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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

    पर्यावरण एवं विस्‍फोटक सुरक्षा केन्‍द्र (सीज) की स्थापना 1992 में निम्‍नलिखित तीन संस्‍थानों के परस्‍पर विलय से हुई थी:

        1. कम्‍प्‍यूटर केन्‍द्र (डीआरडीओ)दिल्‍ली
        2. विस्‍फोटक सुरक्षा निदेशालय, डीआरडीओ,मुख्‍यालयतथा
        3. अग्नि परामर्शदाता कार्यालय, डीआरडीओ,मुख्‍यालय

वर्ष 2000 में, डीआरडीओ की एक अन्‍य प्रयोगशाला, जिसका नाम ‘रक्षा अग्नि अनुसंधान संस्‍थान (डीआईएफआर) था, का विलय सीज के साथ कर दिया गया । इस प्रयोगशाला के फायर साइंस में महत्‍वपूर्ण कार्य को देखते हुए वर्ष 2003 में इसका नाम बदलकर ‘अग्नि, विस्‍फोटक एवं पर्यावरण सुरक्षा केन्‍द्र (सीफीस) कर दिया गया। सीफीस, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के सैम, (SAM) (सिस्‍टम एनालिसिस एंड मॉडलिंग) संकुल (क्लस्‍टर) के अंतर्गत आती है।

अगिन, पर्यावरण एवं विस्फोटक सुरक्षा केंद्र (सीफीस) रक्षा स्थापनाओं के लिए अगिन, विस्फोटक तथा पर्यावरण सुरक्षा के लिए एक सलाहकार तथा विनियामक निकाय के रूप में कार्य करता है। यह अगिन विज्ञान, विस्फोटक सुरक्षा तथा पर्यावरण इंजीनियरी तथा मानीटरन के क्षेत्र में विशेषज्ञता का निक्षेपागार है। उपयर्ुक्त कार्यों के लिए प्रौधोगिकी आधार को सबल तथा समृद्ध बनाने की दृषिट से अगिन, पर्यावरण एवं विस्फोटक सुरक्षा केंद्र (सीफीस) प्रयोगात्मक विश्लेषण तथा प्रतिरूपण हेतु अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं की सहायता से इन क्षेत्रों में अनुसंधान तथा विकास परियोजनाओं एवं क्रियाकलापों का निष्पादन भी करता है। अगिन, पर्यावरण एवं विस्फोटक सुरक्षा केंद्र (सीफीस) रक्षा मंत्रालय के कार्मिकों के लिए विशेष रूप से अभिकलिप त अगिनशमन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करता है। इस प्रयोगशाला को भारत सरकार के सूचना प्रौधोगिकी विभाग (डी आर्इ टी) की मानकीकरण परीक्षण तथा गुणता  प्रमाणन सेवा (एस टी क्यू सी) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गुणता प्रबंधन प्रणाली मानक आर्इ एस ओ 9001 : 2000 के अनुरूप प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है।

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