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हवाई वितरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, आगरा ने 1950 के उत्तरार्ध के दौरान कानपुर में एक छोटी सी शुरुआत की, जिसमें दो हवाई वितरण अनुभाग शामिल थे - अर्थात् - मुख्य निरीक्षणालय कपड़ा और वस्त्र (सीआईटी और सी) और मुख्य निरीक्षणालय जनरल स्टोर (सीआईजीएस) जोकि निरीक्षण महानिदेशक (डीजीआई) के नियंत्रण में थे।

मुख्य रूप से, ये दोनों अनुभाग पैराशूट और मानव तथा सामग्रियों के पैराड्रोपिंग से संबंधित उपकरणों के स्वदेशीकरण के लिए जिम्मेदार थे। इसके बाद, ये अनुभाग 1965 के दौरान आगरा में स्थानांतरित हो गए और एक पूर्ण प्रतिष्ठान के रूप में बदल गया, जिसका नाम मुख्य निरीक्षणालय हवाई वितरण उपकरण (सीआईएडीई) था। यह डीजीआई प्रतिष्ठान मई 1968 में डीआरडीओ के अंतर्गत आया और एडीआरडीई की स्थापना 1969 में आगरा में हुई।

प्रतिष्ठान के कर्तव्यों का घोषणापत्र भी संशोधित किया गया जिसमें हैवी ड्रॉपिंग सिस्टम, ब्रेक पैराशूट सिस्टम और टोवेड टारगेट सिस्टम का विकास शामिल था। इस प्रकार, लैब जो कपड़ा और वस्त्र तथा सामान्य स्टोर ग्रुप के दो छोटे अनुभागों के रूप में शुरू हुई, वह डीआरडीओ के तहत कई परिवर्तन और विस्तार के बाद एक परिपक्व और आर एंड डी प्रतिष्ठान में बदल गई।

1980 के दशक में डीआरडीओ के पुनरुत्थान के दौरान, इस प्रतिष्ठान की गतिविधियों की समीक्षा की गई और एडीआरडीई को एयरोनॉटिक्स के निदेशालय के तहत लाया गया। इसके साथ, एडीआरडीए की गतिविधियों को और बढ़ाया गया ताकि एयरक्राफ्ट अरेस्टर बैरियर, एयर कुशन वाहन और बलून प्रौद्योगिकी जैसे कार्यक्रमों को शामिल किया जा सके। पिछले दो दशकों के दौरान एडीआरडीए ने कई परियोजनाओं पर काम किया जिसमें पैराट्रूपर के पैराशूट सिस्टम, कार्गो और भारी उपकरण छोड़ने वाली प्रणालियों, एयरक्राफ्ट ब्रेक पैराशूट सिस्टम, आर्ममेंट डिलीवरी पैराशूट, रिकवरी पैराशूट सिस्टम, बैलून बैराज और निगरानी प्रणाली, छोटे और मध्यम श्रेणी की क्षमताओं के एयरोस्टेट और हाल ही में वायुयान और संबंधित अनुप्रयोग शामिल हैं।

यह प्रतिष्ठान अत्याधुनिक प्रणालियों के विकास के जरिए रक्षा सेवाओं और अंतरिक्ष संगठनों की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है।

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