संपर्क
DRDO
मुख्य पृष्ठ > डीएफआरएल > ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएफआरएल) की स्थापना दिसम्बर, 1961 को मैसूर में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, के तत्वाधान में की गई जिसका उद्देश्य हमारी सैन्य सेवाओं के सामरिक परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करना और खाद्य आपूर्ति के क्षेत्र एवं थल सेना, नौसेना और वायु सेना तथा अन्य अर्धसैनिक बलों की विविध खाद्य चुनौतियों का सामना करने में सैन्य सहयोग प्रदान करना है।

हमारे सैनिक प्रायः दूर-दराज के दुर्गम, असह्य इलाकों में कठोर और प्रतिकूल मौसम के अंतर्गत काम करते हैं। ऐसी परिचालन परिस्थियों में, वे न केवल जीवन प्रक्रिया को जारी रखने के लिए ताजा उत्पादों से वंचित रहते हैं, बल्कि खाना बनाने की सामान्य प्रक्रिया भी उनके लिए बेहद बोझिल और कठिन होती है। डीएफआरएल में अनुसंधान एवं विकास प्रयासों का उद्देश्य थल सेना, नौसेना, वायुसेना और अन्य अर्द्ध सैनिक बलों के लिए हल्के भार के सुविधाजनक डिब्बाबंद राशन की डिजाइन और योजना तैयार करना है। उपभोक्ता के लिए ऐसे खाद्य पदार्थों को पकाने या इसके लिए किसी तैयारी की जरुरत नहीं होती है और ये विविध जलवायु अवस्थाओं में 6 महीने से 1 साल तक बिना खराब हुए रह सकते हैं। यह एकमात्र प्रयोगशाला है, जो रक्षा सेनाओं के लिए खाद्य विज्ञान और प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास में पूरी तरह से व्यस्त है। डीएफआरएल की स्थापना के पहले, यह प्रयोगशाला, रक्षा विज्ञान प्रयोगशाला, दिल्ली के परिसर में एक खाद्य समूह की तरह काम करता था।

विशाल और पर्याप्त योगदान के माध्यम से, डीएफआरएल ने देश के मुख्य स्वाद से मेल खाते भारतीय आहारशैली के खाद्य उत्पादों की एक व्यापक वेराइटी तैयार की है। अभिनव प्रोद्योगिकी से जन्में कई डीएफआरएल खाद्य पदार्थों ने स्वयं को विशेष तौर पर उपयुक्त विभिन्न शैली के उद्धमियों द्वारा औद्योगिक स्तर पर वाणिज्यिक दोहन के लिए सौंप दिया है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ में इसके एकल समर्पित योगदान के कारण, डीएफआरएल के पास निर्यात के उपयुक्त और कामकाजी महिलाओं के प्रतिसंवेदी उत्पाद भी हैं।

डीएफआरएल अपने वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों के समर्पित प्रयासों के माध्यम से पिछले पांच सालों में, भारतीय आहारशैली के खाद्य उत्पादों की एक विशाल वेरायटी के संरक्षण, परिरक्षण, स्थिरीकरण, डिजाइनिंग, और निर्माण में सक्षम रहा है। ये खाद्य पदार्थ न केवल सभी मौसम अवस्थाओं में स्व-स्थिर रह सकते हैं बल्कि हमारे सैनिकों के हौसले को हमेशा ऊँचा रखने के लिए पर्याप्त पोषण और उर्जा भी प्रदान करते हैं। इस देश में सुविधाजनक खाद्य और डिब्बाबंद राशन के विकास में डीएफआरएल की गणना मार्गदर्शक के तौर पर की जा सकती है। डीएफआरएल में विकसित ज्यादातर प्रौद्योगिकी, स्वदेशी बुद्धि की बानगी हैं।

.
.
.
.
Top