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Director - LASTEC

यांत्रिक अभियंता,  डा. केएम राजनका शैक्षणिक करियर प्रशंसनीय रहा है। बी.टेक. (एनआईटी कालीकट) में उन्होंने विशेष योग्यता के साथ प्रथम श्रेणी प्राप्त की और एम.टेक. (आईआईटी बांबे) में टॉप किया। उन्होंने आईआईटी बांबे से फ्लो फॉर्मिंग के क्षेत्र में पीएच.डी. प्राप्त की। उनके पास मानव संसाधन प्रबंधन एवं परियोजना प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ एमबीए डिग्री और पुणे विश्वविद्यालय से जर्मन भाषा का प्रमाणप्रत्र भी है। डा. राजन के पास विभिन्न आयुध प्रणालियों, खासकर तोप प्रक्षेपास्र यानी आर्टिलरी रॉकेट्स के डिजायन एवं विकास का 32 साल का समृद्ध अनुभव है। रॉकेट मोटर्स के फ्लो फॉर्मिंग के क्षेत्र में उनके कार्य को अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली और वह जाने-माने रॉकेट प्रणोदन (प्रोपल्जन) विशेषज्ञ हैं जिनके विशेषज्ञ समीक्षित अंतरराष्ट्रीय जोर्नल्स एवं सम्मेलनों में 70 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।


अप्रैल 2014 को एआरडीई के निदेशक के रूप से में डा. राजन ने तकनीकी विकास के लिए परियोजना टीमों को निर्देशित किया, निर्णायक कार्यक्रमों को तीव्रता दी और नए प्रस्तावों की पहल की। PSNext सॉफ्टवेयर आधारित परियोजना निगरानी प्रणाली का प्रयोग करते हुए उन्होंने कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कड़ाई के साथ परियोजनाओं की निगरानी और समीक्षा की। गुणवत्ता औऱ विश्वसनीयता को सर्वोच्च महत्व देते हुए डा. राजन ने मजबूत उत्पाद डिजायन के लिए एफएमईए लागू किया। उन्होंने सांगठनिक लक्ष्यों के साथ मानव संसाधन को मजबूत करने और पुनःसंगठित करने के निरंतर प्रयास किए हैं। वैज्ञानिकों को उन्नत प्रशिक्षण के लिए भारत तथा विदेश में नियमित रूप से नियुक्त किया जाता है। अत्याधुनिक तकनीकी परियोजनाओं के लिए युवा वैज्ञानिकों को प्रमुख रूप से लगाया जाता है। वरिष्ठ वैज्ञानिकों को आवधिक रूप से नई-नई परियोजनाओं के लिए पुनर्नियुक्त किया जाता है ताकि वे सुचारू प्रगति के लिए एक नया परिदृश्य दे सकें। रिलाइबिलिटी डिवीजन और सॉफ्टवेयर IV एवं V डिवीजन बनाई गई है।

डा. राजन के पास 06 मार्च से 07 अप्रैल 2016 के बीच निदेशक, आर एंड डीई (इंजीनियर्स) दिग्गी का अतिरिक्त प्रभार रहा।


उल्लेखनीय योगदान:एडीआरई द्वारा डिजायन किया गया और विकसित किया गया विश्वस्तरीय एमबीआरए पिनाका का उत्पादनकरण और टीओटी में उनका योगदान मील का पत्थर है, जो सेना की अग्रिम पंक्ति की हथियार प्रणाली है। 600 से अधिक पिनाका प्रक्षेपास्र (रॉकेट्स) सेना को दिए जा चुके हैं। यूजर्स ने 1.19 लाख रॉकेट्स और 22 एमबीआरएस रेजिमेंट्स की आवश्यकता का अनुमान व्यक्त किया है। ड़ा. राजन पिनाका रॉकेट्स के मुख्य डिजायनकर्ता हैं। 60 किमी की बढ़ी रेंज और असाधारण सटीकता और अनुकूलता वाली पिनाका एमके-II  के विकास का नेतृत्व भी उन्हीं ने किया। स्वदेशी टर्बो जेनरेटर आधारित ईटी फ्यूज, रॉकेट मोटर्स की फ्लो फॉर्मिंग, नोजल आधारित इग्निशन और केस बंद मोटरें, रॉकेटों के लिए फिन स्थिरीकरण परिवेष्टन, फिनोसिल डिजायन कार्यप्रणाली का उच्च एल/डी निम्न नली संयोजक प्रणोदक ग्रेन आदि, सक्षम तकनीकें स्थापित की गई। सितंबर 2016 को पोखरन में हुए उपयोगकर्ता परीक्षण के दौरान 12,000 मीटर2  से बड़े क्षेत्र में अपने विध्वंसकारी प्रभावों से प्रतिकार करने में सक्षम एरिया डिनायल मुनिशन वारहेड के सफल प्रदर्शन के कारण और इसके अधिष्ठापन की उपयोगकर्ता की सिफारिश से पिनाका की ताकत को बड़ा प्रोत्साहन मिला। एटीएम और एसटीएम वारहेड्स उपयोगकर्ता परीक्षणों के लिए तैयार हो रहे हैं।


