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Director - DESIDOC

श्री पी.जयपाल,

मुख्य कार्यकारी (उड़ान योग्यता), सैन्य उड़ान योग्यता और प्रमाणन केंद्र (सेमिलैक) ने, वर्ष 1980 में सेक्रेड हार्ट कॉलेज, तिरुपत्तूर, तमिलनाडु से गणित में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वे एमआईटी, अन्ना विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं,  जहां से उन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग (1983)  में बी. टेक और वर्ष 1985 में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की।


1985 में, वे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार में शामिल हो गए और सैन्य उड़ान योग्यता के क्षेत्रीय केंद्र, आरसीएमए (नासिक) में काम किया,  जहाँ वे एचएएल (नासिक) मे निर्मित मिग विमान के उड़ान योग्यता पहलुओं और मरम्मत की देखभाल करते थे।


1990 में, वे आरसीएमए (हेलीकॉप्टर), बंगलौर में शामिल हो गए और उड़ान योग्यता आश्वासन और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच ध्रुव), हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच), लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (एलयूएच) के प्रमाणन का कार्य संभालते थे। बाद में वर्ष 2005 में, उन्होंने क्षेत्रीय निदेशक, आरसीएमए (हेलीकॉप्टर) का पदभार ग्रहण किया है। उन्होंने हेलीकॉप्टर के प्रमाणन से संबंधित कई तकनीकी पत्रों का प्रकाशन भी किया है।


उन्हें देश के विभिन्न भागों में स्थित सैन्य उड़ान योग्यता के 5 क्षेत्रीय केंद्रों (आरसीएम) की एक टीम का नेतृत्व करने वाले सेमिलैक, बैंगलोर में समूह निदेशक (एयरक्राफ्ट) के पद पर पदोन्नत किया गया था, जो विमानन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए सैन्य उड़ान योग्यता प्राप्त करने के लिए उड़ान योग्यता आश्वासन और सैन्य विमानन हेलीकॉप्टर, हवाई प्रणालियों, मानवरहित यान (यूएवी) के प्रमाणन पहलुओं, शस्त्र एकीकरण और हवाई वस्तुओं के स्वदेशीकरण में, क्षेत्रीय केंद्रों का मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने 02-अप्रैल 2014 को मुख्य कार्यकारी (उड़ान योग्यता), सेमिलैक का पदभार ग्रहण किया है।


मुख्य कार्यकारी (उड़ान योग्यता) के रूप में वे एलसीए, एएलएच, एचजेटी-36, यूएवी जैसी परियोजनाओं की उड़ान योग्यता मंजूरी प्रमाण पत्र गतिविधियों और रक्षा सेवा के कई प्रमुख उन्नयन कार्यक्रमों की देखरेख करते रहे हैं। संगठन के प्रमुख के रूप में, वे पूरे भारत में स्थित 14 आरसीएमए की सभी उड़ान योग्यता गतिविधियों की निगरानी और सभी सैन्य हवाई वाहनों की उड़ान सुरक्षा/राष्ट्रीय भंडारण सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।


वे वर्ष 2007 के प्रयोगशाला स्तर प्रौद्योगिकी समूह पुरस्कार के प्राप्तकर्ता रहे हैं और उन्हें वर्ष 2001 और 2008 के लिए उत्कृष्टता के डीआरडीओ अग्नि अवार्ड से सम्मानित किया गया है। हाल ही में अभियंता संस्थान द्वारा उन्हें 'प्रख्यात इंजीनियर' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।


वे भारत की वैमानिकी सोसाइटी के सदस्य और विफलता विश्लेषण सोसायटी के संस्थापक आजीवन सदस्य हैं।

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