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निदेशक प्रोफाइल

ओम प्रकाश चौरासिया ने 15 फरवरी, 2017 को उच्च उन्नतांश अनुसंधान रक्षा संस्थान (डीआईएचआर), लेह-लद्दाख के निदेशक का पदभार संभाला है। 1966 में पैदा हुए डॉ. ओ पी चौरसिया ने मगध विश्वविद्यालय, बोध गया, बिहार से वनस्पति विज्ञान में पीएचडी की है। 1993 में वे एक अनुसंधान सहयोगी के रूप में डीआरडीओ में शामिल हुए एवं 1998 में डीआईएचएआर के वैज्ञानिक 'सी' के रूप में उनका चयन हुआ और वर्तमान में वे वैज्ञानिक 'एफ' के रूप में सेवा कर रहे हैं। एक उत्कृष्ट जातीय वनस्पतिशास्त्री के रूप में उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप जैसे तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ लद्दाख और लाहौल-स्पिति के ट्रांस-हिमालय क्षेत्र में रक्षा महत्व के औषधीय पौधों पर व्यापक सर्वेक्षण किया। उन्होंने ठंडी शुष्क कृषि प्रौद्योगिकियों और संरक्षित खेती पर अनुसंधान की पहल की, इन्होंने लद्दाख के रणनीतिक क्षेत्र में सैनिकों की खाद्य सुरक्षा में काफी हद तक योगदान दिया है। उन्होंने स्वदेशी ट्रांस-हिमालयी औषधीय पौधों विशेष रूप से सीबकथॉर्न से उच्च ऊँचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लक्षित स्वास्थ्य लाभ के साथ सीबकथॉर्न बेवरेज, सीबकथॉर्न हर्बल चाय, सीबकथॉर्न सॉफ्ट जेल कैप्सूल, हर्बल एंटीऑक्सिडेंट, हर्बल एडाप्टोजेनिक ऐपिटाइज़र, हर्बल एडाप्टोजेनिक प्रदर्शन वर्धक, ज्वायंट केयर जेल, एंटी ब्लेमिश क्रीम जैसे कई हर्बल उत्पाद विकसित किए हैं। उनके पास 11 पेटेंट हैं, जिनके लिए प्रौद्योगिकी का व्यवसायीकरण किया गया है। डॉ. चौरसिया ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 50 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और तटीय रेगिस्तानी पौधों एवं एथ्नो वनस्पति विज्ञान और ट्रांस-हिमालय के पौधों पर पुस्तकों के 5 संस्करण लिखे हैं।

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