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योजना तथा समन्वयन


निदेशक प्रोफ़ाइल


सुश्री नबानीता राधाकृष्णन को प्रबंधन सूचना प्रणाली और प्रौद्योगिकी (डीएमआईआईटी) निदेशालय का डी पी एंड सी के साथ विलय के बाद, डीआरडीओ मुख्यालय में सितंबर 2013 में योजना और समन्वय (डी पी एंड सी) का निदेशक नियुक्त किया गया था। गुइंडी इंजीनियरिंग कॉलेज, चेन्नई से इलैक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग में स्नातक और आईआईटी मद्रास से इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (नियंत्रण, मार्गदर्शन और इंस्ट्रुमेंटेशन) में स्नातकोत्तर होने पर, 1984 में वे डीआरडीओ मेँ संग्राम वाहन अनुसंधान तथा विकास संस्थापन(सीवीआरडीई) में शामिल हुईं,  जहां उन्होंने शुरुआत में मुख्य युद्ध टैंक सब-सिस्टम जैसे कि इंजन, ट्रांसमिशन और सस्पेंशन के परीक्षण और मूल्यांकन के लिए काम किया।

1992 में, उन्हें एलसीए प्रोग्राम के लिए एयरक्राफ्ट मांउटिड एसेसरी गियरबॉक्स (एएमएजीबी) के डिजाइन एवं विकास के लिए सीवीआरडीई में परियोजना टीम के भाग के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने एएमएजीबी की परीक्षण आवश्यकताओं और स्वदेशी तौर पर विकसित पीटीओ शाफ्ट के लिए अत्याधुनिक परीक्षण सामग्री के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। परियोजना प्रबंधक के रूप में, उन्होंने एएमएजीबी - एलसीए में एकल सबसे बड़ा, गतिशील रूप से संचालित, स्वदेशी तौर पर विकसित एलआरयू का 1000 से अधिक घंटे का परीक्षण और महत्वपूर्ण विमान प्रमाणन प्रक्रिया पूर्ण की।

जून 2004 में, उन्हें डीआरडीओ मुख्यालय में जी-फास्ट (प्रणाली और प्रौद्योगिकी के पूर्वानुमान हेतु समूह- डीआरडीओ थिंक टैंक) और डीआरडीओ परियोजनाओं और कार्यक्रमों के तकनीकी-प्रबंधन विश्लेषण प्रदान करने के लिए एसए से आरएम के साथ सबंद्ध हुईं। उन्होंने चीन और पाकिस्तान सहित अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में तकनीकी विकास के रणनीतिक विश्लेषण के लिए दिल्ली के विभिन्न थिंक टैंकों के साथ समन्वयित अध्ययन किया है।

उन्होंने दिसंबर 2009 में नव निर्मित प्रबंधन सूचना प्रणाली और प्रौद्योगिकी (एमआईएटी) निदेशालय के निदेशक के रूप में पदभार संभाला। एमआईएसटी के निदेशक के रूप में, उन्होंने कई आईटी पहलों की शुरूआत की जिसमें डीआरडीओ वाइड इंट्रानेट डरोना (DRONA), विभिन्न स्तरों पर सुरक्षा संस्थापना, ऑनलाइन समीक्षाओं और बैठकों के लिए एंटरप्राइज वाइड वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम, एक डीआरडीओ व्यापक संदेश और सहयोग समाधान, डीआरडीओ परियोजनाओं की ऑनलाइन ट्रैकिंग और DRONA पर कई अनुप्रयोगों के विकास सहित एचआर, कार्मिक और डीएमएमएम लेनदेन शामिल था।

जुलाई 2012 में, उन्हें माइक्रोएलेक्ट्रोनिक्स एवं डिवाइसेस निदेशालय के अतिरिक्त प्रभार दिए गए, जिनमें कई प्रयोगशालाओं जैसे एसएसपीएल, एमटीआरडीसी और डेसीडॉक और सिटार सोसायटी के कार्य की निगरानी करना जो कि एमएमआईसी और एमईएमएस के फैब में शामिल थे। इस क्षमता में, उन्होंने प्रयोगशालाओं की परियोजनाओं / गतिविधियों का समन्वय किया और एसआईटीआरए सोसाइटी के बेहतर कामकाज के लिए कई नीतिगत उपायों की शुरुआत की।

उन्होंने एयरक्राफ्ट गियरबॉक्स के विकास और विभिन्न मंचों पर डीआरडीओ उत्पादों और प्रणालियों पर कई दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं।

वे 2008 के लिए डीआरडीओ वर्ष के वैज्ञानिक पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ टैक्नो-मैनेजरियल सर्विस अवार्ड 2012 के लिए टीम पुरस्कार की प्राप्तकर्ता हैं।

वे एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और इंस्ट्रूमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया की सदस्या हैं।

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