संपर्क
DRDO
मुख्य पृष्ठ >डीबेल> ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अप्रैल 1982 में एडीई परिसर में स्थित एयरो बायोइंजीनियरिंग यूनिट (एबीईयू) और एलआरडीई परिसर में स्थित एलआरडीई के विद्युत चिकित्सीय इंस्ट्रूमेंटेशन डिवीजन (ईएमआईडी) को मिलाकर रक्षा जैव अभियांत्रिकी और विद्युत चिकित्सीय प्रयोगशाला (डीईबीईएल) का गठन किया गया था। प्रयोगशाला ने 17 जून 1994 से एडीई परिसर में स्थित अपने निजी स्वतंत्र परिसर से कार्य करना शुरू कर दिया। आज डीईबीईएल सैन्य सेवा के लिए अनुसंधान एवं विकास कार्य तथा अपने अतिरिक्त उत्पादों की प्रौद्योगिकी के नागरिक अनुप्रयोग दोनों के लिए समर्पित कुछ डीआरडीओ प्रयोगशालाओं में से एक है।

दो इकाइयों में रक्षा से संबंधित जैव अभियांत्रिकी और विद्युत चिकित्सीय प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास की उत्पत्ति का पता लगाया जा सकता है। 1958 में, डीटीडी एवं पी (वायु), रक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली के हिस्से के रूप में एयरोमेडिकल सेक्शन नामक एक बहुत छोटे समूह का गठन किया गया था। यह तत्कालीन विमानन चिकित्सा संस्थान (आई ए एम), बंगलौर के परिसर से कार्य करता था। 1974 में, इसे एयरो बायोइंजीनियरिंग यूनिट (एबीईयू) का नाम दिया गया था। 1980 में, इसे खाद्य और प्रायोगिक विज्ञान निदेशालय, डीआरडीओ के अंतर्गत लाया गया। सितंबर 1980 में इसे वैमानिकी विकास स्थापना (एडीई), सीवी रमन नगर, बंगलौर के परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया। इस अवधि के दौरान, इकाई ने वायु सेना, भारतीय नौसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बैंगलोर के लिए विमान कर्मियों के उड़ान, सुरक्षा और जीवनरक्षा रक्षा के कपड़ों और उपकरणों के स्वदेशीकरण का कार्य किया।

1958 में, जब इलेक्ट्रॉनिक्स अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान का (एलआरडीई) गठन किया गया था, उस समय इसमें ईएमआईडी नामक एक विशेष उपकरण विभाग था जो विद्युतचिकित्सा उपकरण से संबंधित अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का प्रभारी था। कुछ जैव चिकित्सा उपकरणों के साथ ही विमान कर्मियों की निजी सुरक्षा प्रणाली के डिजाइन और विकास के एक मामूली कार्यक्रम शुरू किया गया था। भविष्य में किए जाने के लिए अनुसूचित कार्य के व्यापक विशेष क्षेत्रों में एयरोमेडिकल इंजीनियरिंग और जीवन सहायक प्रणाली, एनबीसी संरक्षण, अंडरवाटर सिस्टम्स आदि शामिल थे।

तत्कालीन वैज्ञानिक सलाहकार डॉ राजा रमन्ना ने, 1982 में, इन बहु-क्षेत्रों को शामिल कर, सैन्य विभाग की चुनौतीपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस प्रकार की एक जटिल अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों की कल्पना की जो केवल संबंधित समूहों के विशेष प्रोत्साहन के साथ एक जगह संचालित होने पर तेजी से प्रगति कर सकती हैं। इसलिए, जनवरी 1982 में, ईएमआईडी को अपने कर्मचारियों के साथ एबीईयू में स्थानांतरित कर दिया गया था। इस प्रकार एबीईयू और ईएमआईडी के विलय के द्वारा अप्रैल 1982 में रक्षा जैव अभियांत्रिकी और विद्युत चिकित्सीय प्रयोगशाला (डीईबीईएल) का जन्म हुआ। प्रयोगशाला ने 17 जून 1994 से एडीई परिसर में स्थित अपने निजी परिसर से कार्य करना आरंभ किया और उपर्युक्त क्षेत्रों में विशेषज्ञता और अनुसंधान और विकास गतिविधियों में कठिन परिश्रम कर रही हैं।

 
.
.
.
.
Top