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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस निदेशालय का इतिहास वर्ष 1979 से तलाशा जा सकता है, जब डीआरडीओ मुख्यालय का पुनःगठन किया गया था। वर्ष 1979 में, सामान्य प्रशासन, आकस्मिक घटनाओं, टेलिफोन, यात्रा आदि जैसे मामलों के साथ निबटने के लिए एडी (बजट/योजना) के अंतर्गत दो प्रभाग जिनके नाम आरडी-29 (बी) 1 और आरडी-29 (बी) हैं, सृजित किए गए थे। दिसंबर 1982 में, एक पृथक प्रतिष्ठान निदेशालय प्रतिष्ठान की जरूरत महसूस की गई और यह निदेशालय इसके प्रधान के रूप में उप निदेशक (प्रतिष्ठान) के साथ सृजित किया गया। इस निदेशालय के पहले कार्याधिकारी लेफ्टीनेंट कर्नल एसके मंगल थे। वर्ष 1983 में, उपनिदेशालय (प्रशासन) का विलयन उपनिदेशक (प्रतिष्ठान) के साथ कर दिया गया और इसका नया नाम उपनिदेशालय (प्रशासन/प्रतिष्ठान) रखा गया। डीआरडीओ के संपूर्ण विकास तथा इस निदेशालय की जिम्मेदारियों को देखते हुए, वर्ष 1986 में इस पद का उन्नयनकर इसे निदेशक (प्रशासन/प्रतिष्ठान) का पद दिया गया। इस तरह, लेफ्टीनेंट कर्नल केपी गुप्ता प्रथम निदेशक बनें। मार्च 1991 में, यह निदेशालय दो भिन्न निदेशालयों, प्रशासन निदेशालय और प्रबंधन सेवाएं निदेशालय में बांट दिया गया। इनमें से प्रत्येक निदेशालय को आवंटित कर्त्तव्य नीचे दिए गए है

प्रशासन निदेशालय:

प्रयोगशालाएं/प्रतिष्ठानों के लिए प्रशासनिक सहयोग संबंधी मामलों से निपटना, उदाहरण के लिए, जेसीएम/यूनियन/एसोसिएसन, स्कूल, कैंटीन, फैक्ट्री अधिनियम आदि।

प्रबंधन सेवाएं निदेशालय

डीआरडीओ मुख्यालय को प्रशासनिक सहयोग संबंधी मामलों से निपटना, उदाहरण के लिए, परिवहन, आवास, टेलिफोन, कार्यालय उपकरण, स्टेशनरी, टीए/डीए आदि।

उपर्युक्त दोनों निदेशालय नवंबर 1992 में पुनः एक निदेशालय में विलीन कर दिए गए और इसे प्रबंधन सेवाएं निदेशालय के रूप में जाना जाता है। इस पुनःगठित निदेशालय के प्रथम निदेशक ब्रिगेडियर एसए जैदी थे। आज तक यही नाम एवं संगठन बना हुआ है।

 
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