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DRDO

मानव संसाधन विकास

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मानव संसाधन, डीआरडीओ जैसे अनुसंधान एवं विकास संगठनों का एक महत्वपूर्ण घटक है। मानव संसाधन विकास, कर्मचारियों की क्षमता और प्रभावी एवं सक्षम संगठनात्मक आउटपुट के विकास के लिए एक आवश्यक विशिष्टता है। हमारा लक्ष्य, कर्मचारियों के आंतरिक संभावनाओं को खोजना, तराशना और उपयोग में लाना तथा संगठन में एक अकादमिक एवं सीखने की संस्कृति विकसित करना है। डीआरडीओ, वैज्ञानिकों और उनके करियर की उन्नति तथा व्यवसायिक विकास के लिए उच्च तकनीकी क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण करियर का अवसर प्रदान करता है। उन्नत तकनीक, उपकरण, औजार, विशिष्ट प्रयोगशालाएं, जीवंत माहौल एवं विज्ञान व इंजीनियरिंग के सभी क्षेत्रों से विशेषज्ञों की उपलब्धता, इस संगठन की अनूठी विशेषताएं हैं। वैज्ञानिक, खुलापन एवं सक्षम वातावरण महसूस करते हैं जिससे वे अधिकतम योगदान दे सकते हैं एवं वांछित उत्पादन के लिए काम कर सकते हैं। संगठन प्रभावशीलता के लिए मानवीय प्रदर्शन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में डीआरडीओ की प्रशिक्षण नीति ठोस प्रयास के माध्यम से विकसित की गई है। यह उचित एवं व्यवस्थित प्रशिक्षण नीति का कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है, जिसमें वैज्ञानिक मानव संसाधन प्रबंधन एवं अनुसंधान एवं विकास संगठन के विकास पर विशेष जोर होता है। यह परामर्श, वैज्ञानिकों के पुनःप्रशिक्षण एवं तैनाती के क्षेत्रों को भी शामिल करता है। वैज्ञानिकों को, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों एवं सेमिनारों में अनुसंधान पेपर/प्रकाशन प्रस्तुत करने के लिए उत्साहित किया जाता है।

डीआरडीओ के वैज्ञानिक, उन्नत तकनीक रक्षा संस्थान (डीआईएटी), पुणे, डीम्ड विश्वविद्यालय में पोस्ट ग्रेजुएट और डॉक्टरेट स्तरीय कोर्स अपना कर उपार्जन, शिक्षण और सेवा कर सकते हैं। वैज्ञानिकों के भावी तकनीकी एवं व्यवसायिक विकास पर फोकस करते हुए ये कोर्स विशेष रूप से डीआरडीओ के लिए विकसित एवं डिजाइन किए गए हैं। सतत् शिक्षा, वैज्ञानिकों को संगठन के लिए प्रासंगिक रहने एवं उनके ज्ञान के विकास में मदद करता है।

डीआरडीओ, नागरिकों की सुरक्षा करने और उन्हें ज्ञान, तकनीक एवं विकास की नई क्षितिज तक पहुंचाने के लिए सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

 
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