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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि


भारत सहित अधिकांश देशों के लिए युद्धक्षेत्र में, बीहड़ पहाड़, अत्यधिक ठंड और उच्च-शिखरीय क्षेत्र जैसे मुश्किल इलाके शामिल हैं। इसलिए सफल सैन्य कार्रवाई अन्य तत्वों के अलावा सैनिकों के स्वास्थ्य पर निर्भर होती है। चरम उच्च-शिखरीय स्थिति में ताजा भोजन की बुनियादी मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, अत्यधिक उच्च-शिखरीय ठंडे रेगिस्तानी इलाके में सैनिकों की खाद्य आवश्यकताओं के लिए ताजा भोजन प्राप्त करने और इस क्षेत्र को काफी हरित बनाने के उद्देश्य के साथ, 1962 में, लेह में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की एक संघटक प्रयोगशाला, उच्च उन्नतांश अनुसंधान रक्षा संस्थान (डीआईएचआर), स्थापित की गई थी। यह एमएसएल के ऊपर 3,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दुनिया में अपनी तरह का अकेला संस्थान है, जिसकी मुख्य क्षमता ठंडे शुष्क कृषि-पशु प्रौद्योगिकी में है। इस संस्थान ने वर्षों से अपने अग्रणी अनुसंधान एवं विकास प्रयासों के माध्यम से कृषि, पशु और पशु चिकित्सा विज्ञान और लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान की औषधीय वनस्पतियों में प्रत्यक्ष गुणात्मक और मात्रात्मक बदलाव किए हैं।

संस्थान में मुख्य रूप से ताजा सब्जी और पशु मूल भोजन की उत्पादकता में वृद्धि कृषि पशु- रोगों की जांच और नियंत्रण उपायहर्बल उत्पादों के निर्माण के लिए उच्च-शिखरीय पादपों की संपत्ति का दोहनदेशी पशुओं के जर्मप्लाज्म के अप ग्रेडेशनअर्द्ध-पर्माफ्रॉस्ट आधारित संभ्रांत पौधों के जर्मप्लाज्म का संरक्षणकृषि -बागवानी फसलों के लिए फसल काटने के बाद की तकनीकउन्नत हेचिंग तकनीकफसल और पशु उत्पादकता में सुधार के लिए नैनोसामग्रीआधारित प्रौद्योगिकीऔर प्रयोगशाला से भूमि संचार में सुधार के लिए विस्तार गतिविधियों के बुनियादी शोध पर जोर दिया गया है। संस्थान का अनुसंधान स्टेशन रणबीरपुरालद्दाखपेटापुरसियाचिन सेक्टर मेंबेस लैबोरेटरी चंडीगढ़ में और दुनिया का उच्चतम स्थलीय अनुसंधान एवं विकास केंद्र चांगलालद्दाख में स्थित है।

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