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डील - निदेशक प्रोफाइल

deal director

डा.आर.एस.पुंडीर द्वारा दिनांक 1 जुलाई 2015 को रक्षा इलेक्ट्रॉनिकी प्रयोज्यता प्रयोगशाला (DEAL) के निदेशक का पदभार ग्रहण किया गया। उन्होंने नवंबर 1983 में वैज्ञानिक-बी पद से अपना कैरियर आरम्भ किया और समय-समय पर अनेक पदोन्नतियां प्राप्त कीं। अक्टूबर 2015 में उनकी पदोन्नति वैज्ञानिक-एच एवं उत्कृष्ट वैज्ञानिक के पद पर हुई। निदेशक के पद का कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व वे आर.एफ.ग्रुप के ग्रुप निदेशक रहे और उनके नेतृत्व में ग्रुप द्वारा अनेक परियोजनाओं के लिए आर.एफ. प्रणालियाँ विकसित की गईं।  उन्होंने अनेक परियोजनाओं का परियोजना निदेशक के रूप में नेतृत्व किया जिनमें भारतीय नौसेना हेतु सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो के विकास की परियोजना(INDE-SDR),वी.एल.एफ.मोडलेटर एवं रिसीवर, सॉफ्टवेयर रेडियो विकास कार्यक्रम (SRDP), सिक्योर हाई डाटा रेट वी.एल.एफ.रिसीवर आदि शामिल हैं। उन्होंने उत्पादों के डिज़ाइन,विकास और परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डा. पुंडीर का जन्म 10 फरवरी 1959 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले  में हुआ। उन्होंने वर्ष 1979 में स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण की और मेरठ विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। रूड़की विश्वविद्यालय (अब आई.आई.टी.रूड़की)से अपनी पी.एचडी. थीसिस पूर्ण करने के बाद उन्होंने DRDO में अपनी सेवा आरम्भ की। 

डा. पुंडीर ने प्रयोगशाला को रेडियो संचार के क्षेत्र में नई ऊँचाईओं तक पहुँचाते हुए सशस्त्र बलों की संचार सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति  में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों के लिए कॉम्बैट नेट रेडियो के डिज़ाइन और विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है। यह उत्पाद सशस्त्र बलों द्वारा अपनाया गया है और इसकी गुणवत्ता की तुलना विदेशी निर्माताओं द्वारा निर्मित रेडियो से की जाती है। डा. पुंडीर ने अनेक परियोजनों में विभिन्न पदों पर रहते हुए अपना योगदान दिया। उन्होंने अपना कैरियर डिजिटल ट्रोपो प्रणाली,उल्का विस्फोट संचार प्रणाली एवं IGMDP के अंतर्गत HF CONMET के डिज़ाइनर के रूप में किया। उनके द्वारा सॉफ्टवेयर रेडियो विकास कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न आकृति गुणकों(form factors) का डिज़ाइन एवं विकास किया गया। इस उच्चीकृत प्लेटफॉर्म का उपयोग कर 'भारतीय नौसेना हेतु सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो का समेकित विकास (INDE- SDR)' कार्यक्रम के लिए एक स्टाफ परियोजना को निष्पादित किया गया। प्रोजेक्ट निदेशक के रूप में उन्होंने इस परियोजना के अंतर्गत विभिन्न आकृति गुणकों के डिज़ाइन,विकास और उपयोगकर्ता परीक्षणों (user trials)में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। परियोजना निदेशक के रूप में उनके नेतृत्व में न केवल 'एडवांस वी.एल.एफ. रिसीवर एवं मोडलेटर' डिज़ाइन का सफल परीक्षण भी आयोजित किया और अब यह सशस्त्र बलों द्वारा अपनाया जा रहा है।

डा. पुंडीर डील में 'लो इंटेंसिटी कनफ्लिक्ट(LIC)’ सम्बन्धी गतिविधियों के सह-समन्वयक रहे हैं। LIC के अंतर्गत एस-बैंड उपग्रह टर्मिनल विकसित किया गया और अर्धसैनिक बलों के समक्ष प्रदर्शित किया गया।

विभिन्न उत्पादों की डिजाइनिंग एवं विकास में दिए योगदान के लिए डा. पुंडीर को डी.आर.डी.ओ.द्वारा अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है जिनमें वर्ष का वैज्ञानिक पुरस्कार(2014), ए.वी.एल.एफ. रिसीवर के विकास के लिए प्रौद्योगिकी समूह पुरस्कार(2011), कॉम्बैट नेट रेडियो विकसित करने हेतु डी.आर.डी.ओ. का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पुरस्कार(2006), डील में ISO-9001 लागू करने हेतु डी.आर.डी.ओ.प्रौद्योगिकी पुरस्कार (1996) शामिल हैं। वर्ष 1989 में IGDMP में उनके योगदान के लिए उन्हें रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार द्वारा प्रशस्ति-पत्र भी प्रदान किया गया।  डॉ. आर एस पुंडीर एवं उनकी टीम को अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित चार कम्युनिकेशन सिस्टम (सॉफ्टवेयर डिफ़ाइन्ड रेडियो (एनसी), भारतीय नौसेना की जहाज/ पनडुब्बी के लिए उन्नत वी एल एफ मोडयूलेटर एवं डीमोडयूलेटर, ए.ई.डब्लू & सी.एस. के लिए डाटा लिंक एवं भारतीय वायुसेना के लिए ट्रोपोस्केटर कम्युनिकेशन सिस्टम) को रियालाइज़ एवं इंडक्ट करने के लिए वर्ष 2017 का डी.आर.डी.ओ. का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पुरस्कार भी प्रदान किया गया।

उनके द्वारा अंतराष्ट्रीय पत्रिकाओं में अनेक शोध-पत्र प्रकाशित किए गए हैं। साथ ही अनेक सम्मेलनों और संगोष्ठियों में शोध-पत्र पत्र प्रस्तुत किये हैं। वे IETE के आजीवन सदस्य हैं।

 

प्रयोगशाला के पिछले निदेशक


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