डा. राजन ने सेना के पास उपलब्ध जीआरएडी 122 एमएम रॉकेट की मारक क्षमता में वृद्धि के लिए रॉकेट तकनीकों में अपने व्यापक अनुभवों का प्रयोग किया जो तकनीकी विकास परियोजना के द्वारा युद्ध परीक्षण में 20 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 40 किलोमीटर हासिल कर ली गई। उन्होंने एआरडीई उत्पादों के टीओटी को सुसाध्य बनाया और फ्लो फॉर्मिंग, फिलामेंट वाइंडिंग, रॉकेट मोटर के लिए टीपीएस, प्रणोदक प्रसंस्करण आदि जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए देशभर में कई कार्य केंद्रों की स्थापना में सहायता की।


उन्नत कर्षक तोप गन प्रणाली (एटीएजीएस) के विकास के लिए डीआरडीओ का महत्वपूर्ण परियोजना डा. राजन के निरीक्षण में पूरी गति से बढ़ रही है, जो एडीआरई द्वारा विकसित स्थिर फायरिंग स्टैंड, अंगद (ANGAD) का प्रयोग करते हुए सफल गतिशील साक्ष्य परीक्षणों (डायनेमिक प्रूफ ट्रायल्स) से उत्साहित है। अपने संवाद कुशलता, सतर्क पर्यवेक्षण और समयबद्ध कार्यवाही के माध्यम से उन्होनें इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल असंख्य साथियों के साथ अच्छा तालमेल बनाया। इस तरह राष्ट्र के लिए पहली बार 155एमएम/52 कैलिबर आर्टिलरी गन को साकार करने की राह बना रहे हैं।


हायपरवेलोसिटी टनल फैसिलिटी के उन्न्नयन के साथ, एआरडीई की महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रो मैग्नेटिक गन परियोजना तीव्र पथ पर है। 12 एमएम और 30 एमएम स्क्वॉयर बोर की दो रेलगनों का संयोजन, 12 एमएम रेलगन की परीक्षण गोलीबारी और 1.6 एमजे कैपेसिटर बैंक के लिए विन्यास (लेआउट) पूरा हो चुका है औऱ अब लक्ष्य है 10 एमजे कैपेसिटर से 2000 मीटर/सेकंड से अधिक के वेग के साथ एक 1 किलो के गोले को दागना ।


डा. राजन बड़ी कुशलता के साथ प्रेसिजन निर्देशित युद्धसामग्री के क्षेत्र में एआरडीई का परिचालन कर रहे हैं। लेजर होमिंग केनन लांच्ड गाइडेड मिसाइल के लिए मिड-कोर्स मार्गदर्श स्थापित कर दिया गया है। एमबीटी अर्जुन एमके-II को शक्ति देने के लिए 120 एमएम लेजर निर्देशित एटीजीएम को विकसित किया जा रहा है। कनार्ड नियंत्रण के साथ आईएनएस + जीपीएस निर्देशन वाली गाइडेड पिनाका के विकास का लक्ष्य 60 – 80 की अचूकता और 80 किमी तक की बढ़ी हुई सीमा है। दिसंबर 2016 के दौरान गतिशील परीक्षणों की योजना है। जगुआर और एसयु-30 पर ग्रिफिन एलजी किट और डुअल फ्यूज के साथ 450 किलो के एचएसएलडी बम का प्रारंभिक अनुकूलन पूर्ण हो चुका है। डा. राजन के अनवरत फालो-अप के परिणामस्वरूप, एसयु-30 एयरक्राफ्ट को प्रसिजन गाइडेंस किट के साथ एचएसएलडी बम के लिए प्लेटफार्म के रूप में वायुसेना द्वारा मंजूरी दे दी गई है, इस तरह अंतिम कार्यान्वयन की बाधा भी हट गई है। रणनीतिक मिसाइलों के लिए विविध प्रकार के वारहेड्स का डिजायन एवं विकास भी एआरडीई में प्रगति पर है।


