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कार्मिक

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1960 के दशक के उत्तरार्द्ध में प्रशासन निदेशालय से कार्मिक निदेशालय (डीओपी) को अलग किया गया और 1972 में इसे स्थापित किया गया था। इसकी गतिविधियों में डीआरडीओ कर्मचारियों के प्रशासनिक और व्यक्तिगत मामले शामिल हैं। कार्मिक निदेशालय सबसे महत्वपूर्ण कॉर्पोरेट निदेशालयों में से एक है, निदेशालय को डीआरडीओ, डीओपी एवं टी और भारत सरकार की अन्य एजेंसियों के कार्मिक मामलों से संबंधित नीतियों और दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन का कार्य सौंपा गया है।

संगठनात्मक संरचना

कार्मिक निदेशालय आर एंड डी मुख्यालय में पहला आईएसओ 9001:2000 प्रमाणित निदेशालय है। पहला प्रमाणपत्र 31 मार्च 2004 को प्राप्त हुआ था। उसके बाद से निदेशालय को मुख्यालय में स्थापना और कार्मिक, प्रयोगशालाओं/स्थापनाओं और डीआरडीओ की परियोजनाओं/कार्यक्रमों से संबंधित उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए लगातार 31 मार्च 2007 से 30 मार्च 2010 तक प्रभावी अवधि के लिए एसटीक्यूसी द्वारा पुनः प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है।

आईएसओ 9001:2008 के संशोधन के बाद 10 मार्च 2011 को निदेशालय को तीन वर्ष की अवधि के लिए फिर से प्रमाणित किया गया और उसके बाद अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से और समय पर पूरा करने के लिए 2014 में अगले तीन वर्षों के लिए फिर से पुनः प्रमाणित किया गया है।

कार्यात्मक रूप से डीओपी को कई अनुभागों में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक डीआरडीओ के नागरिक/सेवा कर्मियों से संबंधित सेवा/कार्मिक मामलों के एक विशेष सेट के लिए जिम्मेदार है।

 
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