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राजभाषा और ओ एवं एम

उपलब्धियाँ

  • सभी प्रयोगशालाओं/प्रतिष्ठानों में राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए सतत् प्रयास किए गए।
  • प्रयोगशालाओं/प्रतिष्ठानों में हिन्दी सहायक के पदों का सृजन किया गया।
  • प्रयोगशालाओं/प्रतिष्ठानों की समस्याओं को राजभाषा के प्रगतिशील उपयोग के लिए संपर्क/सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत सुलझाया गया।
  • एक तरफ तकनीकी सेमिनारों के आयोजन के लिए हिन्दी व्यवस्था में विज्ञान को लाया गया और दूसरी तरफ वैज्ञानिक विषयों पर हिन्दी में लिखे किताबों को पुरस्कृत करने के लिए डीआरडीओ मुख्यालय द्वारा पुस्तक पुरस्कार योजना की भी शुरूआत की गई जिसके अंतर्गत प्रत्येक वर्ष 10 किताबों को नगद पुरस्कार दिया जाता है। इस योजना के अंतर्गत अभी तक 35-40 पुस्तकों को पुरस्कृत किया जा चुका है। 
  • हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए डीआरडीओ मुख्यालय द्वारा इसके प्रयोगशालाओं/प्रतिष्ठानों के लिए अलग बजट आवंटित किया जाता है जो प्रति वर्ष एक करोड़ रूपये की राशि के लगभग है।
  • रक्षा उत्पादन एवं आपूर्ति और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के विविध अधीनस्थ कार्यालयों/ उपक्रमों में सरकारी कामकाज में हिन्दी का अधिकतम उपयोग कर वर्ष 1988-89 के लिए राजभाषा रनिंग ट्रॉफी प्रतियोगिता में डीआरडीओ ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। 
  • सभी प्रयोगशालाओं/प्रतिष्ठानों के लिए डीआरडीओ मुख्यालय द्वारा राजभाषा पर दो राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी सेमिनार संचालित किए गए। पहला वर्ष 1995 में एडीआरडीई आगरा में और दूसरा वर्ष 1998 में एलएएसटीईसी, मैक्फे हाउस, दिल्ली में आयोजित हुआ था। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय स्तर पर हैदराबाद, बंगलोर, पुणे, दिल्ली में राजभाषा “प्रबोधन कार्यक्रम” भी आयोजित किया गया।
  • डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं/प्रतिष्ठानों तथा डीआरडीओ मुख्यालय में राजभाषा निरीक्षण के दौरान, राजभाषा पर संसदीय समिति ने राजभाषा गतिविधियों की प्रशंसा की है।
 
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