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ईआर और आईपीआर

कार्य क्षेत्र

अनुदान सहायता स्कीम
बाह्य अनुसंधान (ईआर) स्कीम के तहत शैक्षिक संस्थानों में प्रायोजित अनुसंधान में उन संवृत्तियों अथवा प्रेक्षणों पर फोकस रखा जाता है, जो समझे नहीं जा सके हैं और समझ की यही कमी सैन्य आर एवं डी के लिए प्रासंगिकता के व्यापक टॉपिक एरिया में वैज्ञानिक अथवा प्रौद्योगिकी प्रगति में बाधा मानी जाती है। इस प्रकार जनित ज्ञान आधार उच्च गुणवत्ता की जनशक्ति में समाहित किया जाता है तथा मूल अनुसंधान के माध्यम से नई समझ, तकनीक और डिजाइन टूल्स विकसित किए जाते हैं। यह नया ज्ञान पारम्परिक सैन्य भूमिकाओं की मिशन-प्रभाविता में महत्वपूर्ण प्रगति का पथ प्रशस्त कर सकता है।
उक्त विस्तारित ज्ञान-आधार के समानांतर, ईआर कार्यक्रम के तहत वित्तपोषित अनुसंधान का प्राथमिक अंत-परिणाम योग्य लोगों के नेटवर्क समूह के रूप में प्राप्त होता है, जिनकी अनुसंधान परिणामी महारत का उपयोग नई प्रौद्योगिकी के दोहन योग्य क्षेत्र के निर्माण हेतु किया जा सकता है, जिसमें सैन्य अनुप्रयोग की संभावना मौजूद हो।
ईआर स्कीम डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और प्रतिष्ठानों तथा शिक्षा जगत के बीच सहयोग ज्ञापनों (एमओसी) के दस्तावेजों को भी अवलम्ब प्रदान करती है। इन एमओसी में डीआरडीओ के एक से अधिक प्रतिष्ठान अनिवार्य रूप से सम्मिलित होते हैं तथा इनके व्यापक विषय क्षेत्र के भीतर विषय श्रृंखला पर खोज एवं अनुसंधान सम्मिलित होते हैं। उक्त विषय क्षेत्र मूल रूप से सहयोगी प्रयोगशालाओं एवं प्रतिष्ठानों की अनुसंधान गतिविधियों तथा चयनित सहयोगी शिक्षा संस्थानों के अनुसंधान-विषय शाखाओं के बीच अंतर्सम्पर्क कायम करता है। उक्त संस्थानिक अंतर-सम्पर्क जैविक होता है तथा प्रकरणात्मक नहीं होता है तथा एमओसी में प्रबंधन संरचना के माध्यम से प्रचालनशील बनाया जाता है, जिसमें सहयोगी डीआरडीओ संस्थानों के निदेशकों के स्थायी प्रतिनिधित्व की व्यवस्था होती है।
ईआर स्कीम में डीआरडीओ की गतिविधियों से संबंधित विषयों पर सम्मेलन/संवादगोष्ठियां/कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर):
आईपीआर ग्रुप, वर्तमान काल में, डीआरडीओ वैज्ञानिकों को उनके द्वारा किए गए नवाविष्कारों के कानूनी संरक्षण के कार्य के अतिरिक्त इसकी अन्य निर्दिष्ट भूमिकाओं में पूर्ण सहायता प्रदान करता है। वर्तमान समय में, आईपीआर ग्रुप के मूल कार्यों में निम्नलिखित कार्य सम्मिलित हैं:

    • राष्ट्रीय आईपीआर मुद्दों पर डीआरडीओ का परिप्रेक्ष्य तैयार करना जिसमें कानूनी दस्तावेज तैयार करना तथा आवश्यकता के अनुसार मंत्रालयों/विभागों के साथ अन्योन्यक्रिया सम्मिलित है।
    • डीआरडीओ के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए नवाविष्कारों के संबंध में भारत और विदेश में पेटेन्ट/कॉपीराइट/डिजाइन आवेदन प्रस्तुत करने द्वारा कानूनी संरक्षण प्रदान करना।
    • आईपीआर संस्कृति को वैज्ञानिकों के आर एवं डी प्रयासों का अभिन्न अंग बनाने के दीर्घकालिक उद्देश्य के साथ डीआरडीओ के वैज्ञानिकों के मध्य आईपीआर संस्कृति को प्रोत्साहन देना।
    • डीआरडीओ के आईपीआर पोर्टफोलियो का प्रबंध करना।
 
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