचालित विद्युतीय गर्म दस्ताने और मोजे विकसित किए हैं जिनका मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके अलावा सैनिकों के रहने की स्थिति को कुछ आरामदायक बनाने के लिए गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग से एक आत्मनिर्भर कुटीर विकसित किया जा रहा है, ऐसा एक कुटीर आधार शिविर में परीक्षण के अधीन है। निकट भविष्य में, डीआईपीएएस (DIPAS) विद्युत से गर्म वस्त्र, मैदानी आश्रयों को गर्म करने और बिजली की आवश्यकता के लिए गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग, ऑक्सीजन संवर्धन, जीनोमिक्स डेटाबेस बनाने, विभिन्न प्रशिक्षण नवाचारों के द्वारा तेजी से पर्यनुकूलन की सुविधा और अत्यधिक ऊंचाई के प्रति सहिष्णुता में सुधार करने के लिए जड़ी-बूटी (हर्बल) की खुराक प्रदान करने के द्वारा अत्यधिक ऊंचाई पर सैनिकों के स्वास्थ्य और कल्याण में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। डीआईपीएएस (DIPAS) रेगिस्तानी अभियानों के लिए व्यक्तिगत ठंडे सूट विकसित कर रहा है और सैनिकों के स्वास्थ्य और रोग में सुधार के लिए योग को एकीकृत कर एलआईसी वातावरण में सैनिकों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की रणनीति विकसित कर रहा है।

शरीर-क्रिया विज्ञान और संबंधित विषयों के क्षेत्र में लिए 'मानव से अणु' और 'उत्पाद के लिए अवधारणा'  के दृष्टिकोण का उपयोग कर अनुसंधान के एक प्रमुख सैन्य संस्थान के रूप में उभरने के लिए डीआईपीएएस (DIPAS) ने एक लंबा रास्ता तय किया है। डीआईपीएएस (DIPAS) के तंत्रिका-वैज्ञानिक पर्यावरण मध्यस्थता की वजह से मस्तिष्क और व्यवहार के परिवर्तनों के पीछे के शारीरिक और आणविक तंत्र को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत में सैनिकों को विभिन्न पर्यावरणीय स्थितियों में नियुक्त किए जाने की वजह से तनावपूर्ण पर्यावरणीय परिस्थितियों में होनेवाले तंत्रिका-शारीरिक (neurophysiological) परिवर्तन डीआईपीएएस (DIPAS) के प्रमुख संवेगी क्षेत्र हैं। आरंभ में अत्यधिक ऊंचाई पर मस्तिष्क के कार्यों पर अनुसंधान तंत्रिका-शारीरिक (neurophysiological) परिवर्तन, स्वतंत्र तंत्रिका तंत्र की प्रतिक्रियाओं,  ईईजी, नींद के विवरण और अत्यधिक ऊंचाई पर रहने के समय नींद के अभाव के प्रभाव पर केंद्रित रहे। बाद में कई अन्य मानकों जैसे उत्पन्न क्षमता, घटना से संबंधित क्षमता और सुख संबंधी मैट्रिक्स एवं हाइपोफागिया (hypophagia) पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया है। अत्यधिक ऊंचाई पर काम करने के लिए शामिल मानव स्वयंसेवकों के संज्ञानात्मक कार्यों के मूल्यांकन के लिए मनोवैज्ञानिक और विद्युतीयशारीरिक (electrophysiological) परीक्षणों ने अत्यधिक ऊंचाई पर रहने के बाद मस्तिष्क के कार्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। अत्यधिक ऊंचाई प्रेरित एनोरेक्सिया पर हमारी जांच से भोजन संबंधी व्यवहार पर संवेदी निर्भरता और मिठास के स्वाद के लिए सुखात्मक प्रतिक्रियाओं में परिवर्तन का पता चला।

अत्यधिक ऊंचाई पर रहने के समय की गई विद्युतीयशारीरिक (electrophysiological)  प्रतिक्रियाओं पर किए गए अनुसंधान के अलावा, तंत्रिकाशारीरिक क्रियाओं (Neurophysiology) में तनाव प्रेरित परिवर्तनों को सुधारने में योग और चिकित्सीय उपचार की क्षमता के मूल्यांकन पर भी जांच की गई। वर्तमान में, शोध का मुख्य क्षेत्र व्यवहार और सोने के अभाव के विशेष संदर्भ सहित तनावपूर्ण माहौल में न्यूरोट्रांसमीटर के परिवर्तन में शामिल आणविक तंत्र को स्पष्ट करना है। संज्ञानात्मक कार्यों के साथ-साथ अत्यधिक ऊंचाई पर प्रतिनियुक्त सैनिकों की नींद की गुणवत्ता को सुधारने के जवाबी उपायों के तौर पर औषधीय और गैर-औषधीय दोनों प्रकार की चिकित्सा (हस्तक्षेपों) का पता लगाया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ तालमेल रखने के लिए, डीआईपीएएस (DIPAS) ने जैव प्रौद्योगिकी, प्रोटिओमिक्स, जीनोमिक्स, और सूक्ष्मप्रौद्योगिकी (नैनोटेक्नोलॉजी के उभरते क्षेत्रों में भी प्रवेश किया है। परिचालन की जरूरतों से संबंधित मुद्दों पर अनुसंधान के साथ-साथ समय और उभरती प्रौद्योगिकियों से तालमेल बनाए रखने के लिए अनुवाद संबंधी अनुसंधान भी प्रारंभ किए गए हैं। टाइफाइड और कई न्यूट्राक्यूटिकलों के खिलाफ एचएसपी (HSP) आधारित एक महत्वपूर्ण उम्मीदवार टीके में इसका समापन हुआ है। वर्तमान में, तैनाती की सभी स्थितियों के तहत सैनिकों के शारीरिक और संज्ञानात्मक प्रदर्शन में सुधार करने के तरीकों के साथ-साथ पर्यनुकूलन, गलत अनुकूलन के चिह्नकों को प्रकाश में लाने पर अध्ययन किए जा रहे हैं। इसके अलावा हम सैनिकों के प्रदर्शन में सुधार के लिए अपने अनुसंधान में सशस्त्र सेवाओं, हमारी सहयोगी डीआरडीओ प्रयोगशालाओं, जैवचिकित्सा एजेंसियों और देश के भीतर और विदेश में स्थित शिक्षा संस्थानों से सक्रिय सहयोग करने में विश्वास रखते हैं।

डीआईपीएएस (DIPAS) का यह प्रयास उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक सुविधा के निर्माण, शरीर-क्रिया विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण के लिए प्रशिक्षित मानव शक्ति प्रदान करने और वैश्विक परिचालन बल प्रदान करने के लिए है।

 
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