युद्ध-सामग्री का नया परिवार (एनएफएम) कार्यक्रम, जिसमें परिष्कृत आरएफ संचार विशिष्टता वाली छह प्रकार की बारूदी सुरंगें शामिल हैं, भली प्रकार प्रगति कर रहा है। निपुण (NIPUN) ने उपयोगकर्ता परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है, वैभव (VIBHAV) और विशाल (VISHAL) वर्तमान में उपयोगकर्ता परीक्षणों से गुजर रहे हैं। जबकि शेष उपयोगकर्ता परीक्षण की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कई इनफेंट्री परियोजनाएं सफलता की ओर बढ़ रही हैं, जैसे कि 40 एमएम एयर बर्स्टिंग ग्रेनेड, ज्वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन, बहु नाल व्यक्तिगत हथियार प्रणाली और कार्नर शॉट हथियार।


नौसेना के मोरचे पर, आरबीयू 6000 लांचर के लिए मौजूदा एंटी-सबमैरीन रॉकेट का 8.5+ किमी तक के सीमा विस्तार का प्रदर्शन सफलतापूर्वक कर लिया गया है।



आधारभूत संरचना का विकास: डा. राजन ने आधारभूत संरचना के विकास के लिए बहुत बड़ा योगदान किया है। पूर्ण सुसज्जित रॉकेट तकनीकी केंद्र, हाइपर वेलोसिटी सेंटर, एटीएजीए के लिए गन इंट्रीगेशन सुविधा, नवीनतम तकनीक से पूर्ण फ्यूज सिमुलेशन फेसिलिटी, पूरी तरह स्वचलित एनेकोइक चैंबर, एयरक्राफ्ट बमों के लिए स्ट्रक्चरल लोड टेस्ट फैसिलिटी, त्वरित प्रोटोटाइप मशीन, कोल्ड आइसोस्टेटिक प्रेस, स्पेशल प्रोजेक्ट फैसिलिटी, नवीनीकृत तकनीकी प्रबंधन डिवीजन, एसेस कंट्रोल सिस्टम के साथ सिक्युरिटी कांप्लेक्स, सुविकसित रेंज कांप्लेक्स, शस्त्र तकनीकी के लिए अत्याधुनिक सूचना केंद्र कुछ बड़े योगदान हैं। कंप्यूटिंग एवं नेटवर्किग सोल्युशन फैसिलिटी के आधुनिकीकरण में डा. राजन ने अत्यधिक रुचि ली है। विभिन्न हथियारों के लिए भिन्न प्रकार के शेप्ड चार्जेज के उत्पादन के लिए प्रोटोटाइप उत्पादन इकाई पर एक उन्नत 2-रोलर फ्लो फॉर्मिंग मशीन केंद्र की स्थापना की गई। एक वर्चुअल रियलिटी केंद्र और प्रोटोटाइप निर्णाण इकाई की पूर्ण मरम्मत प्रक्रियारत है।


शोध प्रकाशन: अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ समीक्षित जर्नल्स और सम्मेलनों में उनके 70 से अधिक शोध प्रकाशन हैं तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों एवं सेमिनारों में कई आमंत्रित वार्ताएं उनके नाम है।


सम्मान एवं पुरस्कार: डा. राजन को डीआरडीओ कार्यप्रदर्शन उत्कृष्टता पुरस्कार 2002 एवं 2012, प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी समूह पुरस्कार 2008 एवं 2012, एचईएमएसआई रजत जयंती पुरस्कार 2012, वर्ष के वैज्ञानिक पुरस्कार 2011, एअएसआई डा. बिरेन राय ट्रस्ट अवार्ड 2015 एवं एक्सीलेंस इन सेल्फ रेलियेंस 2015 के लिए डीआरडीओ अग्नि पुरस्कार  और कुछ पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। दो वैज्ञानिकों ने उनके निर्देशन में पीएच.डी हासिल की और एक वर्तमान में पीएच.डी कर रहा है।


पेशेवर संस्थाओं की सदस्यता. डा. राजन एयरोनॉटिक्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के फैलो हैं, इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के फैलो हैं, आईएनएसएआरएम नेशनल काउंसिल के सचिव और एएसआई, आईएसएनडीटी एवं एचईएमसीआई के आजीवन सदस्य हैं।

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