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निदेशक प्रोफाइल

श्री उपेन्द्र कुमार सिंह ने 1 जनवरी 2015 से निदेशक, रक्षा जैव-अभियांत्रिकी एवं विद्युत-चिकित्सा प्रयोगशाला (डीईबीईएल), बेंगलुरू का कार्यभार ग्रहण कर लिया है।

श्री सिंह ने डीएवीवी, इंदौर से कम्प्यूटर विज्ञान में अपनी एम.एससी और एम.टेक डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने अक्टूबर 1989 में पोत निर्माण केंद्र (एसबीसी), विशाखापटनम में एटीवी परियोजना के अंतर्गत अपना वैज्ञानिक भविश्य आरंभ किया और 1992 में वे एनएसटीएल में चले गए, जहां उन्होंने न्यूनाधिक भार वाले टॉरपीडोज के ऑन-बोर्ड कम्प्यूटर की प्रणाली संरचना और अंतःस्थापित सॉफ्टवेयर विकास हेतु कार्य किया। वे सितंबर 2001 में आरसीआई, हैदराबाद में कार्यक्रम एडी से जुडे़।

श्री सिंह ने बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र रक्षा (बीएमडी) कार्यक्रम हेतु वास्तविक-समय में अंतःस्थापित प्रणालियों के विकास तथा शस्त्र प्रणाली कारकों के एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने समस्त ऑन-बोर्ड प्रणालियों के वैद्युत एकीकरण, निरीक्षण, स्वारंभ तथा समय संबद्धीकरण का सैन्याभिमुख कार्य किया। वे विभिन्न पदों पर तैनात रहे जिनमें परियोजना प्रबंधक, परिवर्तन बोर्ड प्रबंधक, एचआईएलएस गतिविधियों के प्रभारी, शस्त्र प्रणाली-नियंत्रक, उप परियोजना निदेशक तथा परियोजना निदेशक जैसे पद सम्मिलित हैं। परियोजना निदेशक, कार्यक्रम एडी (शस्त्र प्रणालियां) के रूप में वे महत्वपूर्ण वैमानिकी के साथ ही साथ शस्त्र प्रणालियों के थल प्रणाली कारकों की अभिकल्पना, विकास और उत्पादनीकरण में सम्मिलित रहे हैं। वे ऑन-बोर्ड कम्प्यूटर की वास्तविक समय मं अंतःस्थापित प्रणालियों, प्रक्षेपास्त्र इंटरफेस इकाई, एकीकृत वैमानिकी कारक, अंतःस्थापित आरंभिक-पैड कम्प्यूटर और आरएफ आंकड़ा प्राप्तकर्ता के विकास में भी कार्यव्यस्त थे। उन्होंने का-बैंड अन्वेशक के विकास तथा इसके सभी कारकों जैसे एंटीना, डीएसपी बोर्डों, विद्युतापूर्ति, नियंत्रक प्रणालियों और मॉड्यूलेटर के एकीकरण में इस तरह प्रगति करी ताकि इसे प्राप्तकर्ता विधि के अंतर्गत सफल एचआईएलएस परीक्षण की स्थिति में लाया जा सके। वे बीएमडी रक्षा हेतु बहु-लक्षित बहु-अवरोधक परिदृश्य के लिए संचार केंद्र, आंकड़ा संबधी ट्रांसमीटर, मिशन नियंत्रक इकाई और आरंभ नियंत्रण इकाई के विकास में सक्रिय थे।

श्री उपेन्द्र कुमार सिंह ने अब तक अपने 25 वर्षों के सेवाकाल के दौरान सेवाओं के लिए आधुनिक शस्त्र प्रणालियों को प्राप्त करने हेतु भारतीय उद्योगों, अकादमियों और विदेशी फर्मों के साथ जुटकर कार्य किया है। निदेशक, डीईबीईएल के रूप में वे अब जीवन-सहायक प्रणालियों और जैव-चिकित्सा यंत्रों और उपकरणों के विकास में सेवाओं की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की प्राप्ति की दिशा में कार्यव्यस्त होंगे।

उन्होंने राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रसारित पत्रिकाओं में अनेक पत्र प्रकाशित किए हैं। वे वर्ष के विशिश्ट अनुसंधान/उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी विकास एवं प्रयोगशाला वैज्ञानिक हेतु डीआरडीओ पुरस्कार (प्रयोगशाला स्तर-डीआरडीओ पुरस्कार) के विजेता हैं। वे इलेक्ट्रॉनिकी एवं दूरसंचार अभियंता संस्थान (आईईटीई), भारतीय कम्प्यूटर समिति (सीएसआई) तथा भारतीय वैमानिकी समिति के आजीवन सदस्य हैं।

वे जैव-चिकित्सा प्रौद्योगिकी समिति (एसबीएमटी) के सीईओ भी हैं।

 
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